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हरियाणा शहीद दिवस पर भाषण – Haryana Shahid Diwas Speech in Hindi

Haryana Shahid Diwas par speech hindi

हरयाणा शहीद दिवस हर साल 23 सितम्बर को मनाया जाता है| इस दिवस को हरयाणा के उन शहीदों के मान किया जाता है जिन्होंने इस देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण की बलिदान दे दिया| इस दिन हरयाणा के राज्य में बहुत सी रैली निकाली जाती है| स्कूलों में भाषण प्रतियोगिता की जाती है|

Haryana Shahid Diwas par speech

शहीद दिवस भारत में उन लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये मनाया जाता है जो भारत की आज़ादी, कल्याण और प्रगति के लिये लड़े और अपने प्राणों का बलिदान दे दिया। इसे हर वर्ष 30 जनवरी को पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है। भारत विश्व के उन 15 देशों में शामिल हैं जहाँ हर वर्ष अपने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने के लिये शहीद दिवस मनाया जाता है।

शहीद दिवस के दिन देश के पिता मोहनदास करमचंद गांधी की मृत्यु की सालगिरह के रूप में मनाया जाता है, उनकी हत्या 30 जनवरी को 1948 को नाथुराम गोडसे ने की थी। गोडसे ने गांधी को भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराया इस प्रकार उन्होंने गांधीजी को गोली मार दी।

इस बुराई के लिए गोडसे को 15 नवंबर, 1949 को फांसी दी गई थी। शहीदों ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए सैनिकों की शहीदता को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर याद किया गया और इससे 30 जनवरी को शहीद दिवस का नाम दिया गया।

इस दिन न केवल प्रधानमंत्री बल्कि सशस्त्र बलों के प्रमुख अधिकारी भारत के गेट पर शहीदों को सलाम करते हैं। इस दिन आम आदमी भी कुछ समय के लिए अपनी सामान्य गतिविधियों को छोड़कर 2 मिनट के लिये मौन होकर उनके प्रति कृतज्ञता दिखाते हैं। सुबह 11 बजे हर सरकारी प्रतिष्ठान में सायरन की आवाज़ होती हैं।

उस समय हर कोई, औद्योगिक इकाइयों या सरकारी कार्यालयों में जहाँ भी हो, यहां तक ​​कि आम आदमी भी अपने काम को रोक देते हैं और शहीद आत्माओं की याद में दो मिनट तक मौन करते हैं। फिर दो मिनट के बाद साइरन फिर से बजता है, यानि लगभग 11.02 बजे लोगों को अपना काम शुरू करने की इजाजत होती है।

यह दिन विजयी उत्सव होता है, सैन्य शक्ति नवीनतम हथियार उपलब्धि और विज्ञापन का प्रदर्शन करते है। महात्मा गांधी के अनुयायी उनकी पूजा करते हैं और उद्धरण देते हैं- वह इस धरती पर अब तक के सबसे बड़े इंसान है। बापू गुणों और महानता का प्रतीक थे।
वह एक संत का जीवन जीते थे। राष्ट्र के पिता की उनकी स्थिति को चुनौती नहीं दी जा सकती क्योंकि उनके नेतृत्व में राजनीतिक दल ने आजादी के बाद पूर्ण एकाधिकार का आनंद लिया। वह सत्य अहिंसा विचारधाराओं में विश्वास करते थे। गांधी और उनके अनुयायियों ने अंग्रेजों को हटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

30 जनवरी को हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों को याद रखने के लिए यह एक शहीद दिवस मनाया जाता है। जहां 25 जनवरी को, मार्टर्स दिवस के रूप में भी जाना जाता है, जिन्होंने 1937-38 और 1965 के दौरान हिंदी विरोधी आंदोलनों में अपनी जान गंवाई थी।

शिवराम राजगुरु, भगत सिंह और सुखदेव थापर को श्रद्धांजलि देने के लिये और इनके बलिदानों को याद करने के लिये भारत में 23 मार्च को भी हम शहीद दिवस मनाते है। पंजाब हर साल शहीद दिवस अपने नायकों- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद मनाता है। पंजाब के गांव के संबंध में, उनकी शहीदता ने भारत की स्वतंत्रता आंदोलनों के दौरान नया क्षितिज स्थापित किया था। तीनों ने हिंसक ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी हासिल करने के लिए अपने जीवन का त्याग कर किया।

वे आधुनिक दृष्टिकोण और महात्मा गांधी की नीतियों के गैर-विश्वासियों के साथ युवा और शिक्षित थे। आजादी हासिल करने के तरीकों में संघर्ष को छोड़ने और चरमपंथ का परिचय देने का उनका विरोध उनकी मौत का कारण था। ब्रिटिश आदेशों के अनुसार, 23 मार्च को तीन सेनानियों को मौत के लिए फांसी दी गई थी। वह एक क्रांतिकारी समाजवादी थे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बहुत प्रभावशाली थे। उनके पिता और दो चाचा गदर पार्टी के सदस्य थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए कड़ी मेहनत की थी।

Haryana Day Speech in Hindi

1928 में जब साइमन कमीशन भारत आया। उस समय लाला लाजपत राय कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्होंने साइमन कमीशन का भारी विरोध किया। लाला जी लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध में एक रैली को संबोधित कर रहे थे। तब ब्रिटिश सरकार ने उस रैली पर लाठी चार्ज करा दिया।

