Hindi Love Poems | प्रेम पर कविता | Poem about Love

प्रेम कविताएँ

New Love Poems : प्यार एक एहसास के साथ-साथ Love’s Philosophy भी है। जिसे केवल महसूस किया जा सकता है जो कि दिल से नहीं दिमाग जरिये होता है। यह एक ऐसी क्रिया है जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति की ओर भावनात्मक या धार्मिक प्रकार से आकर्षित होता है तो वह प्रेम कहलाता है एवं वह Love of God भी हो सकता है। सभी जानते है कि प्यार को समझना इतना आसान भी नहीं है।

इसलिए हम आज आपके लिए कुछ Hindi Love Poems by Famous Poets के जरिये आपने लिए प्रस्तुत कर रहे है इस Article में आपको Poem on Unrequited Love, God’s Love, Long Distance Love और Love and Life के साथ ही आपको Deep Love Poems for Him in Hindi एवं Love Poetry in Hindi Lyrics के बारे में जानकारी मिलेगी।

आप Internet पर भी Romantic Love Poems for Her in Hindi, & Sad Hindi Love Poems के बारे में पढ़ सकते है और चाहे वो आपका Sister Love, Love at First Sight हो या Love for Nature. अपने इस Love and Friendship को बनाये रखने के लिए इस लेख को ध्यान से पढ़े।

Poem on Lovers

इश्क़

ज़िक्र तेरा मेरी बातों में होने लगा है
तेरा हर ख्वाब आँखों में रहने लगा है
सोचते हैं हर पल बस अब तेरे ही बारे में
कैसे कहूँ मुझे इश्क़ अब तुझसे होने लगा है
जब देखे वो मुझे आँखें भी मानो शर्मा सी जाती हैं
मेरी हर अदा पर उसका जैसे पहरा सा रहने लगा है
देखूं जब भी आईना मैं अक्स उसका मुझमें दिखने लगा है
रहती हूँ हर वक़्त बस उसके ही ख्यालों में और दिल भी अजब सा धड़कने लगा है
-निशि

KABHI DO HAMEIN BHI YAH MAUKA

कभी दो हमें भी यह मौका,
सजदे में तेरे झुक जाएं हम,
लेके हाथ तेरा हाथों में,
प्यार की चूड़ियाँ पहनाएं हम
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
ज़ुल्फों की छाँव में रहने का,
तेरे कानों में गुफ़्तगू कहने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
होठों से होठ मिलाने का,
तेरी बाहों में सो जाने का,
रात में तेरे ख्वाबों में जी लेने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
शाम के एहसास का,
गहरे से जज़्बात का,
आँखों में डूब जाने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
नज़्म में तुझको दिल दे जाने का,
ग़ज़ल में तेरे गीत गुनगुनाने का,
सुरों की ज़िन्दगी में तेरे शामिल हो जाने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
ज़िन्दगी की मुकम्मलता का,
दुल्हन बन के तुम्हारे घर आजाने का,
सुहाग की सेज पर हमको प्यार जताने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,

कभी दो हमें भी यह मौका,
सुबह आँख खुले तो तेरे दीदार का,
बाहों में सुलगते से जिस्म का,
मांग में तेरी सिन्दूर भर देने का,
कभी दो हमें भी यह मौका,
खुदको जाता देने का,
अपना प्यार दिखने का,
कभी दो हमें भी यह मौका
-गौरव

आई लव यू पोअम

देखा जब उसे
देखा जब उसे …
दिल में आग लग गयी ….
वक्त थम गया
और धडकन रुक गयी …
पास जाकर देखा
तो चांद सी खिल गयी …
कुर्ता जॅकेट में
अप्सरा सी मिल गयी ….
क़ातिल निगाहों में
चमक उठी थी …
उसकी हर मुस्कुराहट पे
सांसे रुकी थी …
उसकी हर अदाओं पे
हम फिदा हो गए …
जन्नत सी दिख गयी
और हम वफा हो गए ….
-संकेत गुंगे

Poem on Love for Her/Him

तुम वो क़िताब हो

एक प्यार का पन्ना लिखने बैठे थे आपके लिये
लिख दी एक पूरी क़िताब ,क्योकि
आप वो पन्ना हैं जिसने हमें ज़िन्दगी की राह पर हर क़दम पर साथ दिया है
आप वो पन्ना है
जिसको एक बार कोई इंसान देख ले तो जैसे नशे में नाच उठता है
आप वो पन्ना है
जो हमारे हर सास में जैसे बस्ती हैं
आप वो पन्ना है
जो कोयल जैसे सबको अपनी आवाज़ से जगलेते हैं
आप वो पन्ना है
जो प्यार से नहीं महोब्बत से लिखा है
आप वो पन्ना है
जो जैसे शाह जहा और मुमताज़ की अमर दस्ता की हकदार है
और आप वो पन्ना है
जिसके दिल से हमारा दिल जुड़ा है
– एक अजनबी

