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हरियाणा दिवस पर कविता 2018 – Haryana Day Poem in Hindi – Haryana Diwas Kavita

हरियाणा दिवस 2018: हरियाणा दिवस उस दिन मनाया जाता जब 1966 में पंजाब में से इसको अलग किया गया था | यह दिन 1 नवंबर को हरियाणा में बड़े ही उत्साह और हर्ष से मनाया जाता है | इस दिन चंडीगढ़ से पचकुला शहर में रैली निकली जातीं हैं और अलग-अलग जगह रक्त-दान शिविर भी लगाए जाते हैं | इस हरियाणा के सभी राज्य परिसरों और इमारतों को सजाया जाता है | इस दिन विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिता आयोजित कीजातीं हैं और लोग उत्साहपूर्वक उनमे भाग भी लेते हैं | ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

हरियाणा दिवस कविता

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लुगाईयाँ का घाघरा
खिचड़ी का बाजरा
सिरसम का साग
सर पै पाग
आँगण मै ऊखल
कूण मै मूसल
ढूंढते रह जाओगे!
घरां मै लस्सी
लत्ते टाँगण की रस्सी
आग चूल्हे की
संटी दुल्हे की
कोरडा होली का
नाल मौली का
पहलवानां का लंगोट
हनुमानजी का रोट
ढूंढते रह जाओगे!

घूंघट आली लुगाई
गाँम मै दाई
लालटेण का चानणा
बनछटीयाँ का बालणा
बधाई की भेल्ली
गाम मै हेल्ली
घरां मै बुड्ढे
बैठकाँ मै मुड्ढे
ढूंढते रह जाओगे!

बास्सी रोटी अर अचार
गली मै घूमते लुहार
खांड का कसार
टींट का अचार
काँसी की थाली
डांगरां के पाली
बीजणा नौ डांडी का
दूध दही घी हांडी का
रसोई मै दरात
बालकां की दवात
ढूंढते रह जाओगे!

बटेऊआँ की शान
बहुआं की आन
पील गर्मियां मैं
गूँद सर्दियाँ मैं
ताऊ का हुक्का
ब्याह का रुक्का
बोरला नानी का
गंडासा सान्नी का
कातक का नहाण
मूंज के बाण
ढूंढते रह जाओगे!

चूल आली जोड़ी [किवाड़] गिनती मै कौड़ी
कोथली साम्मण की
रौनक दाम्मण की
पाटड़े पै नहाणा
पत्तल पै खाणा
छात्याँ मै खडंजे अर कड़ी
गुग्गा पीर की छड़ी
ढूँढते रह जाओगे!

लूणी घी की डली
गवार की फली
पाणी भरे देग
बाहण-बेटियां के नेग
ढूंढते रह जाओगे!

मोटे सूत की धोत्ती
घी बूरा अर रोटी
पीले चावलाँ का न्यौता
सात पोतियाँ पै पोत्ता
धौण धड़ी के बाट
मूँज – जेवड़ी की खाट
घी का माट
भुन्दे होए टाट
गुल्ली – डंडे का खेल
गुड की सेळ
ब्याह के बनवारे
सुहागी मैं छुहारे
ताँगे की सवारी
दूध की हारी
पेचदार पगड़ी
घोट्टे आली चुन्दडी
सर पै भरोट्टी
कमर पै चोट्टी
ढूढ़ते रह जाओगे!

कासण मांजन का जूणा
साधूआँ का बलदा धुणा
गुग्गे का गुलगला
बालक चुलबला
बोरले आली ताई
सूत की कताई
मुल्तानी अर गेरू
बलध अर रेहडू
कमोई अर करवे
चा – पाणी के बरवे
ब्याह मै खोड़िया
बालकां का पोड़िया
ढूंढते रह जाओगे!

हटड़ी अर आला
बुडकलाँ की माला
दूध पै मलाई
लोगाँ कै समाई
खेताँ मै कोल्हू
नामाँ मै गोल्हू
ढूंढते रह जाओगे!

