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Demonetization in Hindi Essay Pdf Download- विमुद्रीकरण पर निबंध – Notebandi par Essay in Hindi

भारत एक ऐसा देश है जो दिन प्रति दिन विकास की बुलंदिया छूटा जा रहा है| ऐसे में ब्रस्ताचार को रोकने के लिए नोटेबंदी करने का निर्णय एक बहुत ही कठिन निर्णय था जो की भारत की केंद्र की मोदी सरकार ने लिया| ऐसे में बहुत से आम लोगो को तकलीफ हुई परन्तु ब्रस्ताचार और काला धन की समस्या भारत में कम हुई जिसके कारण भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार की नै क्रान्ति आई| आप vimudrikaran essay in hindi, essay on demonetisation in hindi pdf download, notebandi par essay in hindi, vimudrikaran ka prabhav, आदि जानकारी हिंदी, इंग्लिश, मराठी, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या निबंध प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Vimudrikaran in hindi essay

अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है संयुक्त राष्ट्र दिवस पर निबंध लिखें| आइये अब हम आपको vimudrikaran essay in english, essay on demonetisation in hindi in 250 words, विमुद्रीकरण के लाभ और हानि, विमुद्रीकरण पर लेख, विमुद्रीकरण पर निबंध, demonetization short essay in hindi, भारत में विमुद्रीकरण पर निबंध, विमुद्रीकरण पर हिंदी में निबंधडेमोनेटिसेशन एस्से इन हिंदी, demonetization in india essay in hindi आदि की जानकारी आदि की जानकारी 100 words, 150 words, 200 words, 400 words में ढूंढ सकते है| साथ ही देखें मतदाता जागरूकता निबंध |

म सब जानते है की ८ नवम्बर की शाम ८ बजे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया था| इसके तहत ५०० और १००० रूपए के नोटोको गैरकानूनी घोषित किया था| अब इनकी कीमत एक पेपर मात्रा रह गयी थी| सरकार ने जनता को ५० दिन की महोलट दी थी जिसमे हमें ५०० और १००० के नोट बैंक में जमा करवाने थे, और उसके बदले बैंक से नोट बदलवाने थे| इस अचानक की गयी घोषणा से पूरा भारत प्रभावित हुआ था| हमें घंटो तक एटीएम, बैंक के सामने कतार में समय बिताना पड़ा| इस दौरान कई लोगोंकी जान भी गयी तो कई लाइन में थककर गिर पड़े| नोटबंदी का प्रभाव और परिणाम नोटबंदी का भारतीय नागरिक और व्यवसायों पर बहोत बड़ा प्रभाव हुआ|

सब के लिए यह कठनाई का समय था| रियल एस्टेट के भाव बहोत गिर गए, यह उद्योग पहलेसेही खस्ता हालत में था, नोटबंदी के वजह से तो इसकी नीव पर ही प्रहार हुआ| कीमतों में गिरावट, मजदूरोंको वेतन देने के लिए नकद की किल्लत ने रियल एस्टेट बाज़ार हो ख़ासा परेशान किया था| जिनके पास पैसा था ऐसे जागरूक ग्राहकोंने इस परिस्थिति का लाभ उठाया और कम कीमत में घर, जमीन खरीद ली| काला धन रखने वालोंने भी जमीने और घर खरीद लिए, पर इस कारण वह अब सरकार के राडार में आ गए है| अब एक साल के बाद यह मार्केट फिर से तेजी पकड़ रहा है| नोटबंदी के कारण रोज मर्रा की ज़िन्दगी की बड़ी प्रभावित हुई, हम किराना, सब्जी, दूध नहीं ले पा रहें थे| टैक्सी, बस के लिए छुट्टे पैसे नहीं थे, रोजाना ऑफिस जानेवालोंको इससे बहोत तख़लीफ़ हुई| पैसोंके कमी के कारण दवाइया नहीं मिल रहीं थी, अस्पताल मरीजोंको एडमिट नहीं कर रहें थे; इस कारण बहोत सारे लोगों की जान भी चली गयी| नोटबंदी के काल में यह सबसे शोकाकुल घटना थी| कहीं लोगों को अपनी शादी पोस्टपोन करनी पड़ी| दिहाड़ी मजदूर जो दिन के कमाई पे पेट पालते है, उन्हें, उनके बच्चों को भूका रहना पड़ा| लाखो लोगोंको नोटबंदी के वजह से काफी तख़लीफ़ोंसे गुजरना पड़ा फिर भी उन्होंने इस राष्ट्रिय आंदोलन का समर्थन किया|

