Quotes in Hindi

50+【Bhagavad Gita Quotes】in Hindi

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कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर कौरवों एक पांडवों के बीच हुए इतिहास के सबसे बड़े महायुद्ध के समय जब अर्जुन परिवार के मोह में फँसकर भ्रमित हो गए थे तब भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को भागवत गीता का उपदेश सुनाया था । Bhagwat Gita में जीवन का सम्पूर्ण सार समाहित है । इसमें इंसान के जन्म से लेकर मृत्यु तक का वर्णन किया गया है ।

भागवत गीता को 3 वर्गों में बाँटा गया है । इन वर्गों को 18अध्याय में लिखा गया है इस प्रकार हर वर्ग में 6 अध्याय आते है । इन 18 अध्यायों की रचना संस्कृत के 700 छंदों के द्वारा हुई है । इन छंदों के माध्यम से भगवान Shri Krishna के द्वारा दिए गए मनुष्य के कर्म पर आधारित उपदेशों को दुनिया के सामने रखा गया है । इन वचनों का पालन करने वाला व्यक्ति अपने जीवन में आने वाले किसी भी परेशानी का सामना बिना किसी डर के कर सकता है और सफलता प्राप्त करता है । तो चलिए पढ़ते है ऐसे ही ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणात्मक Quotes Of Lord Krishna, श्रीमद् भगवद गीता quotes in hindi with images download, bhagavad geeta quotes in hindi with english translation pdf ,bhagavad gita quotes in telugu,bhagavad gita quotes in kannada,bhagavad gita quotes in malayalam
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भगवद्गीता Quotes In Hindi And English

क्रोध से  भ्रम  पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है, जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है ।

In English – Delusion arises from anger. The mind is bewildered by delusion. Reasoning is destroyed when the mind is bewildered. One falls down when reasoning is destroyed.


एक उपहार तभी अलसी और पवित्र है जब वह हृदय से किसी सही व्यक्ति को सही समय और सही जगह पर दिया जाये, और जब उपहार देने वाला व्यक्ति दिल में उस उपहार के बदले कुछ पाने की उम्मीद ना रखता हो।

In English – A gift is pure when it is given from the heart to the right person at the right time and at the right place, and when we expect nothing in return.


कर्म मुझे बांधता नहीं, क्यूंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं ।

In English – Karma does not bind me, because I do not have any desire for karma reward.


अपने अनिवार्य कार्य करो, क्योंकि वास्तव में कार्य करना निष्क्रियता से बेहतर है ।

In English – Perform your obligatory duty, because action is indeed better than inaction.


मैं आत्मा हूँ, जो सभी प्राणियों के हृदय(दिल) से बंधा हुआ हूँ। इसके साथ ही मैं सभी प्राणियों का शुरुवात हूँ, मध्य हूँ और समाप्त भी हूँ ।

In English – I am the Soul abiding in the heart of all beings. I am also the beginning, the middle, and the end of all beings.


फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है ।

In English –  A man who turns away from the desire for results, makes his life successful.


केवल मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है ।

In English – Only the mind is someone’s friend and enemy.


जो  व्यक्ति  आध्यात्मिक  जागरूकता  के  शिखर  तक  पहुँच  चुके  हैं  , उनका  मार्ग  है  निःस्वार्थ  कर्म  . जो  भगवान्  के  साथ  संयोजित हो  चुके  हैं  उनका  मार्ग  है  स्थिरता  और  शांति.

In English – Though I am the author of this system, one should know that I do nothing and I am eternal.


वह जो अपने भीतर अपने स्वयं से खुश रहता है, जिसके मनुष्य जीवन एक आत्मज्ञान है, और जो अपने खुद से संतुष्ट हैं, पूरी तरीके से तृप्त है – उसके लिए जीवन में कोई कर्म नहीं हैं।

In English –  Reshape yourself through the power of your will; never let yourself be degraded by self-will. The will is the only friend of the Self, and the will is the only enemy of the Self.


जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के सामान कार्य करता है ।

In English – Who do not control the mind, For them he acts like enemy.


