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हरेला कविता इन हिंदी – Poem on Harela in Hindi – हरेली पर कविता – Harela Kavita

हरेला पर्व 2018: हरेला कुमाऊं के शुभ त्यौहारों में से एक बरसात के मौसम, नई फसल और भगवान शिव की शादी की सालगिरह के स्मारक के लिए मनाया जाता है। हरेला जो सचमुच ‘हरे पत्ते’ का सुझाव देता है, हरियाली को भी संदर्भित किया जाता है| खासकर मानसून के मौसम के दौरान जब चावल के पेड़ चमकदार हरे पत्ते से भरे होते हैं। यह त्यौहार फसल के लिए मनाया जाता है। त्यौहार के दौरान, किसान एक अच्छी फसल और उत्सव में स्थानीय लोगों को अपनाने के लिए प्रार्थना करते हैं। लोग अपने रिश्तेदारों से मिलते हैं और बीजो को मचते है गरम हो जाने के बाद। आज के इस पोस्ट में हम आपको harela poem, harela festival poem, poem on Harela Festival in Hindi, हरेला पर कविता इन कुमाऊनी, हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, पहाड़ी आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के कविता प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है

हरेला पर्व पर कविता

अक्सर class 1, class 2, class 3, class 4, class 5, class 6, class 7, class 8, class 9, class 10, class 11, class 12 के बच्चो को कहा जाता है हरेला पर्व पर कविता लिखें| आइये देखें Happy Harela Wishes, poem on Harela, Happy Harela Pics, Harela parv kavita in hindi language आदि जिसे आप whatsapp, facebook व instagram पर अपने groups में share कर सकते हैं|

आओ आओ गा किसान आओ गा बनिहार।
जुरमिल के मनाबो संगी हरेली तिहार।

कूद-कूद के मानेन अब तक होरी देवारी
एको कनिक करिस नइ हिनहर के चि न्हारी
चेतो अब छोड़ो जी पहिली के व्य वहार।

तेल डार के दीया बारेन हमरे तेल निकालिस
पीरा ल हरे के बल्दा ऐक्ल्हस हे निखालिस
मांगेन जगमग उजियार उल्टा बांटिस अंधियार।

होले ल जलाये बर जलायेन जम्मों डोंगरी
अब काला जलान भागगे जांघ असन मोंगरी
नैया ल डूबोये हन हमी डंडवार।

हार नइ मानन कभू हरिय र मन हे
हरिय र हरिय र भुइयां हवय हरिय र पटवा सन हे
हरिय र कोदो धान त काबर होही हाहाकार।

हरेली तिहार आय किसान मन के भारी
खैरकाडांड़ मं जाथे सब झन धरके थारी
गाय गरू ल लोंदी देके करथे नमस्कार।

दसमुन अउ डोंडों कांदा राउत डोंगरी ले लाथे
हाड़ी मं उसन के पानी गरूवा ल पीयाथे
कांदा कुसा देखके मुंह ले गिरे ल धरथे लार।

हरेला कविता इन हिंदी

हरेला पर कविता

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हरेली निराली झूमत-नाचत आय हरियाली
लाए संग म ये खुशहाली,
आए हे गेड़ी म चढ़के
दिखे देवी-देवता मन सरग के।
धरे ठेठरी, खुरमी भरे थाली।
झम-झम फूल बरसाए बादल
संभर गे जम्मो मोटियारी,
मुसकुरावय गरीब किसान
नागर बैला के करत सम्मान
रंधनी ले मुसकावय घरवाली।
सब डाहर खुशी मस्ती छागे
नदिया, नरवा घलो बौरागे
कूके लगिस कोयलिया कारी।
मन के बात मन म झन राखव
दया-मया बांटव खुशी ल बांटव
रोज बन जाही हरेली निराली।

आय हे हरेली आय हे हरेली,
सुनव संगी अऊ नँघरिया
जाबो अमरईया गाबो ददरिया,
चलव चलव जँहूरिया।

गेंड़ी मा चड़बो रस्ता गड़बो,
आनी बानी पेड़ लगाबो,
खो-खो खेलबो झुलना झुलबो,
पूरखा के रीत बचाबो
आगे हे बेरा नईहे अगोरा
मेहनत करबो हलधरिया
जाबो अमरईया

बड़े भिनसरहा धनहा डोली मा,
गुड़हा चिला गड़ाबो,
नागर बिंधना टंगिया ला धोके
ठाकुर देव ला मनाबो,
सुमर सुमरनी देवी देवता के
झूमर बरसाही बदरिया
जाबो अमरईया

रिमझिम रिमझिम बरसे पानी
नदिया सुग्घर बोहागे,
उमगे देखव डबरा ढोंड़गा
कुंवा घलो हा भरागे,
छलकत हावय मुंही पार हा
लहरा मारत हे तरिया

Harela Poem in English

Poem on Harela in Hindi

Hariyali varely false-danced income hariyali
In prosperity,
Come on in the cottage
Looked like the Goddess of Goddess Sarang
The trunk, the trunky plate
Jham-zam flower rain clouds
Sobhaar gay jammo motyari,
Muskurai poor farmer
Respect of doing the work of Nagar Bala
Randhani Le Muskayee Gharwali
All die happy joy
Nadia, Narva Ghalu bureage
Kuke Lagis Kollia Kari
Keeping the mind in mind in mind
Mercy-love is happiness
Everyday it is very different

Harela Poem in Hindi

सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो
सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो

धरती सबो हरियागे
घटा बादल करियागे
पुरवईया निक लागे हो~

सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो

रही रही के मंदार कस, बाजत अगास मा
खेती खार छ्लछलावय, रिमझिम बरसात मा
~
रही रही के मंदार कस, बाजत अगास मा
खेती खार छ्लछलावय, रिमझिम बरसात मा
तरिया ताल लबलबावय, नरवा नदिया डबडबावय
पुरवईया निक लागे हो~
पुरवईया निक लागे हो~

सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो

झुलवा बंधागे पीपर आमा के थांग मा
आगे हरेली मजा लागय झूमर नाच मा
~
झुलवा बंधागे, पीपर आमा के थांग मा
आगे हरेली, मजा लागय झूमर नाच मा
जुड़ जुड़ ह सिपा मारय, घूर घूर ह हिया कांपय
पुरवईया निक लागे हो~
पुरवईया निक लागे हो~

सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो

झड़ी बादर सिटिर पिटिर, डर डरावन रात हे
घेरी बेरी तोर सुरता, जीवरा तरसात हे
~
झड़ी बादर सिटिर पिटिर, डर डरावन रात हे
घेरी बेरी तोर सुरता, जीवरा तरसात हे
बूंदा बांदी टपटपावय, झिंगुरा हर गीत गावय
पुरवईया निक लागे हो~
पुरवईया निक लागे हो~

सावन आगे आबे आबे आबे आबे संगी हो

धरती सबो हरियागे
घटा बादल करियागे
पुरवईया निक लागे हो~
पुरवईया निक लागे हो~
पुरवईया निक लागे हो~

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