अब एक साल के हो गया है, हालात अब ठीक हुए है, पर फिर भी जनता में नोटबंदी के बारेमे आक्रोश नहीं है| इससे यह प्रतीत होता है की आम जनता को सरकार की यह पहल सराहनीय लगी| इस योजना के कार्यान्वयन पर बहोत लोग नाराज़ जरूर हुए पर भी उन्होंने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का साथ दिया| नोटबंदी के चलते सोने के मार्केट में भारी गिरावट आयी, इससे शेयर मार्केट को भी हानी हुई| वैसेही रोज मर्रा की चीज़ों से लेकर गाड़ियों के खरीद में भारी गिरावट आ गई थी, एक तरह से कुछ हफ़्तों के लिए बाज़ार ठप हो गया था| नोटबंदी से भारत का हर बाज़ार और नागरिक प्रभावित हुआ था| नोटबंदी के नुकसान / हानी इस योजना का मकसद सही था मगर कार्यान्यवन (इम्प्लीमेंटेशन) सही नहीं हुआ, इसके वजह से करोडो लोगों को तख़लीफ़े झेलनी पड़ी| नोटबंदी के अचानक की गयी घोषणा से किसको तैयारी करनेका समय ही नहीं मिला| एटीएम में नए नोटोंके माप से मशीन को कैलिब्रेट करनेमे बैंक कर्मचारियोंको बहोत समय लगा| सरकार नए नोट तेज़ी से छाप नहीं पाई, इस कारण आम जनता और बिजनेस की बहोत हानी हुई| जिस मूल उद्देश्य से नोटबंदी जारी की थी उसमे सरकार सफल नहीं रही| भ्रष्टाचार ख़तम नहीं हुआ, ना आतकवादी फंडिंग| ८ नवम्बर से कुछ महीनों में ही नकली नोट फिरसे बाज़ार में आये थे| इस कारण सरकार मूल योजना से हटकर कैशलेस इकॉनमी का बहाना आगे किया| इससे जो परिणाम सरकार को अपेक्षित थे वह वे हासिल नहीं कर पायें| विरोधी दल तो नोटबंदी को भारत का सबसे बड़ा स्कॅम बताने लगे| अलग-अलग राजनैतिक गाठोंने साथ आकर पीएम मोदी के खिलाफ प्रदर्शन किये, मोर्चा निकला| पर जनता ने उन्हें उतना साथ नहीं दिया|

Demonetization essay in hindi – विमुद्रीकरण निबंध

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भूमिका : नोटबंदी में जब पुराने नोटों और सिक्कों को बंद करके नए नोट और सिक्के चलाये जाते हैं उसे नोटबंदी कहते हैं। नोटबंदी एक प्रक्रिया होती है जिसमें मुद्रा का क़ानूनी दर्जा निकाल दिया जाता है और यह सिक्कों में भी लागु होता है। पुराने नोटों और सिक्कों को बदल दिया जाता है और उनकी जगह पर नए नोटों और सिक्कों को लागु कर दिया जाता है।

जब नोटबंदी के नए नोट समाज में आ जाते हैं तो पुराने नोटों की कोई कीमत नहीं रहती है। पुराने नोटों को बैंकों और एटीएम से बदलवाया जाता है। नोटों को बदलवाने के लिए समय निर्धारित किया जाता है। नोटों को बैंक की मदद से बदलवाया जा सकता हैं।

नोटबंदी का कारण : भ्रष्टाचार , कालाधन , नकली नोट , मंहगाई और आतंकवादी गतिविधियों पर काबू पाने के लिए ही नोटबंदी का उपयोग किया जा सकता है। जो लोग भ्रष्टाचारी होते हैं वो काले धन को कैश में छुपाकर रखते हैं जिससे वो उस पर लगने वाले कर से बच सकें।