भगवद् गीता Quotes on Mind

हर व्यक्ति का विश्वास उसके स्वभाव के अनुसार होता है।


जो दान बिना सत्कार के,कुपात्र को दिया जाता है वह तमस दान कहलाता है।


मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह विश्वास करता है वैसा वह बन जाता है ।


हमेशा संदेह करने से खुद का ही नुकसान होता है।संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न ही इस लोक में है और न ही किसी और लोक ।


मन बहुत ही चंचल होता है और इसे नियंत्रित करना कठिन है. परन्तु अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है ।


जो इंसान ज्ञान और कर्म को एक सामान देखता है, सिर्फ उसी व्यक्ति का नजरिया सही है ।


यद्द्यापी  मैं  इस  तंत्र  का  रचयिता  हूँ, लेकिन  सभी  को  यह  ज्ञात  होना  चाहिए  कि  मैं  कुछ  नहीं  करता  और  मैं  अनंत  हूँ ।


Bhagavad Gita Quotes on Love in Hindi

संसार के सयोग में जो सुख प्रतीत होता है , उसमे दुःख भी मिला रहता है । परन्तु संसार के वियोग से सुख दुःख से अखंड आनंद प्राप्त होता है ।


मेरे लिए ना कोई घृणित है ना प्रिय, किंतु जो व्यक्ति भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं, वह मेरे साथ हैं और मैं भी उनके साथ ।


जो मुझसे प्रेम करते है और मुझसे जुड़े हुए है, मैं उन्हें हमेशा ज्ञान देता हूँ ।


हमेशा आसक्ति से ही कामना का जन्म होता है ।


भय ,राग, द्वेष और आसक्ति से रहित मनुष्य ही इस लोक और परलोक में सुख पाते है ।


सभी वेदों में से मैं साम वेद हूँ, सभी देवों में से मैं इंद्र हूँ, सभी समझ और भावनाओं में से मैं मन हूँ, सभी जीवित प्राणियों में मैं चेतना हूँ।


मैं  ऊष्मा  देता  हूँ, मैं  वर्षा करता हूँ  और  रोकता  भी हूँ, मैं  अमरत्व   भी  हूँ  और  मृत्यु  भी ।


मैं  सभी  प्राणियों  के  ह्रदय  में  विद्यमान  हूँ ।


ऐसा कुछ  भी  नहीं  ,चेतन  या  अचेतन  ,जो  मेरे  बिना  अस्तित्व  में  रह  सकता  हो।


वह मैं हूँ, जो सभी प्राणियों के दिल(ह्रदय) में उनके नियंत्रण के रूप में बैठा हूँ; और वह मैं हूँ, स्मृति का स्रोत, ज्ञान और युक्तिबाद संबंधी. दोबारा, मैं ही अकेला वेदों को जानने का रास्ता हूँ, मैं ही हूँ जो वेदों का मूल रूप हूँ और वेदों का ज्ञाता हूँ।


बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता ।


Bhagavad Gita Quotes on Death

आत्मा को शास्त्र नहीं काट सकते , अग्नि नहीं जला सकती , जल नहीं गाला सकता , वायु नहीं सूखा सकती ।


उत्पन्न होने वाली वस्तु तो स्वतः ही मिटती है ,जो वस्तु उत्पन्न नहीं होती वह कभी नहीं मिटती |आत्मा अजर अमर है और शरीर नश्वर है |


तुम उसके लिए शोक करते हो जो शोक करने के योग्य नहीं है, और फिर भी ज्ञान की बात करते हो, बुद्धिमान व्यक्ति ना जीवित और ना ही मृत व्यक्ति के लिए शोक करते हैं ।


न तो यह शरीर तुम्हारा है और न तो तुम इस शरीर के मालिक हो. यह शरीर 5 तत्वों से बना है – आग, जल, वायु पृथ्वी और आकाश । एक दिन यह शरीर इन्ही 5 तत्वों में विलीन हो जाएगा ।


भगवान या परमात्मा की शांति उनके साथ होती है जिसके मन और आत्मा में एकता/सामंजस्य हो, जो इच्छा और क्रोध से मुक्त हो, जो अपने स्वयं/खुद के आत्मा को सही मायने में जानते हों।


सन्निहित आत्मा के अनंत का अस्तित्व है, अविनाशी और अनंत है, केवल भौतिक शरीर तथ्यात्मक रूप से खराब है, इसलिए हे अर्जुन लड़ते रहो।


Bhagavad Gita Quotes in Sanskrit with Hindi Translation

कर्मणये वाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन ।
मां कर्मफलहेतुर्भू: मांते संङगोस्त्वकर्मणि।।