AE KHUDA USKE SATH RAKH

ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख
उसकी ख़ुशी के लिए तेरे पास आया हूँ
मेरी दुआ अब तेरे क़दमों में रख

मानता हूँ भूल गया था मैं
लेकिन अब वापिस आया हूँ तो निराश न रख

बच्चा समझ के माफ़ कर दे मुझे
तेरे क़दमों में मेरे लिए थोड़ी सी जगह रख
ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख

प्यार करता हूँ मैं उस से बेपनाह
दूर होके नहीं रह सकता उसके बिना

शादी न सही
लेकिन उसको मेरी नज़रों के सामने रख
ऐ खुदा उसके साथ रख
थोड़ा पास रख

-The Fiend

क्या हो तुम (कविता का शीर्षक)
तुम्हें पता है कौन हो तुम
मेरे जिंदगी की अनछुई परछाई हो तुम
समझता मैं भी अजनबी था तुझे,
मिला मुझे खुद का पता जब न था,
मिली जब पनाह तेरे प्यार की,
छोड़ हक़ीक़त सपनों में खो गया,
मिला तेरा साथ तो अपनों का हो गया,
बिताये हर एक पल ग़मों से दूर रहा मैं,
रहता जिस गुरुर में था मैं,
उससे दूर रहा मैं,
मुझे नहीं पता क्या सीखा तुमने मुझसे,
मगर इस दिल ने सीखा बहुत तुझसे,
सपनों की हक़ीक़त,
हक़ीक़त का टूटना,
ज़िन्दगी की सच्चाई,
और दिल का रूठना,
अब इससे ज़्यादा क्या बताये ये दिल
प्यार और इबादत की तालीम हो तुम
आज जाना मेरी अधूरी जिंदगी में मीठा सवाब हो तुम,
इस दिल की नहीं तुम,
ऊपर वाले की प्यारी रचना हो तुम,
ये तारीफ नहीं जुबां की,
बस वाक्या है मेरे दिल का,
रहे मेरे पास शायद वजह यही है मेरे सिर झुकाने की,
रहे तू हमेशा मेरी ज़रूरत नहीं मुझे ये बताने की,
यूं निगाहों से नहीं चाहा कभी तुझे,
ये दिल तुझपे निसार था,
ज़िन्दगी पर किसी का हक ये गवारा मुझे न था,
पर पाबंदिया उसूलों से अच्छी होंगी,
ये वक़्त से ज़्यादा तूने बताया था,
रहे उस सोने की तरह जो ढल जाता सांचे में,
रहूँ मैं उस साँचे जैसा ढले जिसकी आस में,
क्योंकि माँ तो नहीं मगर ज़िन्दगी की अंतिम सांस है तू,
आज हक़ीक़त को जाना,
ज़िन्दगी के हर किनारे का साथ है तू,
ये शब्द नहीं जज़्बात हैं मेरे,
वरना दिल-ए फ़क़ीर क्या जाने,
मेरी मुस्कान का राज़ है तू।
-राणा कौशलेंद्र प्रताप सिंह (कवि)

 

Poem on I Love You

मेरी बात
आज फिर हमारी नज़रे मिली
वो मुझे देखकर मुस्कुराने लगी
उसके होठों की हसी मुझे बहाने लगी
मुझे लगा की आज अपने दिल की बात कह दूंगा
जो होगा उसे सच मान आगे बढ़ लूँगा
मगर उसे किसी और से प्यार था
वो तो किसी और पे मरती थी और
मैं उसके लिये सिर्फ उसका एक यार था
मेरे दिल में उसके लिये सिर्फ और सिर्फ प्यार था
इसलिये मेरी हिम्मत फिर से हार गयी
उससे अपने दिल की बात कहने की
अपने दिल के जज़्बात कहने की
वो खवाहिश फिर से खत्म कर दी
ये दिल की फ़रमाइश पूरी ना हो सकी और
फिर से मेरी बात अधूरी रह गयी
– मनोहर मिश्रा