इसी धन को आतंकवादी कारणों के लिए प्रयोग किया जाता है। नोटबंदी की वजह से ही भ्रष्ट और आतंकवादी लोगों को पुराने नोटों को इस्तेमाल करने की वजह से ही पकड़ा गया है। कभी-कभी तो नकद लेन-देन को हितोत्साहित करने के लिए भी नोटबंदी का सहारा लिया जाता है।

भारत में नोटबंदी : हमारा भारत पहला देश नहीं है जहाँ पर नोटबंदी हुई है। भारत में पहली बार वर्ष 1946 में 500, 1000, और दस हजार के नोटों की नोटबंदी की गई थी। मोरारजी में भी जनवरी 1978 में 1000, 5000 , और 10000 के नोटों को बंद किया गया था |

भारत में 2005 में मनमोहन सिंह की सरकार ने भी 2005 से पहले के 500 के नोटों को बदलवा दिया था। जब यूरोप यूनियम बना तब उन्होंने यूरो नाम की नई करेंसी चलाई थी तब सारे पुराने नोट बैंकों में जमा करवाए गये थे। यूरोप में हुई इस नोटबंदी ने यूरोप में बवाल मचा दिया था लेकिन शायद भारत में हुआ उतना नहीं।

जिम्बाब्वे में भी महंगाई से बचने के लिए 2015 में नोटबंदी का प्रयोग किया गया था। भारत में पहले भी नोटबंदी हुई थी परन्तु वह इतनी प्रसिद्ध नहीं हुई थी। आज हम छोटे सिक्कों जैसे 5 , 10 , 20 , 50 ,100 पैसों का प्रयोग नहीं करते हैं उन्हें भी बंद किया गया था।

लेकिन 500 और 1000 नोटों की नोटबंदी की कहानी ही अलग है। इन दो करेंसी ने भारतीय अर्थव्यवस्था के 86% भाग को काबिज किया था यही नोट बाजार में सबसे अधिक चलते थे। इसी वजह से इसका इतना बड़ा बवाल और परिणाम हुआ।

8 नवम्बर , 2016 की नोटबंदी : 8 नवम्बर , 2016 को 8:15 बजे 500 और 1000 के नोटों की नोटबंदी की घोषणा की गई। लोगों को आशा थी प्रधानमंत्री जी भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली नोक-झोक की बात करेंगे लेकिन नोटबंदी की घोषणा ने तो सभी को हिला कर रख दिया।

कुछ लोग ने प्रधानमंत्री जी का समर्थन किया तो कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री जी का विरोध किया और नोटबंदी की ख़ारिज करने की मांग की लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जिन लोगों ने काले धन को छिपा कर रखा हुआ था वो सुनारों के पास जाकर उस धन से सोना खरीदने लगे। नोटबंदी की घोषणा के अगले दिन से ही बैंकों और एटीएम के बाहर लाईने लगनी शुरू हो गयीं।

सरकार ने काला धन निकालने के लिए बहुत प्रयत्न किये जैसे – बैंकों में नोटों को बदलवाने की संख्या में घटा-बढ़ी की गई , नए-नए कानून बनाए गये , नियमों को सख्ती से लागु किया गया। सरकार ने अपने निर्णय को सही साबित करने के लिए 50 दिन का समय माँगा। पुराने नोटों को बदलने के लिए 500 और 2000 के नए नोटों को चलाया गया।

विपक्षी पार्टी का विरोध : प्रधानमंत्री जी की नोटबंदी की योजना को विपक्ष पार्टी ने असफल और देश के पिछड़ने की वजह बताया लेकिन प्रधानमंत्री जी अपने फैसले पर अड़े रहे। विपक्षी पार्टी इस तरह से नोटबंदी का विरोध कर रही थी मानो उन्होंने अपने पास बहुत सारा काला धन छुपा कर रखा हुआ है।

पूरी विपक्ष पार्टी ने नोटबंदी की योजना का विरोध किया और उनके खिलाफ बहुत से कदम भी उठाये जैसे – मोर्चे , प्रदर्शन , रोष प्रकट करना आदि लेकिन फिर भी नोटबंदी को रोका नहीं जा सका। नोटबंदी के कारण ही अनेकता में एकता का भाव सार्थक हुआ था।

