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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर कविता | Beti Bachao Beti Padhao Poetry In Hindi | Pdf Download

Beti Bachao Beti Padhao Poetry In Hindi

न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में बल्कि शिक्षित शहरी क्षेत्रों में भी सैकड़ों वर्षों में भारतीय परिवारों ने बालिकाओं के जन्म पर खुशी मनाई है। इसके शीर्ष पर, रूढ़िवादी परिवार कन्या भ्रूण हत्या के लिए जाते थे या बालिका को छोड़ देते थे, अगर वह पैदा होने के लिए होता था। बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना का उद्देश्य लड़कियों को सामाजिक और आर्थिक रूप से शिक्षा के माध्यम से स्वतंत्र करना है। सरकार के इस दृष्टिकोण से महिलाओं के लिए जागरूकता पैदा करने और कल्याणकारी सेवाओं के वितरण की दक्षता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

Beti bachao beti padhao poems in hindi

जब माँ हीं जग में न होगी
तो तुम जन्म किससे पाओगे ?……..
जब बहन न होगी घर के आंगन में
तो किससे रुठोगे, किसे मनाओगे ?………
जब दादी-नानी न होगी
तो तुम्हें कहानी कौन सुनाएगा ?…
जब कोई स्वप्न सुन्दरी हीं न होगी
तो तुम किससे ब्याह रचाओगे ?……
जब घर में बेटी हीं न होगी
तो तुम किस पर लाड लुटाओगे ?…..
जिस दुनिया में स्त्री हीं न होगी
उस दुनिया में तुम कैसे रह पाओगे ?……
जब तेरे घर में बहु हीं न होगी
तो कैसे वंश आगे बढ़ाओगे ?…..
नारी के बिन जग सूना है
तुम ये बात कब समझ पाओगे ?….

Beti bachao beti padhao par kavita

बदल रहा ये देश ये दुनिया, उत्तम समाज हमारा हो।
बात करें जो अनैतिक कोई, किसको यहाँ गवारा हो,
बदल रहा ये देश ये दुनिया, उत्तम समाज हमारा हो।
जो सच हूँ मैं लेकर आया, उसने मुझे सारी रात जगाया,
सिक्के के पहलू दो होते, धरती के इंसान ने सिखाया।
समझेगा ये बात वही, जिसने वो वक्त निहारा हो,
बदल रहा ये देश ये दुनिया, उत्तम समाज हमारा हो।
बेटी को बचाने की खातिर, चलते अब आन्दोलन हैं,
लेकिन कोई क्या जाने, भीतर से इनका क्या मन है,
बेटी का सम्मान सब चाहें, पर सोचे घर न हमारा हो,
बदल रहा ये देश ये दुनिया, उत्तम समाज हमारा हो।
दहेज़ कि आग में है जलती, देखो बेटी इक बाप की,
फिर भी इनको फर्क न पड़ता, न होती ग्लानि किये पाप की,
बहु चाहिये दौलत वाली, जमाई वो जो सहारा हो,
बदल रहा ये देश ये दुनिया, उत्तम समाज हमारा हो।

Poem in english

In my clear sky of my mind,
I was searching for a cloud to find,
There I saw a massive cloud across,
of the mission “beti bachao, beti padhao”.
So, I made my cloud to rain,
But that cloud gave me lots of pain,
I remember my mom in the memories,
Because she gave me no worries.
I thought of the girls starving to learn,
and collecting fee with lots of cuts and burns,
So, we gave them little education and,
They learned with the perfect dedication.
Three cheers for our prime minister,
because he did work like a mister,
thanks to him for starting the mission,
and with this he also started the nation.  

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पर छोटी कविता

Beti Bachao Beti Padhao Poetry

कहती है एक लड़की जमाने की ये कहानी
जन्म लड़की का मिला है यही है उसकी नादानी
सभी कहते है ये उससे तेरी मुस्कान बड़ी सुदंर
मगर ये रीत कैसी है वो बाहर हसँ नही सकती।
है वो सपनो की दुनिया मे है चाहत चाँद छूने की
जमाने की ये हरकतें है बेड़ी उसकी राह की
कुछ कहते हैं, लड़की है कहाँ जायेगी ये अकेली
कोई  कहता है दुनिया है नही बाहर निकलने की।
कोई कहता संभल चलना तू इज्जत है दो घरो की
घर वाले सभी कहते राजकुमारी है हमारी
कोई कहता के नाजुक सी कली मेरे घरौदे की
मगर ये है कली कैसी जो कभी  खिल नही सकती।

Long poem on beti bachao beti padhao in hindi

कहती है बेटी हमें निहार
मुझे चाहिए प्यार दुलार।
बेटियों को क्यों
प्यार नहीं करता संसार।
सोचिये सभी क्या बेटी बिना
बन सकता है घर परिवार।
बचपन से लेके जवानी तक
मुझ पर लटक रहा तलवार।
मेरे दर्द और वेदना का
कब होगा स्थाई उपचार।
बढ़ते पानी में मैं बह गई
कौन करेगा नदी के पार।
मैं बेटी माता भी मैं हूँ
मैं ही दुर्गा काली अवतार।
मेरे प्यार में सभी सुखी हैं
मेरे बिना धरती अंधियार।
बेटी की दर्द और वेदना का
कब होगा स्थाई उपचार।