अर्थ – भगवान श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं, सिर्फ तू कर्म कर, कर्म के फल की इच्छा मत रख, कर्म फल को देने का अधिकार सिर्फ ईश्वर का है, और न ही खली बेठ अर्थार्थ मनुष्य की गति हमेशा ही कर्म में रहनी चाहिए, कर्म फल को ईश्वर पर छोड दे|


परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे-युगे।

अर्थ – सज्जन पुरुषों के कल्याण के लिए और दुष्कर्मियों के विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं (श्रीकृष्ण) युगों-युगों से प्रत्येक युग में जन्म लेता आया हूं।अर्थार्थ, इस संसार में जब – जब धर्म की हानी होगी और अधर्म का लाभ होगा तब – तब मै धर्म की स्थापना के लिए इस धरती पर जन्म लेता रहूँगा |


त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः।
कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्।।

अर्थ – काम  क्रोध और लोभ-ये तीन प्रकारके नरक के दरवाजे जीवात्मा का पतन करनेवाले हैं|  इसलिये मनुष्य को शांति पूर्वक जीवन जीने के लिए इन तीनों का त्याग कर देना चाहिये।


यो न हृष्यति न द्वेष्टि न शोचति न काङ्‍क्षति।
शुभाशुभपरित्यागी भक्तिमान्यः स मे प्रियः॥

अर्थ – जो न कभी हर्षित होता है, न द्वेष करता है, न शोक करता है, न कामना करता है तथा जो शुभ और अशुभ सम्पूर्ण कर्मों का त्यागी है- वह भक्तियुक्त पुरुष मुझको प्रिय है ।


लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥

अर्थ – जिनके सब पाप नष्ट हो गए हैं, जिनके सब संशय ज्ञान द्वारा निवृत्त हो गए हैं, जो सम्पूर्ण प्राणियों के हित में रत हैं और जिनका जीता हुआ मन निश्चलभाव से परमात्मा में स्थित है, वे ब्रह्मवेत्ता पुरुष शांत ब्रह्म को प्राप्त होते हैं ।


यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः ।
स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते ॥

अर्थ – श्रेष्ठ पुरुष जो-जो आचरण करता है, अन्य पुरुष भी वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण कर देता है, समस्त मनुष्य-समुदाय उसी के अनुसार बरतने लग जाता है।


यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम॥

अर्थ – हाँ योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण हैं और जहाँ गाण्डीवधनुषधारी अर्जुन हैं? वहाँ ही श्री विजय विभूति और अचल नीति है ऐसा मेरा मत है।


Gita Suvichar in Hindi

वह जो वास्तविकता में मेरे उत्कृष्ट जन्म और गतिविधियों को समझता है, वह शरीर त्यागने के बाद पुनः जन्म नहीं लेता और मेरे धाम को प्राप्त होता है ।


एक योगी, तपस्वी से बड़ा है, एक अनुभववादी और एक कार्य के फल की चिंता करने वाले व्यक्ति से भी अधिक। इसलिए, हे अर्जुन, सभी परिस्तिथियों में योगी बनो।


मैं सभी प्राणियों को एकसमान रूप से देखता हूं। मेरे लिए ना कोई कम प्रिय है ना ज्यादा, लेकिन जो मनुष्य मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं। वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूं।


हे अर्जुन तू युद्ध भी कर और हर समय में मेरा स्मरण भी कर ।


पूर्णता के साथ किसी और के जीवन की नकल कर जीने की तुलना में अपने आप को पहचानकर अपूर्ण रूप से जीना  बेहतर है।


मैं समय हूँ, सबका नाशक, मैं आया हूँ दुनिया को उपभोग करने के किये ।


संसार के सयोग में जो सुख प्रतीत होता है , उसमे दुःख भी मिला रहता है । परन्तु संसार के वियोग से सुख दुःख से अखंड आनंद प्राप्त होता ।


परिवर्तन परिवर्तन ही संसार का नियम है। एक पल में हम करोड़ों के मालिक हो जाते है और दुसरे पल ही हमें लगता लगता है की हमारे आप कुछ भी नहीं है।


अपने परम भक्तों, जो हमेशा मेरा स्मरण या एक-चित्त मन से मेरा पूजन करते हैं, मैं व्यक्तिगत रूप से  उनके कल्याण का उत्तरदायित्व  लेता हूँ।


किसी दुसरे के जीवन के साथ पूर्ण रूप से जीने से बेहतर है की हम अपने स्वयं के भाग्य के अनुसार अपूर्ण जियें।


 

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