नोटबंदी में मिडिया : नोटबंदी में मिडिया का बहुत ही अच्छा रोल था। कुछ मिडिया वाले नोटबंदी के पक्ष में थे तो कुछ नोटबंदी के विरोध में थे। कुछ खबरों में लोगों को लाईनों में खड़े होकर मजे लेते हुए देखा गया तो कुछ लोगों को नोटबंदी की वजह से आत्महत्या करते भी देखा गया।

Essay on demonetisation in hindi pdf

विमुद्रीकरण पर निबंध

मोदी सरकार द्वारा आठ नंवबर को हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद करने के बाद से ही देश मुद्रा की कमी से परेशान रहे। सरकार ने कहा है कि 30 दिसंबर तक सभी लोग बैंक में जाकर अपने पैसे जमा करा दे। लोगों से यह भी अपील की गई कि वे नकदी और उपयोग कम से कम करें और डिजिटल माध्यमों से भुगतान करें। आइए डालते हैं विमुद्रीकरण पर एक नजर…

क्या है विमुद्रीकरण : जब सरकार पुरानी मुद्रा (Currency) को कानूनी तौर पर बंद कर देती है और नई मुद्रा लाने की घोषणा करती है तो इसे विमुद्रीकरण (Demonetization) कहते हैं। इसके बाद पुरानी मुद्रा अथवा नोटों की कोई कीमत नहीं रह जाती। हालांकि सरकार द्वारा पुराने नोटों को बैंकों से बदलने के लिए लोगों को समय दिया जाता है, ताकि वे अमान्य हो चुके अपने पुराने नोटों को बदल सकें।

8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश में 1000 और 500 रुपए के नोट बंद करने की घोषणा की अर्थात विमुद्रीकरण की घोषणा की। आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने भी सरकार की इस घोषणा का समर्थन किया। इसके बाद सरकार 500 और 2000 रुपए के नए नोट भी बाजार में लेकर आई।

आरबीआई के अनुसार 31 मार्च 2016 तक भारत में 16.42 लाख करोड़ रुपए मूल्य के नोट बाजार में थे, जिसमें से करीब 14.18 लाख रुपए 500 और 1000 के नोटों के रूप में थे। 1938 में गठित भारतीय रिजर्व बैंक ने अभी तक 10 हजार रुपए से अधिक का नोट जारी नहीं किया है।

विमुद्रीकरण क्यों : कालाधन, भ्रष्टाचार, नकली नोट और आतंकवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकारें विमुद्रीकरण का फैसला लेती हैं। अवैध गतिविधियों में संलग्न लोग नोटों को अपने पास ही रखते हैं। ऐसे में विमुद्रीकरण से सीधे उन पर चोट होती है। कई बार नकद लेन देन को हतोत्साहित करने के लिए भी नोटबंदी की जाती है। केन्द्र की मोदी सरकार को भी उम्मीद है कि नोटबंदी से कालेधन, नकली नोट और आतंकवाद पर अंकुश लगेगा। हालांकि नोटबंदी के चलते आम आदमी को भी काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ा। केन्द्र सरकार अपने इस फैसले से नकद लेन-देन को भी हतोत्साहित करने की कोशिश कर रही है। कई देशों में विमुद्रीकरण बेहद आम प्रक्रिया मानी जाती है।

इसके उलट वेनेजुएला में अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने का कभी कोई काम नहीं किया गया। इसीलिए वहां अब एक लीटर दूध लगभग 13 हजार रुपए में और एक अंडा 900 रुपए में बिक रहा है। सबसे आश्चर्य वाली बात तो यह कि वेनेजुएला में सामान के बदले नोट गिनकर नहीं तौलकर लिए जा रहे हैं। इसका मतलब यह कि मक्खन की एक स्लाइस के बदले उतनी वजन के नोट लिए जा रहे हैं।

भारत कब-कब हुई नोटबंदी : भारत में पहली बार साल 1946 में 500, 1000 और 10 हजार के नोटों को बंद करने का फैसला लिया गया था। 1970 के दशक में भी प्रत्यक्ष कर की जांच से जुड़ी वांचू कमेटी ने विमुद्रीकरण का सुझाव दिया था, लेकिन सुझाव सार्वजनिक हो गया, जिसके चलते नोटबंदी नहीं हो पाई।

जनवरी 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार सरकार ने एक कानून बनाकर 1000, 5000 और 10 हजार के नोट बंद कर दिए। हालांकि तत्कालीन आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल ने इस नोटबंदी का विरोध किया था।

