Hindi Lekh

अहोई अष्टमी व्रत विधि 2018 – व्रत कथा शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि – अहोई अष्टमी कहानी व आरती

अहोई अष्टमी २०१८: हिन्दू धर्म में हर एक व्रत की अलग अलग कथाए एवं महत्व होता है| यह व्रत भिन्न कारणों के कारण करा जाता है| इन व्रत का पौराणिक कथाओ में बहुत महत्व होता है| ऐसे ही अहोई अष्टमी एक पर्व है जो की हर वर्ष आश्विन मॉस की कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन आता है| इस दिन को बहुत से लोग कार्तिक कुष्ण अष्टमी के नाम से भी जानते है| इस दिन का हिन्दू पौराणिक गाथाओ में बहुत महत्व है| यह व्रत हिन्दू धर्म की सभी माताओ के द्वारा अपने पुत्रो की लम्बी आयु के लिए रक्खा जाता है|

Ahoi ashtami vrat katha – अहोई अष्टमी व्रत कथा

अहोई अष्टमी कब है: अहोई अष्टमी एक बहुत ही पावन दिन है जो की आश्विन मॉस की कृष्णपक्ष की अष्टमी के दिन आता है| यह दिन हर साल अक्टूबर या नवम्बर के महीने में आता है| इस वर्ष 2018 में यह पावन पर्व 31 अक्टूबर यानि कि बुधवार के दिन है| आइये अब हम आपको अहोई अष्टमी कथा, Ahoi Ashtami Calendar Images, अहोई अष्टमी व्रत कथा इन हिंदी, अहोई अष्टमी व्रत की कथा, हैप्पी अहोई अष्टमी, अहोई अष्टमी वृत कथा, अहोई अष्टमी व्रत कहानी, अहोई अष्टमी स्टोरी, अहोई अष्टमी फ़ास्ट, अहोई अष्टमी व्रत उद्यापन, अहोई अष्टमी माता की कथा, आदि की जानकारी देंगे| साथ ही आप Ahoi Ashtami Wishes in Hindi भी देख सकते हैं|

एक साहूकार के 7 बेटे थे और एक बेटी थी. साहुकार ने अपने सातों बेटों और एक बेटी की शादी कर दी थी. अब उसके घर में सात बेटों के साथ सातबहुंएं भी थीं.

साहुकार की बेटी दिवाली पर अपने ससुराल से मायके आई थी. दिवाली पर घर को लीपना था, इसलिए सारी बहुएं जंगल से मिट्टी लेने गईं. ये देखकरससुराल से मायके आई साहुकार की बेटी भी उनके साथ चल पड़ी.

साहूकार की बेटी जहां मिट्टी काट रही थी, उस स्थान पर स्याहु (साही) अपने साथ बेटों से साथ रहती थी. मिट्टी काटते हुए गलती से साहूकार की बेटीकी खुरपी के चोट से स्याहु का एक बच्चा मर गया. इस पर क्रोधित होकर स्याहु ने कहा कि मैं तुम्हारी कोख बांधूंगी.

स्याहु के वचन सुनकर साहूकार की बेटी अपनी सातों भाभियों से एक-एक कर विनती करती हैं कि वह उसके बदले अपनी कोख बंधवा लें. सबसे छोटीभाभी ननद के बदले अपनी कोख बंधवाने के लिए तैयार हो जाती है. इसके बाद छोटी भाभी के जो भी बच्चे होते हैं, वे सात दिन बाद मर जाते हैं सात पुत्रोंकी इस प्रकार मृत्यु होने के बाद उसने पंडित को बुलवाकर इसका कारण पूछा. पंडित ने सुरही गाय की सेवा करने की सलाह दी.

अहोई अष्टमी की कहानी

सुरही सेवा से प्रसन्न होती है और छोटी बहु से पूछती है कि तू किस लिए मेरी इतनी सेवा कर रही है और वह उससे क्या चाहती है? जो कुछ तेरीइच्छा हो वह मुझ से मांग ले. साहूकार की बहु ने कहा कि स्याहु माता ने मेरी कोख बांध दी है जिससे मेरे बच्चे नहीं बचते हैं. यदि आप मेरी कोख खुलवा देतो मैं आपका उपकार मानूंगी. गाय माता ने उसकी बात मान ली और उसे साथ लेकर सात समुद्र पार स्याहु माता के पास ले चली.

रास्ते में थक जाने पर दोनों आराम करने लगते हैं. अचानक साहूकार की छोटी बहू की नजर एक ओर जाती हैं, वह देखती है कि एक सांप गरूड़ पंखनीके बच्चे को डंसने जा रहा है और वह सांप को मार देती है. इतने में गरूड़ पंखनी वहां आ जाती है और खून बिखरा हुआ देखकर उसे लगता है कि छोटी बहूने उसके बच्चे को मार दिया है इस पर वह छोटी बहू को चोंच मारना शुरू कर देती है.