तुमसे
उस एक दिन जब बातें शुरू हुई तुमसे
लगा कुछ तो अलग सा है तुम में
लगा कुछ तो नया सा है तुम में
फिर रोज़ की बातें होती गयी
और यूं बिना सोचे पिघलती रही मैं उन में
यूं ही बिना समझे फिसलती रही उस रास्ते पे
हाँ पता था मुझको दोबारा उसी रास्ते जा रही हूँ जहाँ गम बहुत हैं
पर गम की क्या बिसात यहाँ तुम्हारा साथ बहुत है
उस दिन जब पहली मुलाकात हुई तुमसे
लगा जैसे मैं खुद को मिल गयी
मेरे अंदर की मुरझाई कली खिल गयी
फिर तुम्हारा मुझको छूना
चूमना मुझको गले लगा कर
कसम से मेरे अंदर कुछ तो कमाल कर गया
बहुत दिनों से शांत मेरे मन में सवाल कर गया
फिर मिलना हुआ और मिलते रहना हुआ
तुम्हारी बातें तुम्हारी आँखों से पढ़ना हुआ
तुझको ढूंढ कर तुझमें ही खोना हुआ
सच, ये एक प्यार सिर्फ तुमसे कई हज़ार बार हुआ
फिर हुआ कुछ बुरा
शायद उपरवाले की मर्ज़ी थी
तेरा मुझसे कई दफे रूठ जाना हुआ
मेरा तुझको हर दफे मनाना हुआ
और हर आंसू के बाद भी
दुआ में उठे हाथ
और झुकी नज़रों में तेरी खैरियत का आना हुआ
-अश्वनी कुमार

Heart Touching Poems

मुझे तुमसे इश्क़ हो गया
खुदा से मिला रहमत है तू
मेरे लिए बहुत अहम् है तू
तेरे प्यार का मुझपे रंग चढ़ गया
मुझे तुमसे इश्क़ हो गया
न न करते कब हाँ कर बैठी
दिमाग का सुनते सुनते कब दिल की सुन ली
बस इतना पता है तुमसे इश्क़ हो गया
कब हुआ कैसे हुआ बस हाँ तुमसे इश्क़ हो गया
तेरे ख्यालों में रहती हूँ
खुद से ही तेरी बातें करती हूँ
तेरे नाम से ही मुस्कुरा देती हूँ
तुम्हें खबर भी नहीं और मैं तुम्ही से बेइंतहा प्यार करती हूँ
खुदा की मुझपे नेमत है तू
मेरी बरकत है तू
तुझसे दिल का राब्ता हो गया
मुझे तुमसे इश्क़ हो गया
-अंजलि महतो

A Short Poem on Love

छोटी कविता

सुनो (कविता का शीर्षक )

सुनो, क्या दो पल मुझसे बात करोगी?
सुनो, ज़िन्दगी के सफ़र पर तुम मेरे साथ चलोगी?
सुनो, मेरी कहानियों से निकल तुम रास्ते में मेरा हाथ पकड़ोगी?
सुनो, तुम क्यों हर वक्त जानकर भी अनजान बनती हो
कुछ सीख तुम्हें भी तो मिली होगी
कि कैसे किया जाता है प्यार
एक बार फिर पूछता हूँ
सुनो क्या तुम मुझसे प्यार करोगी?
-बसंत चौधरी (कवि )

आई फ़ोन है उसके पास

आई फ़ोन है उसके पास
जीन्स उसकी लेविस स्ट्रॉस
लिपस्टिक और मेकप पोत कर
निकलती घर से सज-धज कर
मुझको वो खूब थी भा गयी
जब से देखा नींद उड़ गयी
मैंने भेजा फ्रेंड रिक्वेस्ट
कर दिया उसने वो रिजेक्ट
उससे बात कैसे बढ़ाऊँ
कुछ मैं ये समझ न पाऊं
क्या उसको भेजूं गुलाब
या दे दूँ कोई रोचक किताब
रोज़ हूँ मैं सोचता रह जाता
दिल की बात बता न पाता
-अनुष्का सूरी

कुछ कहो तो सही

एक अजनबी तुम एक अजनबी हम
अनजानी राहों में मिल जाएंगे
कुछ कहो तो सही
गर बात होगी, तो तनहा न ये रात होगी
ये खामोश लब खुद-ब-खुद मुस्कुरायेंगे
कुछ कहो तो सही
गमों को उतार इन एहसासों में डूबकर तो देखो
ज़ख्म खुद-ब-खुद भर जाएंगे
कुछ कहो तो सही
हाथों में हाथ होगा, एक-दूजे का साथ होगा
ये दृग-मेघ खुद-ब-खुद बरस जाएंगे
कुछ कहो तो सही
वक्त के उन क्रूर पलों को बिसार दो
कुछ इबादत तुम्हारी कुछ दुआ हमारी रंग लाएंगे
कुछ कहो तो सही
ये असहज मौन न साधो
क्या भरोसा इन लम्हों का कब बिछड़ जाएंगे
कुछ कहो तो सही ।
-ज्योति आशुकृषणा

Poem on Love in English

Let Me

Let me take care of your broken heart
and show you how to fly.
Let me hold you gently by the hand
and kiss your tears goodbye.

Let me lead you to tomorrow’s light
and out of needless rain,
’cause all I want right now
is to see you smile again.

