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भारतीय नौसेना दिवस पर निबंध 2018 – Indian Navy Day Essay in Hindi for Kids & Students Pdf Download

Indian Navy Day 2018: नौसेना के मार्शल के प्रति कृतज्ञता बढ़ाने के लिए हर साल 4 दिसंबर को भारत में नौसेना दिवस मनाया जाता है। विभिन्न नौसेना पदों पर काम करने वाले सभी सैनिक हमारे देश के कल्याण के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, इसलिए प्रत्येक 4 दिसंबर को हम अपने नौसेना के जवानो के प्रति की अंतिम बहादुरी मनाते हैं। नौसेना किसी भी देश के लिए रक्षा के महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है जिसमें तटीय सीमा है। भारत जैसे देश के लिए, नेवी ने भारत की तटीय सीमाओं की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारतीय नौसेना दिवस निबंध

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भारतीय जल सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही भारतीय नौसेना की शुरुआत वैसे तो 5 सितंबर 1612 को हुई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी के युद्धपोतों का पहला बेड़ा सूरत बंदरगाह पर पहुंचा था और 1934 में ‘रॉयल इंडियन नेवी’ की स्थापना हुई थी, लेकिन हर साल चार दिसंबर को ‘भारतीय नौसेना दिवस’ मनाए जाने की वजह इसके गौरवमयी इतिहास से जुड़ी हुई है। भारतीय नौसेना दिवस का इतिहास 1971 के ऐतिहासिक भारत-पाकिस्तान युद्ध से जुड़ा है, जिसमें भारत ने पाकिस्तान पर न केवल विजय हासिल की थी, बल्कि पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराकर स्वायत्त राष्ट्र ‘बांग्लादेश’ का दर्जा दिलाया था। भारतीय नौसेना अपने इस गौरवमयी इतिहास की याद में प्रत्येक साल चार दिसंबर को नौसेना दिवस मनाती है।

आधुनिक भारतीय नौसेना की नींव 17वीं शताब्दी में रखी गई थी, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना के बेड़े रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की। यह बेड़ा ‘द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनीज मरीन’ कहलाता था। बाद में यह ‘द बॉम्बे मरीन’ कहलाया। पहले विश्व युद्ध के दौरान नौसेना का नाम ‘रॉयल इंडियन मरीन’ रखा गया। 26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और इसी दिन भारतीय नौसेना ने अपने नाम से ‘रॉयल’ को त्याग दिया। उस समय भारतीय नौसेना में 32 नौ-परिवहन पोत और लगभग 11,000 अधिकारी और नौसैनिक थे। 15 अगस्त 1947 में भारत को जब देश आजाद हुआ था, तब भारत के नौसैनिक बेड़े में पुराने युद्धपोत थे।

आईएनएस ‘विक्रांत’ भारतीय नौसेना पहला युद्धपोतक विमान था, जिसे 1961 में सेना में शामिल किया गया था। बाद में आईएनएस ‘विराट’ को 1986 में शामिल किया गया, जो भारत का दूसरा विमानवाही पोत बन गया। आज भारतीय नौसेना के पास एक बेड़े में पेट्रोल चालित पनडुब्बियां, विध्वंसक युद्धपोत, फ्रिगेट जहाज, कॉर्वेट जहाज, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय सुरंग मार्जक पोत (माइनस्वीपर) और अन्य कई प्रकार के पोत हैं। इसके अलावा भारतीय नौसेना की उड्डयन सेवा कोच्चि में आईएनएस ‘गरुड़’ के शामिल होने के साथ शुरू हुई। इसके बाद कोयम्बटूर में जेट विमानों की मरम्मत व रखरखाव के लिए आईएनएस ‘हंस’ को शामिल किया गया। भारतीय नौसेना ने जल सीमा में कई बड़ी कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिनमें प्रमुख है जब 1961 में नौसेना ने गोवा को पुर्तगालियों से स्वतंत्र करने में थल सेना की मदद की। इसके अलावा 1971 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा तो नौसेना ने अपनी उपयोगिता साबित की।