कई बार सरकार पुराने नोटों को एकदम बंद करने के बजाय धीरे-धीरे बंद कर देती है। 2005 में मनमोहन सिंह की कांग्रेस नीत सरकार ने 500 के 2005 से पहले के नोटों का विमुद्रीकरण कर दिया था।

नोटबंदी के नुकसान पर निबंध

नोटबंदी के करीब 10 महीने बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे जुड़ी रिपोर्ट जारी की है. 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद किए जाने से न सिर्फ अर्थव्‍यवस्‍था पर असर पड़ा है बल्कि आम आदमी को भी इसकी वजह से कई फायदे और नुकसान हुए हैं. 8 नवंबर, 2016 को शुरू हुई नोटबंदी के चलते इकोनॉमी में काफी बदलाव आए हैं. एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजैक्‍शन बढ़ा है. वहीं, बैंकों ने बचत खाते की ब्‍याज दरों में कटौती भी करनी शुरू कर दी है. रेटिंग एजेंसी CRISIL के चीफ इकोनॉमिस्‍ट डी.के. जोशी के मुताबिक नोटबंदी के चलते आम आदमी को जो भी नफा और नुकसान हुए हैं, वह सिर्फ शॉर्ट टर्म के लिए हैं.

नोटबंदी से हुए ये 3 फायदे

1. होम लोन सस्ता हुआ

चीफ इकोनॉमिस्‍ट डी.के. जोशी के मुताबिक नोटबंदी ने होम लोन सस्‍ता करने में मदद की है. नोटबंदी की वजह से बैंकों में काफी बड़ी मात्रा में डिपोजिट आया है. इसका फायदा बैंकों ने आम आदमी को सस्‍ते कर्ज के तौर पर दिया है. ये इसी से साबित होता है कि पिछले साल के मुकाबले इस साल हाउसिंग दरों में 3 फीसदी तक कमी आई है. पिछले साल ये दरें जहां 10.5 से लेकर 12 फीसदी तक थीं, अब ये 8 से 9 फीसदी तक आ गई हैं.

2. महंगाई पर लगाम कसी

नोटबंदी ने महंगाई पर भी लगाम कसने में मदद की है. इकोनॉमिस्‍ट डी.के. जोशी बताते हैं कि अवैध पैसे को खपाने के लिए फिजूलखर्ची बड़े स्‍तर पर की जाती है. इसकी वजह से सामान की कीमतें बढ़ती हैं. नोटबंदी के चलते कुछ हद तक यह पैसा सिस्‍टम में वापस आया है. इसके साथ ही सरकार की तरफ से लगातार संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पर नजर रखी गई. इसकी वजह से इन ट्रांजैक्‍शन में काफी कमी आई. इसका फायदा महंगाई दर घटने के रूप में मिला. नवंबर, 2016 में महंगाई दर 3.63 फीसदी थी. वह जुलाई 2017 में घटकर 2.36 फीसदी पर आ गई.

3. कैशलेस ट्रांजैक्‍शन बढ़ा

नोटबंदी के चलते कैशलेश ट्रांजैक्‍शन बढ़ने में काफी मदद मिली है. नोटबंदी के दौरान कैश की किल्‍लत होने से न सिर्फ लोगों ने ज्‍यादा डिजिटल ट्रांजैक्‍शन किए, बल्कि सरकार की तरफ से भी इसके प्रोत्‍साहन के लिए काफी कदम उठाए गए. हिंदुस्‍तान टाइम्‍स की एक रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर, 2016 में जहां कैशलेस ट्रांजैक्‍शन का आंकड़ा 67.2 करोड़ था, वह फरवरी, में 76.3 करोड़ पर पहुंच गया.

नोटबंदी से हुए ये 3 नुकसान

1. लेनदेन में दिक्‍कत

नोटबंदी को भले ही 9 महीने से ज्‍यादा हो चुके हैं, लेकिन इसका थोड़ा बहुत असर अभी भी है. आज भी बैंकों के कई एटीएम से सिर्फ 2000 और 500 रुपये के ही नोट निकल रहे हैं. इससे लोगों को आज भी छोटे-मोटे लेनदेन करने में व्‍यावहारिक दिक्‍कतें आ रही हैं. इसकी एक वजह एटीएम से 500 से छोटे नोट न निकलना भी है.