Let me sing you all the songs I wrote
’til you sleep in my embrace,
and I’ll keep you safe and warm until
the sunlight strokes your face.

Let me bring you up the mountain’s peak,
and I’ll let you touch the skies
to remind you of the strength I see
when I look into your eyes.

Let me kiss and show you what is love
and the happiness it brings.
You’ll sail again like a butterfly
endowed with pretty wings.

Let me do all these to let you see
our fates are intertwined.
You’re the accidental precious gem
I’ve waited long to find.

The earth and sky conspired to make us meet.
They knew we both belong
to each other like words and lovely notes
give life to every song.

So fly with me, my beautiful one.
It’s time we leave the past.
I’m yours to keep, and you are mine.
We’re finally home at last.

अंग्रेजी मे कविता

It seems that I am falling in love with her
I have not seen her face
Still, I am creating her statue
I am restless during the day
And I cannot sleep at night
It seems that I am falling in love with her
Tears flow down my eyes in her remembrance
Now my eyes have started loving tears
Pen wants to write only about you
And your talks have started appearing in my talks
It seems that I am falling in love with her
I spend my nights in her memories
I groom myself in my own talks
My talks have started getting deep in lonely nights
Now my heart’s loneliness has started converting into love
It seems that I am falling in love with her
I find the morning sunlight somewhat incomplete
The heavily crowded roads of market also seem deserted to me
My eyes have started looking for her arrival
Now, even months have started waiting for the years
It seems that I am falling in love with her
The glow on her face seems simple
The moon is full but the light seems half
The raindrops have started drenching me now
Now my heartbeat has also started forming memories
It seems that I am falling in love with her
Now also I am waiting for her while sitting at my doorstep
From morning until evening and evening until morning is spent in her wait
My loneliness has started saying when will you come
The talks of loneliness seem false to my heart
It seems that I am falling in love with her.

Love’s Language

How does Love speak?
In the faint flush upon the telltale cheek,
And in the pallor that succeeds it; by
The quivering lid of an averted eye–
The smile that proves the parent to a sigh
Thus doth Love speak.

How does Love speak?
By the uneven heart-throbs, and the freak
Of bounding pulses that stand still and ache,
While new emotions, like strange barges, make
Along vein-channels their disturbing course;
Still as the dawn, and with the dawn’s swift force–
Thus doth Love speak.

How does Love speak?
In the avoidance of that which we seek–
The sudden silence and reserve when near–
The eye that glistens with an unshed tear–
The joy that seems the counterpart of fear,
As the alarmed heart leaps in the breast,
And knows, and names, and greets its godlike guest–
Thus doth Love speak.

How does Love speak?
In the proud spirit suddenly grown meek–
The haughty heart grown humble; in the tender
And unnamed light that floods the world with splendor;
In the resemblance which the fond eyes trace
In all fair things to one beloved face;
In the shy touch of hands that thrill and tremble;
In looks and lips that can no more dissemble–
Thus doth Love speak.

How does Love speak?
In the wild words that uttered seem so weak
They shrink ashamed in silence; in the fire
Glance strikes with glance, swift flashing high and higher,
Like lightnings that precede the mighty storm;
In the deep, soulful stillness; in the warm,
Impassioned tide that sweeps through throbbing veins,
Between the shores of keen delights and pains;
In the embrace where madness melts in bliss,
And in the convulsive rapture of a kiss–
Thus doth Love speak.

SAMAY MILE TO AKAR MILNA
समय मिले तो आकर मिलना
लाइब्रेरी की टेबल पर,
कुछ न बोलेंगें हम ज़ुबाँ से
और अटकेंगे किताबों पर,
पलटेंगे पेजों को यूँ हीं
लफ्ज़ सुनेंगें हज़ारों पर,
लिखे हुए लैटर का क्या करना ?
जज़्बात पढ़ेंगे आँखों पर,
दांतों तले कभी होंठ दबाते
मुस्कान छुपायेंगे होंठों पर,
समय मिले तो आकर मिलना,
लाइब्रेरी की टेबल पर।

अब दिल ये मेरी सुनता नहीं

बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
हर धड़कन में अब तुम हो बसे
कि ये सपना कोई बुनता नहीं
तुम अब मेरे नही हो सकते ये दिल भी जानता है
पर इस दिल का क्या कसूर ये तो तुझे ही खुदा मानता है
तुम कहते हो जीवन में आगे बढ़ो सब ठीक होगा
लेकिन तुम्हें भी पता है कि तुम्हारी तरह कोई मुझे समझ सकता नहीं
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
भले ही ऊपरवाले ने हमारी जोड़ी ना बनाई हो
लेकिन इस जीवन में कुछ पल ही सही तेरे होने का एहसास हुआ , इससे बड़ी क्या खुदाई हो
बस दुआ है यही रब से…….
जब जिंदगी दे तो तेरे साथ नही तो जिंदगी ना दें
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नही
ऐ मेरे हमदम मुझपर एक और एहसान कर
आखिरी ख्वाहिश है दिल की यही समझकर
मेरा दिल तो रौशन है बस तेरे ही होने से
इसलिए इस दिल में तुम कभी अंधेरा करना नही
बहुत समझाया है मैने इस दिल को
पर अब ये मेरी सुनता नहीं
-प्रशांत आयुष वर्मा