लाठी चार्ज के दौरान लाला लाजपत राय को गंभीर चोटें आयीं और इस घटना के करीब 3 हफ्ते बाद लाला जी का देहांत हो गया। लाला लाजपत राय जी ने अंग्रेजों से कहा था कि – “मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक लाठी ब्रिटिश सरकार के ताबूत में एक-एक कील का काम करेगी।” उनकी ये बात भी सही साबित हुई, लाला जी के स्वर्ग सिधारने के बाद पूरे देश में आक्रोश फूट पड़ा और एक नयी क्रांति का जन्म हुआ और चंद्रशेखर आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव व अन्य क्रांतिकारियों ने आक्रोशित होकर लाला जी की मौत का बदला लेने का निर्णय लिया।

लाला जी की मृत्यु के करीब एक महीने बाद ही 17 दिसम्बर 1928 को सरदार भगत सिंह ने ब्रिटिश पुलिस अफसर सांडर्स को गोली से मार दिया गया। उसी समय से ब्रिटिश सरकार, सरदार भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद के आक्रोश को भांप गयी थी और जल्द ही उनको पकड़ना चाहती थी।

8 अप्रैल 1929 को चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में भगत सिंह ने “सेंट्रल असेम्बली” में बम फेंका। दुर्भाग्यवश भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त को पकड़ लिया गया और उनको आजीवन कारावास की सजा सुनाई गयी।

जेल में रहते हुए ही भगत सिंह पर “लाहौर षड्यंत्र” का केस भी चला। इसी बीच चंद्रशेकर आजाद के सबसे विश्वासपात्र क्रांतिकारी “राजगुरु” को भी गिरफ्तार कर लिया गया। अदालत में मुकदमा चला और भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गयी।

एक दिन पहले दी गयी फांसी
इन तीनों क्रांतिकारियों को 24 मार्च 1931 को फांसी होनी थी। लेकिन ब्रिटिश सरकार को डर था कि देश की जनता विरोध में ना उतर आये इसलिए उन्होंने एक दिन पहले ही 23 मार्च 1931 को सांय करीब 7 बजे भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी पर चढ़ा दिया। इन सभी के शव को इनके परिवार के लोगों को नहीं दिया गया और रात में ही इनका अंतिम संस्कार सतलज नदी के किनारे किया गया।

सरदार भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया। ये क्रांतिकारी चाहते तो फांसी से बच सकते थे लेकिन इनको उम्मीद थी कि इनके बलिदान से देश की जनता में क्रांति भड़केगी और भारत की जनता ब्रिटिश सरकार को जड़ उखाड़ फेंकेगी।

ठीक ऐसा ही हुआ, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी देने के बाद जनता का आक्रोश बहुत भड़क गया। पूरे देश में आजादी के लिए आंदोलन और तेज हो गये और एक बड़ी क्रांति का उदय हुआ।

Haryana Heroes’ Martyrdom Day

Haryana Shahid Diwas par speech

23rd of septemberis also declared as the martyrs day in India to remember the sacrifice and pay homage to the Bhagat Singh, Shivaram Rajguru and Sukhdev Thapar. Bhagat Singh, Shivaram Rajguru and Sukhdev Thapar were fought for India against the British rule for independence.

Bhagat Singh, a well-known freedom fighter in the history of India, was born on 28th of September in 1907 in the Lyallpur, Punjab in the Sikh family. His father was the member of an organization called Ghadar Party working for the independence of India. Bhagat Singh together with his companions Rajguru, Azad, Sukhdev and Jai Gopal fought for the assassination of Lala Lajpat Rai. The daring adventures of Bhagat Singh have become a great inspiration for the youngsters of today.

In the year 1929, on 8th of April he together with his companions threw bombs over the Central Legislative Assembly reading slogan “Inquilab Zindabad”. They charged with the murder and hanged at 7.30 pm in the Lahore jail on 23th of March in the year 1931. Their body was cremated at the banks of the Sutlej River. Now a day, a big Shaheedi Mela (Martyrdom fair) is held in the birthplace Ferozepur, at the National Martyrs Memorial in the Hussainiwala (Indo-Pak border).

At this day, the President of India including the Vice President, the Prime Minister, the Defense Minister, and the service Chiefs get together at the Rajghat to the Samadhi of the Mahatma Gandhi to put down flowers garland to the statue of Bapu. An honorable salute is then given by the armed forces personnel and inter-services contingent to pay respect to the martyrs.

Then, the gathered people keep silence for 2 mins in the memory of the Bapu, Father of the Nation, and other martyrs throughout the country. At the same place, religious prayers and bhajans are sung by the loved ones.

Children of the schools from the Kolkata are dressed like Bapu and gathered to play role in the function at this day. The various other functions related to the Bapu’s life are carried out by the schools students while celebrating the Martyrs Day.

However in India, more than one Martyrs Day (also called as the Sarvodaya day at the national level) has been declared to honor the other martyrs of the nation.

हरियाणा शहीद स्मृति दिवस पर भाषण

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उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल ने बताया कि सरकार की हिदायतोंनुसार इस वर्ष 23 सितंबर का दिन हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस को गरिमापूर्ण ढग से मनाया जाएगा। डॉ. गरिमा मित्तल ने बताया कि मुख्यमंत्री मनोहरलाल 23 सितंबर को जिला रेवाड़ी मुख्यालय (रेवाड़ी) में हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में राज्य स्तरीय समारोह के मुख्यातिथि होंगे। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर 23 सितंबर को हरियाणा वीर एवं शहीदी दिवस के अवसर पर जनसभाएं समारोह एवं गोष्ठियां आदि आयोजित करके शहीदों को श्रद्धाजलि अर्पित की जाएगी। इसके अलावा शहीदों के परिवारों तथा युद्ध में वीरता पुरस्कार पाने वालों को स्मृति चिह्न भेंट कर यथावत सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ साथ जिला स्तर पर आयोजित समारोह में स्वतंत्रता सेनानियों एवं कारगिल के योद्धाओं को भी सम्मान से आमंत्रित किए जाएगा।