Short poem on beti bachao beti padhao

नानी वाली कथा-कहानी, अब के जग में हुई पुरानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग में बेटा-बेटी,
सभी पढ़ेंगे, सभी बढ़ेंगे।
फौलादी ले नेक इरादे,
खुद अपना इतिहास गढ़ेंगे।
देश पढ़ेगा, देश बढ़ेगा, दौड़ेगी अब, तरुण जवानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटा शिक्षित, आधी शिक्षा,
बेटी शिक्षित पूरी शिक्षा।
हमने सोचा, मनन करो तुम,
सोचो समझो करो समीक्षा।
सारा जग शिक्षामय करना,हमने सोचा मन में ठानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
अब कोई ना अनपढ़ होगा,
सबके हाथों पुस्तक होगी।
ज्ञान-गंग की पावन धारा,
सबके आँगन तक पहुँचेगी।
पुस्तक और पैन की शक्ति,जगजाहिर जानी पहचानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।
बेटी-युग सम्मान-पर्व है,
ज्ञान-पर्व है, दान-पर्व है।
सब सबका सम्मान करे तो,
जीवन का उत्थान-पर्व है।
सोने की चिड़िया बोली है, बेटी-युग की हवा सुहानी।
बेटी-युग के नए दौर की, आओ लिख लें नई कहानी।

Poem in punjabi

ਮੇਰੇ ਮਨ ਦੇ ਸਾਫ਼ ਆਸਮਾਨ ਵਿੱਚ,
ਮੈਂ ਲੱਭਣ ਲਈ ਇੱਕ ਬੱਦਲ ਦੀ ਖੋਜ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ,
ਉੱਥੇ ਮੈਂ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ਾਲ ਬੱਦਲ ਭਰਿਆ ਵੇਖਿਆ.
ਮਿਸ਼ਨ “ਬੇਟੀ ਬਚਨੋ, ਬੇਟੀ ਪਾਧੋ” ਦੇ
ਇਸ ਲਈ, ਮੈਂ ਆਪਣਾ ਬੱਦਲ ਮੀਂਹ ਵਿੱਚ ਕੀਤਾ,
ਪਰ ਇਸ ਬੱਦਲ ਨੇ ਮੈਨੂੰ ਬਹੁਤ ਦੁੱਖ ਪਹੁੰਚਾਇਆ,
ਮੈਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਮੰਜ਼ਲਾਂ ਯਾਦਾਂ ਵਿਚ ਯਾਦ ਹੈ,
ਕਿਉਂਕਿ ਉਸਨੇ ਮੈਨੂੰ ਕੋਈ ਚਿੰਤਾ ਨਹੀਂ ਦਿੱਤੀ.
ਮੈਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਕੁੜੀਆਂ ਬਾਰੇ ਸੋਚਿਆ ਜੋ ਸਿੱਖਣ ਲਈ ਭੁੱਖੇ ਸਨ,
ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਕਟੌਤੀਆਂ ਅਤੇ ਬਰਨਿਆਂ ਨਾਲ ਫ਼ੀਸ ਇਕੱਤਰ ਕਰਨਾ,
ਇਸ ਲਈ, ਅਸੀਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਥੋੜ੍ਹਾ ਸਿੱਖਿਆ ਦਿੱਤੀ ਅਤੇ,
ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਪੂਰਨ ਸਮਰਪਣ ਤੋਂ ਸਿੱਖਿਆ.
ਸਾਡੇ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਲਈ ਤਿੰਨ ਚੀਅਰ,
ਕਿਉਂਕਿ ਉਸ ਨੇ ਇਕ ਮਿਸਟਰ ਦੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਕੰਮ ਕੀਤਾ,
ਮਿਸ਼ਨ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਧੰਨਵਾਦ,
ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਉਹ ਵੀ ਕੌਮ ਨੂੰ ਸ਼ੁਰੂ ਕੀਤਾ.

Poem in marathi

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माझ्या मनाच्या स्पष्ट आकाशात,
मी शोधण्याचा मेघ शोधत होतो
तिथे मी एक मोठा ढग पाहिला,
“बेटी बचाओ, बेटी पायधो” या मोहिमेची.
म्हणून मी ढगांचा पाऊस पाडला.
परंतु त्या मेघाने मला खूप वेदना दिली,
मला माझ्या आईला आठवणीत आठवते,
कारण तिने मला चिंता केली नाही.
मला शिकण्याची इच्छा असलेल्या मुलींबद्दल विचार केला,
आणि बरेचसे कट आणि बर्न करून शुल्क गोळा करणे,
म्हणून, आम्ही त्यांना लहान शिक्षण दिले आणि,
त्यांनी परिपूर्ण समर्पणाने शिकले.
आमच्या पंतप्रधानांसाठी तीन उत्साह,
कारण त्याने एका बहिणीसारखे काम केले आहे,
मिशन सुरू करण्यासाठी धन्यवाद,
आणि यासह त्याने राष्ट्र सुरू केला.

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