दिल की इस दीवार पर

प्यार भरे शब्दों से कोई पैगाम लिखता हूँ।
तड़प कर जिया हूँ बरसों तक।
इस तड़प का कोई एहसास लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
हँसा था जो तूने मुझे देख प्यार से।
उन जादू भरी नजरों का अंदाज लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
नाम तेरा बेनाम है सावन का कोई पैगाम है।
बरसती हुई इन बूंदों में भीगा सी एक शाम है।
जीवन की हर शाम को आज तेरे नाम लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
मेरी हर तमन्ना अधूरी थी तुझे पाने से पहले।
इन तमन्नाओं को आज जीने की वजह लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
सीने में धड़कते दिल को तेरा खत मिल गया।
सायरो की भीड़ में एक सायर नया बन गया।
आज इसी सायरी को तेरे नाम लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
मैं कोई शायर नहीँ न तू मेरी कोई कल्पना है।
तू हकीकत है तू इबारत है तू ही इस दिल की इबादत है।
दिल में तेरी मोह्बत का कलमा बार बार पढता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
दुआओं की भीड़ है तेरे लिये बहुत सी।
मगर मेरी भी एक दुआ छोटी सी कबूल कर लेना ऐ खुदा।
उसको रखना सदा दिल के पास।
कैसे कहूँ तुझे दिल से आज खुदा लिखता हूँ।
दिल की दीवार पर तेरा नाम लिखता हूँ।
बस तेरा ही नाम लिखता हूँ।
-गौरव

Poem on Mothers Love

मा प्रेरम पर कविता

मेरे सर पर भी माँ की दुवाओं का साया होगा

मेरे सर पर भी माँ की दुवाओं का साया होगा,
इसलिए समुन्दर ने मुझे डूबने से बचाया होगा..

माँ की आघोष में लौट आया है वो बेटा फिर से..
शायद इस दुनिया ने उसे बहुत सताया होगा…

अब उसकी मोहब्बत की कोई क्या मिसाल दे,
पेट अपना काट जब बच्चों को खिलाया होगा…

की थी सकावत उमर भर जिसने उन के लिए
क्या हाल हुआ जब हाथ में कजा आया होगा…

कैसे जन्नत मिलेगी उस औलाद को जिस ने
उस माँ से पैहले बीवी का फ़र्ज़ निभाया होगा…

और माँ के सजदे को कोई शिर्क ना कह दे
इसलिए उन पैरों में एक स्वर्ग बनाया होगा…

है माँ…..

हमारे हर मर्ज की दवा होती है माँ….
कभी डाँटती है हमें, तो कभी गले लगा लेती है माँ…..
हमारी आँखोँ के आंसू, अपनी आँखोँ मेँ समा लेती है माँ…..
अपने होठोँ की हँसी, हम पर लुटा देती है माँ……
हमारी खुशियोँ मेँ शामिल होकर, अपने गम भुला देती है माँ….
जब भी कभी ठोकर लगे, तो हमें तुरंत याद आती है माँ…

दुनिया की तपिश में, हमें आँचल की शीतल छाया देती है माँ…..
खुद चाहे कितनी थकी हो, हमें देखकर अपनी थकान भूल जाती है माँ….
प्यार भरे हाथोँ से, हमेशा हमारी थकान मिटाती है माँ…..
बात जब भी हो लजीज खाने की, तो हमें याद आती है माँ……
रिश्तों को खूबसूरती से निभाना सिखाती है माँ…….
लब्जोँ मेँ जिसे बयाँ नहीँ किया जा सके ऐसी होती है माँ…….
भगवान भी जिसकी ममता के आगे झुक जाते हैँ
– द्वारा कुसुम

माँ और भगवान

मैं अपने छोटे मुख कैसे करूँ तेरा गुणगान,
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान..

माता कौशल्या के घर में जन्म राम ने पाया,
ठुमक-ठुमक आँगन में चलकर सबका हृदय जुड़ाया..
पुत्र प्रेम में थे निमग्न कौशल्या माँ के प्राण,
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान..