भारतीय नौसेना ने देश की सीमा रक्षा के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा शांति कायम करने की विभिन्न कार्यवाहियों में भारतीय थल सेना सहित भाग लिया। सोमालिया में संयुक्त राष्ट्र संघ की कार्रवाई इसी का एक हिस्सा थी। देश के अपने स्वयं के पोत निर्माण की दिशा में आरंभिक कदम उठाते हुए भारतीय रक्षा मंत्रालय ने बंबई (मुंबई) के मजगांव बंदरगाह को 1960 में और कलकत्ता (कोलकाता) के गार्डन रीच वर्कशॉप (जीआरएसई) को अपने अधिकार में लिया। वर्तमान में भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और यह मुख्य नौसेना अधिकारी ‘एडमिरल’ के नियंत्रण में होता है। भारतीय नौ सेना तीन क्षेत्रों की कमान (पश्चिम में मुंबई, पूर्व में विशाखापत्तनम और दक्षिण में कोच्चि) के तहत तैनात की गई है, जिसमें से प्रत्येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।

Bhartiya Nausena Divas Par Nibandh

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सन् 1971 में 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ एक युद्ध शुरू किया था। इस अभियान में पाकिस्तान के नौ सेना के मुख्यालय पर ही सबसे पहले आक्रमण किया गया था जो कराची में स्थित था।

हिंदुस्तान की इस लड़ाई में तीन विद्युत क्लास मिसाइल बोट, दो एंटी सबमरीन और एक टैंकर शामिल किया गया था। भारत के सैनिकों ने कराची में रात को आक्रमण करने की योजना बनाई थी जिससे पाकिस्तान को हराया जा सके क्योंकि पाकिस्तान के पास ऐसा कोई मिसाइल और अभिमान नहीं था जिससे रात में लड़ाई किया जा सके इसीलिए इस युद्ध में भारत का कोई भी सैनिक शहीद नहीं हुआ था परंतु पाकिस्तान के 500 सैनिक मारे गए थे और 700 से भी अधिक सैनिक घायल हुए थे।

इस युद्ध में भारत का कोई नुकसान नहीं हुआ था इसलिए यह अभियान द्वितीय विश्व युद्ध के बाद नौसैनिक इतिहास में सबसे सफल युद्ध माना जाता है जिसमें भारत देश को ही जीत हुई थी। इसी जीत की कामयाबी पर हर साल 4 दिसंबर को नौसेना दिवस मनाया जाता है।

भारतीय नौसेना का गठन Formation of Indian Navy
भारतीय नौसेना की शुरुआत 17 वीं शताब्दी में हुई थी। जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना दल का गठन किया और ईस्ट इंडिया कंपनी के नाम से स्थापना की। यह दल “द ऑनर एबल ईस्ट इंडिया कंपनी मरीन” कहा जाता था बाद में इसी को बदलकर “द बांबे मरीन” कहा गया।

भारत के पहले विश्व युद्ध के समय नौसेना का नाम रॉयल इंडियन मरीन रख दिया गया था। 26 जनवरी सन् 1950 में जब भारत पूरी तरह से गणतंत्र देश बना तभी भारतीय नौसेना ने अपना नाम रॉयल इंडियन मरीन से रॉयल हटा दिया। भारतीय नौसेना में 32 नौ परिवहन जल जहाज और लगभग 11000 अधिकारी और नौसैनिक थे।

1971 में भारत पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारतीय नौसेना ने ऑपरेशन ट्राइडेंट चलाकर पाकिस्तान के कराची हर्बर को मिटा दिया था जो पाकिस्तान नौसेना का मुख्यालय था। ऐसे में भारतीय नौसेना के खतरनाक हमले से पाकिस्तान की नौसेना कमजोर पड़ गई थी और हार गई थी। भारतीय नौसेना ने जल सीमा में कई बड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सन् 1961 में भारतीय नौसेना ने गोवा से पुर्तगालियों को भगाने में थल सेना की सहायता की थी।

भारतीय नौसेना का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थापित किया गया है जिसका नियंत्रण मुख्य नौसेना ऑफिसर एडमिरल के हाथों में होता है। नौसेना भारतीय सेना का एक सामुद्रिक भाग है जिसका नियंत्रण गृह मंत्रालय के पास होता है।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय नौसेना का विस्तार हुआ था अधिकारी और सैनिकों की संख्या लगभग 30000 हो गई थी। भारतीय नौसेना तीन क्षेत्रों में तैनात रहती है- पूर्व में विशाखापत्तनम, पश्चिमी मुंबई, और दक्षिण में कोच्चि। जिसका नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।

देश को ताकतवर बनाने में भारतीय नौसेना बहुत योगदान रहा है। 4 दिसंबर को नौसेना दिवस के रूप में मनाते हैं क्योंकि इस दिन भारतीय नौसेना पाकिस्तान के नौ सेना पर भारी पड़ गया था।