छोटी बहू इस पर कहती है कि उसने तो उसके बच्चे की जान बचाई है. गरूड़ पंखनी इस पर खुश होती है और सुरही सहित उन्हें स्याहु के पास पहुंचादेती है.

वहां छोटी बहू स्याहु की भी सेवा करती है. स्याहु छोटी बहू की सेवा से प्रसन्न होकर उसे सात पुत्र और सात बहू होने का आशीर्वाद देती है. स्याहु छोटीबहू को सात पुत्र और सात पुत्रवधुओं का आर्शीवाद देती है. और कहती है कि घर जाने पर तू अहोई माता का उद्यापन करना. सात सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देना. उसने घर लौट कर देखा तो उसके सात बेटे और सात बहुएं बेटी हुई मिली. वह ख़ुशी के मारे भाव-भिवोर हो गई. उसने सात अहोई बनाकर सातकड़ाही देकर उद्यापन किया.

Ahoi ashtami vrat vidhi – अहोई अष्टमी व्रत विधि

Ahoi ashtami vrat vidhi

अहोई अष्टमी पूजा विधि:

इस व्रत का बहुत महत्व है इसलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है की इस दिन अहोई माता की पूजा और उनके लिए व्रत की विधि एकदम सही तरह से करि जाए| इसके लिए आइये जाने श्री अहोई अष्टमी पूजन विधि के बारे में:

  • सबसे पहले प्रातकाल उठकर स्नान करे|
  • तत्पश्यात पूजा के समय ही यह संकल्प ले की ‘ हे अहोई माता मई यह व्रत अपने पुत्र की लम्बी आयु एवं अच्छे भविष्य की कामना के लिए कर रही हु’|
  • इस व्रत में माता पार्वती की भी पूजा करि जाती है क्योकि वे अनहोनी से बचाने वाली माता है|
  • अहोई माता की पूजा के अनुसार गेरू से अहोई माता का एक चित्र एवं स्याहु और उसके सात पुत्रो का भी चित्र दिवार पर बनाया जाता है|
  • इसके बाद माता के सामने एक कटोरी में चावल, सिंगाड़े एवं मूली राखी जाती है|
  • माता के सामने दिया रखे एवं कहानी सुनाए|
  • कहानी लहणे के समय हाथ में लिए चावलों को साडी एवं दुपट्टे में बाँध दे|
  • पूजा करने से पहले मिटटी के कर्वे में और लोटे में पानी भर कर रखते है|
  • यह सुनिश्चित कीजिये की करवा करवा चौथ के समय का होना चाहिए|
  • इसके बाद पूरे दिन व्रत रखने का संकल्प ले|
  • शाम के वक्त अहोई माता को चौदह पूरी या मठरी या काजू का भोग लगाए|
  • शाम को तारे निकल जाने पर चावल एवं जल तारो को अर्पित किया जाता है|

अहोई अष्टमी का शुभ मुहूर्त

इस पूजा में इस बात का आवश्यक ध्यान रखा जाता है की शाम की पूजा सही मुहरत में करि जाए| मुहरत किसी भी पूजा में एक अहम् कार्य है जो की पूजा को सफल बनाने में मदद करता है| अहोई अष्टमी की पूजा शुभ मुहरत में करने से पूजा का संकल्प सफल हो जाता है|

  • पूजा समय – सांय 17:45 से 19:02 तक ( 31 अक्तूबर 2018)
  • तारों के दिखने का समय – 18:12 बजे
  • चंद्रोदय – 00:06 (01 नवंबर 2018)
  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ – 11:09 बजे ( 31 अक्तूबर 2018)
  • अष्टमी तिथि समाप्त – 09:10 बजे ( 01 नवंबर 2018)

अहोई अष्टमी आरती

जय अहोई माता जय अहोई माता
तुमको निसदिन ध्यावत हरी विष्णु धाता

ब्रम्हाणी रुद्राणी कमला तू ही है जग दाता
जो कोई तुमको ध्यावत नित मंगल पाता

तू ही है पाताल बसंती तू ही है सुख दाता
कर्म प्रभाव प्रकाशक जगनिधि से त्राता

जिस घर थारो वास वही में गुण आता
कर न सके सोई कर ले मन नहीं घबराता

तुम बिन सुख न होवे पुत्र न कोई पता
खान पान का वैभव तुम बिन नहीं आता

शुभ गुण सुन्दर युक्ता क्षीर निधि जाता
रतन चतुर्दश तोंकू कोई नहीं पाता

श्री अहोई माँ की आरती जो कोई गाता
उर उमंग अति उपजे पाप उतर जाता

Leave a Comment