दे मातृत्व देवकी को यसुदा की गोद सुहाई..
ले लकुटी वन-वन भटके गोचारण कियो कन्हाई,
सारे ब्रजमंडल में गूँजी थी वंशी की तान..
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान..

तेरी समता में तू ही है मिले न उपमा कोई,
तू न कभी निज सुत से रूठी मृदुता अमित समोई..
लाड़-प्यार से सदा सिखाया तूने सच्चा ज्ञान,
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान…

कभी न विचलित हुई रही सेवा में भूखी प्यासी..
समझ पुत्र को रुग्ण मनौती मानी रही उपासी,
प्रेमामृत नित पिला पिलाकर किया सतत कल्याण..
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान…

‘विकल’ न होने दिया पुत्र को कभी न हिम्मत हारी,
सदय अदालत है सुत हित में सुख-दुख में महतारी..
काँटों पर चलकर भी तूने दिया अभय का दान,
माँ तेरी समता में फीका-सा लगता भगवान…

– जगदीश प्रसाद सारस्वत ‘विकल’

ओ माँ

ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
सबसे सुन्दर
सबसे प्यारी
तू है मेरी माँ
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
तू ही विद्या
तू ही पूजा
मेरी प्यारी माँ
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
तू मेरा धन
तू मेरा मन
मेरी प्यारी माँ
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
तेरे चरणों
में बसे हैं
मेरे चारों धाम
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
मेरा जीवन
तेरी देन है
मेरी प्यारी माँ
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ मा
तुझको चाहूँ
करूँ तेरी सेवा
मेरे यही अरमां
ओ माँ ओ माँ
ओ माँ ओ माँ
– अनुष्का सूरी

Poem on Self Love

काश…काश…

कहने की हैं बातें
डरता हूँ
जब सोता हूँ रातें
सोचता हूँ

काश हम मिलें
कुछ बोलें
दर्द सिले
कुछ न टोले

चाहता नहीं हूँ
पर चाहता भी हूँ
क्यों यह रिश्ता
नहीं जाता बरिस्ता

चलो कुछ लम्हों के लिए
बन जाओ मेरे लिए
मैं रहूँ तुम्हारी बाहों में
और तुम मेरी सांसों में

काश …काश …
-रोहन भरद्वाज

खुद पर कविता

प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले

प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
महोब्बत नूर है रूह का ये तू मानले
चल दिखा तेरी ताकत, ला आसमान जमीन पर
है जिगर में जज्बा, भेज कयामत को भी ऊपर
तो सारी कायनात है तेरी ये तू ठान ले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
चिर-कौओ को खिला दे ऐसी लाश नही है तू
जिंदा होकर मर जाए ये एहसास नही है तू
चल उठ खड़ा हो, अंत नहीं है तू
इश्क़ की दुनिया का कोई संत नहीं है तू
तुझे लड़ना ही होगा ये तू ठान ले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
कमजोर नहीं, बलवान है तू
चंद पलों का मेहमान है तू
खुद की जिंदगी का अरमान है तू
हर कयामत का सौदागर है तू
तू बस अपने आप को पहचनाले
प्यार ताकत है खुदा की ये तू जानले
– अजिंक्य गंगावणे

सच- सच बताओ यार कि कौन हो तुम

सोचते – सोचते थक गया हूँ मैं, फिर भी सोचता रहा,
लेकिन फिर भी नहीं समझ पाया,
कि कौन हो तुम,
क्या भूखे के पेट की रोटी की तलाश हो तुम,
या प्यासे को पानी की तलाश हो तुम,
या फिर जिंदगी की बीती हुई यादों का अहसास हो तुम,
या बरसो बाद माँ से मिलने पर प्यार की बरसात हो तुम,
क्या शायर की शायरी का शब्द हो तुम,
या कवियों की पंक्तियों में भाव देने वाला शब्द हो तुम,
या फिर फूल की पत्तियों की सुगंध हो तुम,
या बादलों से बरसते पानी की ठंडी फुहार हो तुम,
क्या अंधेरो में जो उजाला कर दे ,
क्या वो प्रकाश हो तुम,
या राहों में जो जलता है,
क्या वो महताब हो तुम,
या फिर जो सपनों मे आए ,
क्या वो ख्वाब हो तुम,
या किसी के पूछे सवाल का जबाब हो तुम,
जिसकी ध्वनि से मन प्रसन्न हो जाए,
क्या वो शंख हो तुम,
या जो पानी और दूध को अलग करदे,
क्या वो हंस हो तुम,
या पपीहा जिस बूंद के लिए बरसो प्यासा रहता है,
क्या वो स्वाती हो तुम,
छिपे है तुम्हारे चेहरे में कई राज,
क्या वो नकाब हो तुम,
जो हर टूटे दिल वाले के जुबां पर है,
क्या वो अल्फ़ाज़ हो तुम,
जिसको कभी खोला ना जा सके,
क्या वो राज़ हो तुम,
कितनी बार पूछ चुका हूँ तुमसे,
फिर भी क्यों मौन हो तुम,
अब तो सच-सच बता दो यार
कि कौन हो तुम,
-अजय राजपूत (झांसी)