इस समय भारतीय नौसेना दुनिया के पांचवीं सबसे बड़ी सेना के रूप में मानी जाती है वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास 78000 से अधिक सैनिक हैं।भारतीय नौसेना दिवस समारोह का आयोजन पूर्वी भारतीय नौसेना कमांड द्वारा विशाखापत्तनम में किया जाता है भारतीय नौसेना दिवस के दिन शहीद हुए नौसैनिकों के याद में पुष्प चक्र अर्पित करते हैं उसके बाद पनडुब्बी जहाज एवं पोत का प्रदर्शन भी किया जाता है जिसको देखने के लिए भारी संख्या में स्थानीय लोग शामिल होते हैं।

Indian Navy Day Essay in Hindi

भारतीय नौसेना (अंग्रेज़ी: Indian Navy) भारतीय सेना का सामुद्रिक अंग है जो अपने गौरवशाली इतिहास के साथ भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति की रक्षक है। 55,000 नौसैनिकों से सुसज्जित यह विश्व की पाँचवी सबसे बड़ी नौसेना भारतीय सीमा की सुरक्षा को प्रमुखता से निभाते हुए विश्व के अन्य प्रमुख मित्र राष्ट्रों के साथ सैन्य अभ्यास में भी सम्मिलित होती है। आधुनिक भारतीय नौ सेना की नींव 17वीं शताब्‍दी में रखी गई थी, जब ईस्‍ट इंडिया कंपनी ने एक समुद्री सेना के रूप में ईस्ट इण्डिया कम्पनी की स्‍थापना की और इस प्रकार 1934 में रॉयल इंडियन नेवी की स्‍थापना हुई। भारतीय नौ सेना का मुख्‍यालय नई दिल्ली में स्थित है और यह मुख्‍य नौ सेना अधिकारी- एडमिरल के नियंत्रण में होता है। भारतीय नौ सेना 3 क्षेत्रों की कमांडों के तहत तैनात की गई है, जिसमें से प्रत्‍येक का नियंत्रण एक फ्लैग अधिकारी द्वारा किया जाता है।

पश्चिमी नौ सेना कमांड का मुख्‍यालय अरब सागर में मुम्बई में स्थित है।
दक्षिणी नौ सेना कमांड केरल के कोच्चि (कोचीन) में है तथा यह भी अरब सागर में स्थित है।
पूर्वी नौ सेना कमांड बंगाल की खाड़ी में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में है। [1] इतिहास
भारतीय नौसेना की अधिकृत शुरुआत 5 सितंबर 1612 को हुई थी। इस दिन ईस्ट इंडिया कंपनी के लड़ाकू जहाजों (युद्धपोतों) का पहला बेड़ा सूरत के बंदरगाह पर पहुँचा था। यह बेड़ा ‘द ऑनरेबल ईस्ट इंडिया कंपनीज़ मॅरीन’ कहलाता था। बाद में यह ‘द बॉम्बे मॅरीन’ कहलाया गया। पहले विश्व युद्ध के दौरान इस नौसेना का नया नाम ‘रॉयल इंडियन मॅरीन’ रखा गया। द्वितीय विश्व युद्ध आते-आते रॉयल इंडियन नेवी में लगभग आठ युद्धपोत थे। युद्ध के ख़त्म होने तक पोतों की संख्या बढ़कर 100 हो गई थी।

26 जनवरी 1950 को भारत गणतंत्र बना और इस दिन भारतीय नौसेना ने अपने नाम के सामने से रॉयल नाम को त्याग दिया। उस समय भारतीय नौसेना में 32 नौ-परिवहन पोत और लगभग 11,000 अधिकारी और नौसैनिक थे। भारतीय नौसेना के पहले कमांडर-इन-चीफ़, रियल एडमिरल आई.टी.एस. हॉल थे। पहले भारतीय नौसेनाध्यक्ष (सी.एन.एस.) वाइस एडमिरल आर.डी. कटारी थे, जिन्होंने 22 अप्रॅल 1958 को कार्यभार संभाला।

संगठन
नौसेनाध्यक्ष को उप-नौसेनाध्यक्ष (वाईस एडमिरल या रियर एडमिरल) के दर्ज़े के पाँच मुख्य स्टाफ़ अधिकारियों का सहयोग मिलता है। कुल तीन नौसैनिक कमान हैं।