2. बचत खाते पर ब्‍याज दर घटी

भारतीय स्‍टेट बैंक समेत कई सरकारी और निजी बैंकों ने सेविंग्‍स अकाउंट पर ब्‍याज दर घटा दी है. डी.के. जोशी के मुताबिक इसमें थोड़ी बहुत भागीदारी नोटबंदी ने निभाई है. उनके अनुसार नोटबंदी के चलते बैंकों में लिक्विडिटी बढ़ गई है. ऐसे में बैंकों ने ब्‍याज दर घटाना ही अपने लिए फायदेमंद समझा है. अच्‍छी बात यह है कि ये स्थिति कुछ समय के लिए ही रहेगी.

3. छोटे उद्योगों को उठाना पड़ा नुकसान

नोटबंदी का सबसे ज्‍यादा प्रभाव उन उद्योगों पर पड़ा है, जो ज्‍यादातर कैश में लेनदेन करते थे. इसमें अधिकतर छोटे उद्योग शामिल होते हैं. नोटबंदी के दौरान इन उद्योगों के लिए कैश की किल्‍लत हो गई. इसकी वजह से उनका कारोबार ठप पड़ गया. लोगों की नौकरियां गईं.

नोटबंदी के फायदे पर निबंध

demonetization नीति के पीछे सरकार के घोषित उद्देश्य इस प्रकार हैं; सबसे पहले, यह भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक प्रयास है। दूसरा यह कि मूल्य वृद्धि, धन अवैध गतिविधि के लिए प्रवाह, पांचवें हर रुपया वे अधिकारी के लिए जवाबदेह लोगों को बनाने और आय कर रिटर्न का भुगतान करने को रोकने के लिए चौथे तना नियंत्रित करने के लिए काले धन पर अंकुश लगाने के, तीसरे किया जाता है। अंत में, यह एक कैशलेस समाज बनाने के लिए और एक डिजिटल भारत बनाने के लिए एक प्रयास है।

वहाँ 500 और 1000 रुपये में नोटों की demonetization की वर्तमान निर्णय करने के लिए एक पृष्ठभूमि है। सरकार नवंबर 8, 2016 और अधिक पढ़ें घोषणा से काफी पहले इस दिशा में कुछ कदम उठाए हैं।

पहले कदम के रूप में सरकार के लोगों से आग्रह किया था जन धन योजना के तहत बैंक खातों बनाने के लिए। वे अपने जन धन खातों में सारे पैसे जमा करने के लिए कहा है और बैंकिंग के तरीकों के माध्यम से ही उनके भविष्य के लेनदेन कर रहे थे।

दूसरा कदम यह है कि सरकार की पहल की आय का एक कर घोषणा की थी और 30 अक्टूबर को दिया था इस उद्देश्य के लिए 2016 की समय सीमा। इस विधि के माध्यम से सरकार अघोषित आय का एक विशाल राशि जुटाने में सक्षम था।

हालांकि, वहाँ कई हैं जो अभी भी काले धन hoarded, और आदेश में उनसे निपटने के लिए थे; सरकार 500 और 1000 के नोटों की demonetization की घोषणा की।

demonetization नीति देश में एक वित्तीय सुधार के रूप में देखा जा रहा है लेकिन इस निर्णय के लिए अपने स्वयं के गुण और दोष से भरा है।

Demonitisation के गुण
demonetization नीति भारत भ्रष्टाचार मुक्त बनने के लिए मदद मिलेगी। रिश्वत लेने में लिप्त उन भ्रष्ट आचरण से बचना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें उनकी बेहिसाब नकदी रखने के लिए के लिए मुश्किल हो जाएगा।

इस कदम से काले धन को ट्रैक करने के लिए सरकार से मदद मिलेगी। जो बेहिसाब नकदी है उन व्यक्तियों अब आय दिखाने के और किसी भी वैध वित्तीय लेन-देन के लिए पैन प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक हैं। सरकार आय है जिस पर कर का भुगतान नहीं किया गया है के लिए आय कर रिटर्न मिल सकता है।