Poem on Love in Marathi

बाळ जेव्हा तू मला धरून ठेव

बाळा, जेव्हा तू मला धरतोस तेव्हा माझ्या भावना स्पष्ट होतात
आम्ही इथे घालतो तेव्हा आपण मला किती म्हणायचे आहे.
मी तुझ्या हृदयाचा ठोका माझ्या स्वतःसह तालमीवर ऐकतो,
प्रत्येक पौंडसह तो तापमानवाढ आवाज आपण दर्शविलेल्या प्रेमामुळे मला सुरक्षित ठेवते.

बाळा, जेव्हा तू मला हातांनी स्पर्श करतेस तेव्हा खूप मऊ पण मजबूत,
मी जिथे आहे तिथे तू मला उबदार मिठीत लपेटले आहेस.
रात्रभर तू मला जवळ धर आणि मला सांत्वन दिलेस
जोपर्यंत आपण दिवसाच्या पहिल्या चिन्हेकडे डोळे उघडत नाही.

बाळा, तू आपला दिवस सुरु करण्यापूर्वी तू मला चुंबन घेताना,
तू ज्या आनंदाने माझ्या हृदयात आणलेस ते शब्द कधीही बोलू शकत नाहीत.
तुम्ही माझे आयुष्य खूप सुंदर, आश्चर्यकारक आणि नवीन बनविले आहे.
आपण माझ्या आशा आणि स्वप्ने आहात. आपण माझे सर्वकाही आहात; मी तुमच्या प्रेमात आहे

प्रेमाचा अर्थ

प्रेम करणे म्हणजे एकत्र जीवन सामायिक करणे,
फक्त दोन लोकांसाठी विशेष योजना तयार करणे,
शेजारी काम करणे,
आणि मग अभिमानाने हसू,
एक एक करून, स्वप्ने सर्व साकार होतात.

प्रेम करणे म्हणजे मदत करणे आणि प्रोत्साहन देणे होय
हसरे आणि प्रामाणिक स्तुती शब्दांसह,
सामायिक करण्यासाठी वेळ घेणे,
ऐकणे आणि काळजी घेणे
प्रेमळ, प्रेमळ मार्गांनी.

प्रेम करणे म्हणजे एखाद्याचे खास असणे,
एक ज्यावर आपण नेहमीच अवलंबून राहू शकता
तेथे वर्षानुवर्षे असणे,
हसणे आणि अश्रू सामायिक करणे,
एक भागीदार म्हणून, एक प्रियकर, एक मित्र म्हणून.

प्रेम करणे म्हणजे विशेष आठवणी बनविणे
आपल्याला आठवण्यास आवडलेल्या क्षणाचे,
सर्व चांगल्या गोष्टी
सामायिकरण जीवन आणते.
प्रेम सर्वांत महान आहे.

मी संपूर्ण अर्थ शिकलो आहे
सामायिकरण आणि काळजी घेणे
आणि माझी सर्व स्वप्ने सत्यात उतरविली आहेत.
मी संपूर्ण अर्थ शिकलो आहे
प्रेमात असणे
तुमच्याबरोबर राहून आणि प्रेम करून.

मराठी में कविता

शांतता ही गोल्डन आहे

ते तुमचे संभाषण नाही
हे माझे मनोरंजन करते
पण त्याऐवजी तू माझ्याकडे पाहतोस तसे
यामुळे मी टिकून राहतो
हे आपल्या ओठांचा वक्र आहे
आणि आपल्या केसांचा कर्ल
सर्व छोट्या छोट्या गोष्टी आहेत
यामुळे मला थांबा आणि टक लावून पहा

ती तुमची बुद्धिमत्ता नाही
त्याने मला जवळ केले
ती तुमची विनोदबुद्धी नाही
मला सर्व विचारून टाकले आहे
हा तुमच्या हाताचा स्पर्श आहे
आणि आपल्या डोक्यातले विचार
सर्व छोट्या छोट्या गोष्टी आहेत
ज्या गोष्टी बोलल्या जात नाहीत त्या

तो आपला ज्वलंत इतिहास नाही
यामुळे मी प्रेमात पडलो
हे तुमचे आकलन नाही
जगाचे किंवा वरीलचे
हा तुमचा मऊ स्वभाव आहे
आणि ज्या प्रकारे तू माझ्यावर हसतोस
सर्व छोट्या छोट्या गोष्टी आहेत
ते मला पहायला तयार करतात

