भगवान हनुमान की कहानी – Hanuman Jivan Katha – हनुमान जीवनी

हनुमान जी की जीवन कथा

Hanuman Ji Ki Katha : हिन्दी पंचाग के अनुसार चैत्र माह की पूर्णिमा को महावीर हनुमान की जयंती मनाई जाती है । भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान, महादेव शिव के 11 वें अवतार के रूप में अवतरित हुए थे । हनुमान जयंती के इस पावन अवसर पर आज हम आपके लिए लाए है Hanuman Ki Janam Ki Katha (Story of Lord Hanuman)|

जिसमे हम आपको बताएंगे Hanuman Ji Ke Ladke Ka Kya Naam Hai , Hanuman Ji Ka Janam Kis Din Hua? इसके साथ पवन पुत्र हनुमान जी की Jeevan Gatha और उनकी जन्म की Katha Hindi PDF, jay hanuman में भी देख सकते है ।साथ ही आप 10 lines on hanuman ji in hindi में उनके बारे में आसानी से जान सकते हैं ।

Hanuman Ji Ki Janam Katha | हनुमान जी की जन्म कथा

हनुमान  जी वानर जाति में पैदा हुए थे । उनके पिता का नाम  वानरराज केसरी और माता अंजना था । एक बार की बात है वानर राज  जंगल में भ्रमण करने निकले । भ्रमण करते करते वे प्रभास तीर्थ के पास पहुँच गए । वहाँ बहुत से ऋषि – मुनि भगवान की पूजन -अर्चन में लगे हुए थे । तभी वहाँ अचानक से एक विशालकाय हाथी आ गया और मुनियों पर आक्रमण करने लगा ।

वरदान प्राप्ति

वहाँ ऋषि भारद्वाज भी अपनी तपस्या में लीन थे और वो हाथी उनकी तरफ ही दौड़ता चला जा रहा था । तभी वहाँ पँहुचकर वानर राज ने उस गज के दोनों दांतों को उखाड़ फेंका और उसे मार दिया इससे प्रसन्न होकर ऋषियों ने उनसे वरदान मांगने को कहा , तब वानरराज केसरी ने वर मांगा, ” हे प्रभु , मुझे एक ऐसा पुत्र प्रदान करे जिसमे पवन के समान पराक्रम और वेग हो, जो रुद्र के जैसा बलशाली हो और अपनी इच्छानुसार अपना रूप बदल सकता हो ।” इस पर ऋषियों ने उन्हे तथास्तु बोलकर अपना आशीर्वाद दिया ।

माता अंजनी का क्रोध

एक दिन माँ अंजनी पर्वत के शिखर पर खड़ी सूर्य देव के तेज और खूबसूरती में लीन थी । तभी वहाँ बहुत तेज हवा चलना शुरू हो गई । हवा का वेग इतना तीव्र था की उनके वस्त्र उढ़ने लगे । उन्होंने सोच जरूर ये किसी दानव या असुर की उद्दंडता हो सकती है । वे क्रोधित होते हुए बोली, ” कौन अभद्र है जो मेरे जैसी एक पतिपरायण स्त्री का अपमान करने की चेष्टा कर रहा है ?

तभी उनके सामने पवन देव प्रकट हुए और क्षमा मांगते हुए बोले, “देवी मुझे क्षमा करे , और शांत हो जाए । आपके पति को प्राप्त वरदान के अनुसार आपके मेरे समान एक शक्तिशाली पुत्र होगा । इसी वरदान को पूर्ण करने की विवशता में मैंने आपके शरीर को स्पर्श किया है । मेरे स्पर्श के माध्यम से रुद्रदेव का एक अंश भी आपके शरीर में प्रवेश कर चुका है । इसलिए महादेव के अवतार के रूप में आपका पुत्र इस धरती पर जन्म लेगा । जिसके बाद भगवान शिव ने महाबली हनुमान के रूप में वानर राज के यहाँ जन्म लिया ।

Hanuman Factsहनुमान जी की जीवन गाथा

हनुमान जी की puran कथा तो हमने पढ़ ली अब हम उनसे जुड़े कुछ विशेष और अनोखे तथ्यों को भी जानते है जैसे Hanuman Ke Panch Naam, Hanuman Ji Ke Panch Bhai, Katha Hanuman Gatha, जय हनुमान के नारे लगा कर आप अपनी भक्ति व्यक्त कर सकते हैं ।

इत्यादि ।

हनुमान जी के नाम : बजरंगबली , केसरी नंदन , महावीर आदि नामों से पुकारे जाने वाली अंजनी पुत्र के 108 नाम है । जिनके जाप से हर प्रकार के संकटों का नाश होता इसलिए इन्हे संकटमोचन भी कहा जाता है ।