इस कदम से बेहिसाब नकदी प्रवाह के कारण अवैध गतिविधियों है कि संपन्न होते हैं करने के लिए वित्त पोषण बंद हो जाएगा। पर प्रतिबंध लगाने के लिए उच्च मूल्य मुद्रा आतंकवाद आदि जैसे आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाने जाएगा

उच्च मूल्य मुद्रा पर प्रतिबंध भी काले धन को वैध के खतरे पर लगाम लगेगी। अब इस तरह की गतिविधि को आसानी से लगाया जा सकता है और आयकर विभाग ऐसे लोग हैं, जो काले धन को वैध के व्यवसाय में हैं पकड़ कर सकते हैं।

इस कदम से नकली नोटों का प्रचलन बंद हो जाएगा। संचलन में डाल नकली मुद्रा के अधिकांश उच्च मूल्य के नोटों की है और 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध लगाने नकली नोटों के प्रचलन को समाप्त होगा।

इस कदम से उन लोगों को जो प्रधानमंत्री के जन धन योजना के तहत जन धन खातों खोला था के बीच ब्याज उत्पन्न किया है। अब वे इस योजना के तहत उनके नकदी जमा कर सकते हैं और इस पैसे को देश के विकास की गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

demonetization नीति लोग आयकर रिटर्न का भुगतान करने के लिए मजबूर कर देगी। लोग हैं, जो उनकी आय छुपा दिया गया है में से अधिकांश अब आगे आने के लिए अपनी आय घोषित करने और उसी पर कर का भुगतान करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

हालांकि 2.5 लाख रुपये तक की जमा राशि आयकर जांच के दायरे में नहीं आएगा, व्यक्तियों नकदी में 50,000 रुपये से ऊपर के किसी भी जमा करने के लिए पैन प्रस्तुत करने के लिए आवश्यक हैं। इस उच्च मूल्यवर्ग मुद्रा के साथ व्यक्तियों को ट्रैक करने के लिए आयकर विभाग में मदद मिलेगी।

नोटबंदी निबंध मराठी

Demonetization धोरणामागे सरकारने घोषित उद्देश खालीलप्रमाणे आहेत; सर्वप्रथम, भारत भ्रष्टाचार मुक्त करण्याचा प्रयत्न आहे. काढणे किंमत, बेकायदेशीर गतिविधीचा पैसे प्रवाह दुसरी काळा पैसा अंकुश, पाचव्या ते लोक परतावा भरण्याची कार्यावर साठी जबाबदार आणि आयकर टाळण्यासाठी प्रत्येक रुपया, तिसऱ्या चौथ्या अक्ष नियंत्रित जाता शेवटी, कॅशलेस सोसायटी तयार करण्याचा आणि डिजिटल इंडिया तयार करण्याचा हा प्रयत्न आहे.

500 आणि 1000 रुपयांमध्ये नोट्सचे प्रदर्शन करण्याच्या वर्तमान निर्णयाची पार्श्वभूमी आहे. सरकारने 8 नोव्हेंबर 2016 रोजी जाहीर होण्यापूर्वी या दिशेने काही पावले उचलली आहेत.

पहिले पाऊल म्हणून, सरकारने जन धन योजने अंतर्गत बँक खाती तयार करण्याचे आवाहन केले होते. त्यांनी सर्व पैसे त्यांच्या जन धन खात्यांमध्ये जमा करण्यास सांगितले आणि त्यांच्या बँकिंग पद्धतींद्वारे त्यांचे भविष्य व्यवहार केले.

दुसरा पायरी म्हणजे सरकारने पुढाकाराने उत्पन्नाची कर घोषित केली आणि 2016 च्या अंतिम मुदतीसाठी 30 ऑक्टोबरची अंतिम तारीख दिली. या पद्धतीद्वारे सरकार मोठ्या प्रमाणावर अनिर्णीत उत्पन्न वाढवू शकला.

तथापि, बरेच लोक अजूनही काळा पैसा जमा करतात आणि त्यांच्याशी व्यवहार करण्यासाठी होते; सरकारने 500 आणि 1000 नोट्सचे प्रदर्शन करण्याची घोषणा केली.

राक्षसीकरण धोरण देशातील आर्थिक सुधारण म्हणून पाहिले जात आहे परंतु या निर्णयासाठी त्याचे स्वत: चे गुण आणि दोष आहेत.