आम्ही बोलत असताना असे नाही
की मला आणखी काही जाणून घ्यायचे आहे
तू मला शिकवतेस तसे नाही
मी जे शोधत आहे ते शिकते
ही वेळ आपण एकटी घालवतो
आणि पूर्ण नि: शब्द वेळ
सर्व छोट्या छोट्या गोष्टी आहेत
त्या मजबूत युतीची स्थापना करतात

आपण इतके कष्ट करून काम करणे हे काम नाही
ही तुमची खरी वचनबद्धता दर्शवते
ही तुमची वेडी सवय नाही
त्या मला पूर्ण पूर्ण करतात
आपण आपले हात वापरण्याचा हा मार्ग आहे
आणि मी निवडलेला मार्ग
सर्व छोट्या छोट्या गोष्टी आहेत
मला का माहित आहे की मौन म्हणजे सोनेरी

Love Poem in Hindi for Girlfriend/Boyfriend

रात होते ही

रात होते ही फलक पे सितारे जगमगाते हैं
वो चुपके से दबे पांव मुझसे मिलने आते हैं
याद रहे बस नाम उनका भूल के जमाने को
वो चुनरी को इस तरह मेरे चेहरे पे गिराते हैं
सौ गम और हज़ार ज़ख़्म हो चाहे
दुनिया के हर दर्द भूल जाये
कुछ इस तरह गुदगुदाते हैं
डूब जाये ये कायनात तो हम नाचीज़ क्या हैं
इतनी मोहब्बत वो दामन में भर के लाते हैं
तिश्नगी कम ना होने पाये चाहत की
मुझमे प्यास बढाकर मेरी फिर वो मय बन जाते हैं
सख़्त हिदायत है हमे खुद पे काबू रखने की
रोक के हमको मगर वो खुद ही बहक जाते हैं
बयां करने को दास्तान-ए-इश्क़ लब्ज़ ना मिलें वो
यूँ हक़ मुझपे जताते हैं कि ‘मौन’ कर जाते हैं
-अमित मिश्रा

जाने भी दो यारों (कविता का शीर्षक)
जाने भी दो यारों
जाने भी दो यारों
कब तक निगाहों में उनके बनते फिरोगे तुम गाफ़िल
कल भी तेरे गुनाहों की चर्चा थी महफ़िल महफ़िल
इस शोख मुहब्बत से तौबा क्यों न कर लो यारों
जाने भी दो यारों
अटकी पड़ी हैं सांसें बंद घड़ी की सूइयों सी
मिलन की आशाएं दुबकी पड़ी छुइमुइ सी
नयनों में चाहत की इतनी सदा क्यों हो यारों
जाने भी दो यारों
तेरे ही नाम लिखे हैं आसमान के चांद सितारे
तेरी ही छटाओं से रौशन हैं गली चौबारे
अपना तो क्या लगा है सारे रंग हैं तुम्हारे
यारों जाने भी दो यारों
–सौरभ कुमार सिंह (कवि)

लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है
सूरत ना देखी मैंने उसकी,
मूरत फिर भी उसकी बनने लगी है,
दिन को चैन नहीं आता,
और रातों की नींद उड़ने लगी है,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है,
उसकी यादों में, आँखों से नीर बहते है,
अब तो आँखों को आँसू से मोहब्बत होने लगी है,
कलम लिखना चाहती है, केवल तुम्हारे बारे में,
और बातें मेरी कविताओं में ढलने लगी है,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है,
उसकी यादों में, रातें गुजार देता हूँ,
अपनी ही बातों में, खुद को सँवार देता हूँ,
सुनसान रातों में, मेरी बातें गहराई में उतरने लगी हैं,
अब तो मेरे दिल की तन्हाई मोहब्बत में बदलने लगी है,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है,
सुबह सूरज की रोशनी भी अधूरी सी लगती है,
बाज़ार की भरी सड़के भी सुनी सी लगती है,
उसके आने की ये आँखें राह देखने लगी हैं,
अब तो माह भी सालों की राह देखने लगी है,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है,
उसके चेहरे की चमक सादी लगती है,
चाँद पूरा निकलता है पर रोशनी आधी लगती है,
बारिश की बूँदें भी अब मुझे भिगोने लगी हैं,
अब तो दिल की धड़कन भी यादों को पिरोने लगी है,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है,
अभी भी घर की चौखट पर, उसकी राह तके बैठा हूँ,
सुबह से शाम और शाम से सुबह, उसकी राह में गुज़ार देता हूँ,
कब आओगी ये मेरी तन्हाई कहने लगी है,
तन्हाई की बातें दिल को झूठी लगने लगी हैं,
लगता है उससे मोहब्बत होने लगी है
-अजय राजपूत (झाँसी)

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