1आंजनेया : अंजना का पुत्र
2महावीर : सबसे बहादुर
3हनूमत : जिसके गाल फुले हुए हैं
4मारुतात्मज : पवन देव के लिए रत्न जैसे प्रिय
5तत्वज्ञानप्रद : बुद्धि देने वाले
6सीतादेविमुद्राप्रदायक : सीता की अंगूठी भगवान राम को देने वाले
7अशोकवनकाच्छेत्रे : अशोक बाग का विनाश करने वाले
8सर्वमायाविभंजन : छल के विनाशक
9सर्वबन्धविमोक्त्रे : मोह को दूर करने वाले
10रक्षोविध्वंसकारक : राक्षसों का वध करने वाले
11परविद्या परिहार : दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले
12परशौर्य विनाशन : शत्रु के शौर्य को खंडित करने वाले
13परमन्त्र निराकर्त्रे : राम नाम का जाप करने वाले
14परयन्त्र प्रभेदक : दुश्मनों के उद्देश्य को नष्ट करने वाले
15सर्वग्रह विनाशी : ग्रहों के बुरे प्रभावों को खत्म करने वाले
16भीमसेन सहायकृथे : भीम के सहायक
17सर्वदुखः हरा : दुखों को दूर करने वाले
18सर्वलोकचारिणे : सभी जगह वास करने वाले
19मनोजवाय : जिसकी हवा जैसी गति है
20पारिजात द्रुमूलस्थ : प्राजक्ता पेड़ के नीचे वास करने वाले
21सर्वमन्त्र स्वरूपवते : सभी मंत्रों के स्वामी
22सर्वतन्त्र स्वरूपिणे : सभी मंत्रों और भजन का आकार जैसा
23सर्वयन्त्रात्मक : सभी यंत्रों में वास करने वाले
24कपीश्वर : वानरों के देवता
25महाकाय : विशाल रूप वाले
26सर्वरोगहरा : सभी रोगों को दूर करने वाले
27प्रभवे : सबसे प्रिय
28बल सिद्धिकर :
29सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक : ज्ञान और बुद्धि प्रदान करने वाले
30कपिसेनानायक : वानर सेना के प्रमुख
31भविष्यथ्चतुराननाय : भविष्य की घटनाओं के ज्ञाता
32कुमार ब्रह्मचारी : युवा ब्रह्मचारी
33रत्नकुण्डल दीप्तिमते : कान में मणियुक्त कुंडल धारण करने वाले
34चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला : जिसकी पूंछ उनके सर से भी ऊंची है
35गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ, : आकाशीय विद्या के ज्ञाता
36महाबल पराक्रम : महान शक्ति के स्वामी
37काराग्रह विमोक्त्रे : कैद से मुक्त करने वाले
38शृन्खला बन्धमोचक: तनाव को दूर करने वाले
39सागरोत्तारक : सागर को उछल कर पार करने वाले
40प्राज्ञाय : विद्वान
41रामदूत : भगवान राम के राजदूत
42प्रतापवते : वीरता के लिए प्रसिद्ध
43वानर : बंदर
44केसरीसुत : केसरी के पुत्र
45ताशोक निवारक : सीता के दुख का नाश करने वाले
46अन्जनागर्भसम्भूता : अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले
47बालार्कसद्रशानन : उगते सूरज की तरह तेजस
48विभीषण प्रियकर : विभीषण के हितैषी
49दशग्रीव कुलान्तक : रावण के राजवंश का नाश करने वाले
50लक्ष्मणप्राणदात्रे : लक्ष्मण के प्राण बचाने वाले
51वज्रकाय : धातु की तरह मजबूत शरीर
52महाद्युत : सबसे तेजस
53चिरंजीविने : अमर रहने वाले
54रामभक्त : भगवान राम के परम भक्त
55दैत्यकार्य विघातक : राक्षसों की सभी गतिविधियों को नष्ट करने वाले
56अक्षहन्त्रे : रावण के पुत्र अक्षय का अंत करने वाले
57कांचनाभ : सुनहरे रंग का शरीर
58पंचवक्त्र : पांच मुख वाले
59महातपसी : महान तपस्वी
60लन्किनी भंजन : लंकिनी का वध करने वाले
61श्रीमते : प्रतिष्ठित
62सिंहिकाप्राण भंजन : सिंहिका के प्राण लेने वाले
63गन्धमादन शैलस्थ : गंधमादन पर्वत पार निवास करने वाले
64लंकापुर विदायक : लंका को जलाने वाले
65सुग्रीव सचिव : सुग्रीव के मंत्री
66धीर : वीर
67शूर : साहसी
68दैत्यकुलान्तक : राक्षसों का वध करने वाले
69सुरार्चित : देवताओं द्वारा पूजनीय
70महातेजस : अधिकांश दीप्तिमान
71रामचूडामणिप्रदायक : राम को सीता का चूड़ा देने वाले
72कामरूपिणे : अनेक रूप धारण करने वाले
73पिंगलाक्ष : गुलाबी आँखों वाले
74वार्धिमैनाक पूजित : मैनाक पर्वत द्वारा पूजनीय
75कबलीकृत मार्ताण्डमण्डलाय : सूर्य को निगलने वाले
76विजितेन्द्रिय : इंद्रियों को शांत रखने वाले
77रामसुग्रीव सन्धात्रे : राम और सुग्रीव के बीच मध्यस्थ
78महारावण मर्धन : रावण का वध करने वाले
79स्फटिकाभा : एकदम शुद्ध
80वागधीश : प्रवक्ताओं के भगवान
81नवव्याकृतपण्डित : सभी विद्याओं में निपुण
82चतुर्बाहवे : चार भुजाओं वाले
83दीनबन्धुरा : दुखियों के रक्षक
84महात्मा : भगवान
85भक्तवत्सल : भक्तों की रक्षा करने वाले
86संजीवन नगाहर्त्रे : संजीवनी लाने वाले
87सुचये : पवित्र
88वाग्मिने : वक्ता
89दृढव्रता : कठोर तपस्या करने वाले
90कालनेमि प्रमथन : कालनेमि का प्राण हरने वाले
91हरिमर्कट मर्कटा : वानरों के ईश्वर
92दान्त : शांत
93शान्त : रचना करने वाले
94प्रसन्नात्मने : हंसमुख
95शतकन्टमदापहते : शतकंट के अहंकार को ध्वस्त करने वाले
96योगी : महात्मा
97मकथा लोलाय : भगवान राम की कहानी सुनने के लिए व्याकुल
98सीतान्वेषण पण्डित : सीता की खोज करने वाले
99वज्रद्रनुष्ट :
100वज्रनखा : वज्र की तरह मजबूत नाखून
101रुद्रवीर्य समुद्भवा : भगवान शिव का अवतार
102इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक : इंद्रजीत के ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को नष्ट करने वाले
103पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने : अर्जुन के रथ पार विराजमान रहने वाले
104शरपंजर भेदक : तीरों के घोंसले को नष्ट करने वाले
105दशबाहवे : दस्द भुजाओं वाले
106लोकपूज्य : ब्रह्मांड के सभी जीवों द्वारा पूजनीय
107जाम्बवत्प्रीतिवर्धन : जाम्बवत के प्रिय
108सीताराम पादसेवा : भगवान राम और सीता की सेवा में तल्लीन रहने वाले