Demonitisation च्या गुणधर्म
राक्षसी धोरण भारत भ्रष्टाचारमुक्त होण्यास मदत करेल. लाच घेण्यामध्ये गुंतलेल्या भ्रष्ट प्रथा टाळल्या पाहिजेत कारण त्यांचे अकाउंट रोखे ठेवणे कठिण होते.

हे पाऊल सरकारला काळा पैसा ट्रॅक करण्यास मदत करेल. ज्यांचेकडे अकाउंट नसलेले रोख आहेत त्यांना आता कमाई दाखवणे आवश्यक आहे आणि कोणत्याही कायदेशीर आर्थिक व्यवहारासाठी पॅन सबमिट करणे आवश्यक आहे. कर भरल्या जाणार्या उत्पन्नासाठी सरकारला आयकर रिटर्न मिळू शकेल.

निष्कर्ष काढल्या गेलेल्या बेकायदेशीर क्रियाकलापांमुळे अयोग्य रोख प्रवाहामुळे हे पाऊल निधी थांबवते. उच्च किमतींवर बंदी आणण्यासाठी फौजदारी कारवाई जसे कि चलन दहशतवाद इ.

ब्लॅक मनी लॉंडरिंगसाठी उच्च मूल्यावरील पैसे देखील प्रतिबंधित केले जातील. आता अशा क्रियाकलापांवर सहजपणे अर्ज केला जाऊ शकतो आणि आयकर विभाग मनी लॉंडरिंग व्यवसायात असलेल्या लोकांना पकडू शकतो.

हे चरण नकली नोट्सचे संचलन थांबवते. जास्तीत जास्त बनावट चलन परिसंचरण मध्ये ठेवले जाते आणि 500 ​​आणि 1000 च्या नोट्सवरील बंदी बनावट नोट्सचे परिचालन समाप्त करेल.

या चरणात, पंतप्रधानांच्या जन धन योजने अंतर्गत जन धन खाते उघडणारे लोक यांच्यामध्ये रस निर्माण झाला आहे. आता ते या योजनेच्या अंतर्गत त्यांच्या रोख जमा करू शकतात आणि या पैशाचा वापर देशाच्या विकासाच्या कार्यासाठी केला जाऊ शकतो.

Demetization धोरणामुळे लोकांना आयकर परतावा भरण्यास भाग पाडेल. बहुतेक लोक, ज्यांनी आपली कमाई लपवून ठेवली आहे, आता त्यांची कमाई जाहीर करण्यासाठी आणि कर भरण्यासाठी पुढे येण्यास भाग पाडले गेले आहेत.

जरी 2.5 लाखांपर्यंतची ठेव रक्कम आयकर अंतर्गत समाविष्ट केली जाणार नाही तरी, 50,000 रुपयांपेक्षा जास्त रकमेवर व्यक्तींना पैसे जमा करावे लागतील. आयकर विभाग हा उच्च चलन चलन असलेल्या व्यक्तींचा मागोवा घेण्यास मदत करेल.

Essay on demonetisation in odia language

Demonetization of currency means discontinuity of the particular currency from circulation and replacing it with a new currency. In the current context it is the banning of the 500 and 1000 denomination currency notes as a legal tender.

The government’s stated objective behind the demonetization policy are as follows; first, it is an attempt to make India corruption free. Second it is done to curb black money, third to control escalating price rise, fourth to stop funds flow to illegal activity, fifth to make people accountable for every rupee they possess and pay income tax return. Finally, it is an attempt to make a cashless society and create a Digital India.

There is a background to the current decision of demonetization of 500 and 1000 rupee notes. The government has taken few steps in this direction much before its November 8, 2016 announcement.

As a first step the government had urged people to create bank accounts under Jan Dhan Yojana. They were asked to deposit all the money in their Jan Dhan accounts and do their future transaction through banking methods only.

The second step that the government initiated was a tax declaration of the income and had given October 30, 2016 deadline for this purpose. Through this method, the government was able to mop up a huge amount of undeclared income.

However, there were many who still hoarded the black money, and in order to tackle them; the government announced the demonetization of 500 and 1000 currency notes.

The demonetization policy is being seen as a financial reform in the country but this decision is fraught with its own merits and demerit

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