पश्चिमी (कार्यकारी मुख्यालय मुंबई में),
पूर्वी (कार्यकारी मुख्यालय विशाखापट्टनम में)
दक्षिणी (कार्यकारी मुख्यालय कोच्चि में)
प्रत्येक कमान का प्रमुख एक फ़्लैग ऑफ़िसर उप-नौसेनाध्यक्ष (वाइस एडमिरल) के पद वाला मुख्य अधिकारी होता है। भारतीय नौसेना प्राद्वीपीय भारत के 6,400 किलोमीटर लंबे समुद्रतट की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार है। एक स्वतंत्र अर्द्ध सैनिक सेवा, भारतीय तटरक्षक (इंडियन कोस्ट गार्ड) भारतीय नौसेना भारत के समुद्रवर्ती और अन्य राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण योगदान उपलब्ध कराती है।

नौसैनिक बेड़ा
15 अगस्त 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिलने पर भारत के नौसैनिक बेड़े में पुराने युद्धपोत थे, जो केवल तटीय गश्त के लायक़ थे। आई.एन.एस. ‘विक्रांत’ भारत का पहला विमानवाही पोत था। इसे 1961 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया और जनवरी 1997 में सेवामुक्त कर दिया गया। दो अन्य विध्वंस जहाज़ आई.एन.एस. ‘डेल्ही’ और आई.एन.एस. ‘मैसूर’ भारतीय नौसेना के गौरव हैं। आई.एन.एस. ‘विराट’, जिसे भारतीय नौसेना में 1986 में शामिल किया गया। भारत का दूसरा विमानवाही पोत बन गया। हालांकि अप्रॅल 1999 से यह पोत द्विवर्षीय नवीकरण कार्यक्रम के अंतर्गत हैं। आज भारतीय नौसेना के पास एक बेड़े में पेट्रोल चालित पनडुब्बियाँ, विध्वंसक पोत फ़्रिगेट जहाज़ कॉर्वेट जहाज़, प्रशिक्षण पोत, महासागरीय एवं तटीय सुरंग मार्जक पोत (माईनस्वीपर) और अन्य कई प्रकार के पोत हैं।

उड्डयन
भारतीय नौसेना की उड्डयन सेवाओं का इतिहास कोच्चि में आई.एन.एस. ‘गरुड़’ के शामिल होने के साथ एक छोटे स्तर पर शुरू हुआ। इसके बाद कोयंबतुर में जेट विमानों की मरम्मत व रख-रखाव के लिए आई.एन.एस ‘हंस’ को शामिल किया गया। फ़रवरी 1961 में पहले विमानवाही पोत आई.एन.एस ‘विक्रांत’ को नौसेना के एक महत्त्वपूर्ण अंग के रूप में शामिल किया गया।

Navy Day Essay in English

Navy is one of the important parts of the defense for any country which have the coastal frontier. For the country like India, the navy has played a vital role in protecting the coastal boundaries of India. Talking from the defense point of view, the government of India has given great emphasis for the navy. India has been vulnerable to many external threats through coastal areas. The threats mainly consist of external attacks, infiltration and smuggling.

However, the Indian Navy has shown a great temperament in protecting the coastal areas.

The history of Indian Navy

Indian Navy is a well-structured and disciplined branch, whose chief is called Admiral and President of India is the supreme commander of the Indian Navy. Indian navy has a very nice motto, which say’s “Sham No Varna”, which literally means “May the Lord of the Water be auspicious unto us”.
The naval staff has a very nice blue and white color, showing the audacity and decent face of the Indian Navy. Even before the independence, there were many empires Chola, Yadav, etc. which tried to build the strong naval force.
However, it was the Maratha Empire, founded by Chhatrapati Shivaji Maharaj, made a very strong naval force with the help of KanhojiAngre, to fight the foreign aggression.
So, Shivaji Maharaj is known as the “Father of the Indian Navy”. After independence, India developed magnificent and disciplined Navy.
The naval command of India is divided into four main commands, which are western, eastern, southern and northern.
Indian navy and its major Operation

After independence, the first major operation of Indian Navy was seen in the 1961 during the Goa Liberation. During the liberation movement, the Portuguese had fired the Sabarmati, which is a passenger liner. The Indian navy quickly came into action providing the fire support and landing of the Indian troops there. During 1962 Sino-Indian War, the Indian navy had not played any direct action, as the battles were fought mainly on the land. However, the Indian Navy played a defensive role and was full prepared to counter any attack.

The Indian Navy Day

The Navy Day in India is celebrated on December 4th of every year in order to extend our gratitude towards the Navy martial’s. All the soldiers who work on different navy posts are very important to the well being of our country therefore, on every 4th of December we celebrate the ultimate bravery of our navy officials.

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