हनुमान जी के पाँच भाई : “ब्रह्मांडपुराण”  के अनुसार हनुमान के पाँच भाई थे जिनमे हनुमान जी सबसे बड़े थे । उनके पाँच भाइयों के नाम इस है : मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान, धृतिमान।

हनुमान जी के पुत्र : जब हरिहरन श्री हनुमान जी माँ सीता की खोज में लंका गए थे तब वहाँ उन्हे पकड़कर रावण ने उनकी पूँछ में आग लगवा दी थी जिससे बजरंगबली को बहुत पीढ़ा हुई । जिससे बचने के लिए वह समुद्र के पास अपनी पुंछ में लगी आग को शांत करने गए । ऐसा करते समय उनके पसीने की एक बूंद समुद्र में गिर गई जिसे वहाँ की एक मछली ने पी लिया और वो गर्भवती हो गई । इस प्रकार उनका मकरध्वज नामक एक पुत्र हुआ ।

Hanuman Symbolism

  • भगवान हनुमान को मुख्य रूप से परम भक्त , पूर्ण समर्पण , निस्वार्थ भाव और अहंकाररहित का प्रतीक माना जाता है ।
  • उनका चरित्र हमे भगवान के निश्चल भक्त बनने की प्रेरणा देता है।
  • स्वयं को अच्छी शक्तियों के साथ जोड़ना , असहायों की सहायता करना , बिना किसी शर्त के अपने आपको समर्पित कर देना और आत्म नियंत्रण बनाए रखना ये सब उनके व्यक्तित्व के वो गुण है जिन्हे हमे ग्रहण करना चाहिए ।

Few Lines on Hanuman in English

  • Hanuman is an pure devotee of Lord Shri Ram, and the most important mythological character in the Hindu epic Ramayana.
  • Hanuman Ji proved to be a true friend, assistant, and devotee of Lord Rama.
  • When Ravana kidnapped mother Sita, he went to Lanka in search of her.
  • According to the Hindi Panchag, Bajrangbali was born on Chaitra Purnima on Tuesday in the sum of Chitra Nakshatra and Aries Lagna.
  • His father’s name was Vanararaj Kesari and mother’s name was Devi Anjana.

Hanuman Janam Katha Video Download

नीचे दिए गए विडिओ के द्वारा आप Hanuman Janam Video Mein भी देख सकते है ।

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