गुड़ की सुहाली
खेताँ मै हाली
हारे की सिलगती आग
ब्याह मै पेठे का साग
हाथ का बँटा बाण
सरगुन्दी आली नाण
हाथ मै झोला
खीर का कचोला
ड्योढ़ी की सोड
बंदडे का मोड़ [सेहरा] खेत में बैठ के खाना,
डोल्ला का सिरहाना,
लावणी करती लुगाईया,
पानी प्याती पनहारिया,
डेला नीचे खाट,
भाटा के बाट,
ढूंढते रह जाओगे!

सिर मैं भौरी
अणपढ़ छौरी
चरमक चूँ की जूती
दुध प्यांण की तूती
मावस की खीर
पहंडे का नीर
गर्मियां मैं राबड़ी
खेताँ मैं छाबड़ी
घरां मैं पौली
कोरडे की होली
चणे के साग की कढी
चाबी तैं चालदी घडी
काबुआ कांसी का
काढ़ा खांसी का
काजल कौंचे की
शुद्धताई चौंके की
गुलगला बरसात का
चूरमा सकरात का
सीठणे लुगाइयाँ के
नखरे हलवाईयाँ के
भजनी अर ढोलक
माट्टी के गुल्लक
ढूंढते रह जाओगे!!

Haryana diwas kavita

यह हरियाणा दिवस पर कविता, haryana day poems, हरयाणा डे पोएम इन हिंदी, जानकारी किसी भी भाषा जैसे Hindi, हिंदी फॉण्ट, मराठी, गुजराती, Urdu, उर्दू, English, sanskrit, Tamil, Telugu, Marathi, Punjabi, Gujarati, Malayalam, Nepali, Kannada के Language व Font में साल 2007, 2008, 2009, 2010, 2011, 2012, 2013, 2014, 2015, 2016, 2017 का full collection जिसे आप अपने स्कूल व सोशल नेटवर्किंग साइट्स जैसे whatsapp, facebook (fb) व instagram पर share कर सकते हैं|

एक बख़त था, गाम नै माणस, राम बताया करते।
आपस म्हं था मेलजोल, सुख-दुख बतलाया करते।
माड़ी करता कार कोई तो, सब धमकाया करते।
ब्याह-ठीच्चे अर खेत-क्यार म्हं, हाथ बटाया करते।
इब बैरी होग्ये भाई-भाई, रोवै न्यूं महतारी।
पहलम आले गाम रहे ना, बात सुणो या म्हारी॥

Haryana diwas kavita

एक बख़त था साझे म्हं सब, मौज उड़ाया करते।
सुख-दुख के म्हां साझी रहकै, हाथ बटाया करते।
घर-कुणबे का एक्का पहलम, न्यूं समझाया करते।
खेत-क्यार अर ब्याह्-ठीच्चे पै आग्गै पाया करते।
रल़मिल कै वै गाया करते-रंग चाव के गीत दिखे।
इब कुणबे पाट्ये न्यारे-सारे, नहीं रह्यी वै रीत दिखे॥

एक बख़त म्हारी नानी-दादी, कथा सुणाया करती।
बात के बत्तके कडक़े कुत्तके ठोक जंचाया करती।
होंकारे भरते बालक-चीलक, ग्यान बढ़ाया करती।
संस्कार की घुट्टी नित बातां म्हं प्याया करती।
कहाणी म्हं सार सिखाया करती-ला छाती कै टाब्बर।
इब नानी-दादी बण बैठ्ये ये टीवी अर कम्यूटर॥

एक बख़त था पीपल नै सब, सीस नवाया करते।
तिरवेणी म्हं बड़-पीपल अर नीम लगाया करते।
ऊठ सबेरै नित पीपल़ म्हं नीर चढ़ाया करते।
हो पीपल-पूज्जा, लिछमी-पूज्जा बड़े बताया करते।
गीता-ज्ञान सुणाया करते-जब पीपल़ बणे मुरारी।
इब कलयुग म्हं पीपल़ पै भी चाल्लण लागी आरी॥

Poem on haryana day in haryanvi

Dessa Maa Des Haryana
Yaha Dhoodh Dahi Ka Khana
Pehalwaan Hai Naujawan Yaha Ke
Dhari Ughle Sona Iski
Bhara Pada Hai Sara Khazana!
Tarakki Ki Hai Raah Pe Chal Raha
Mera Pardesh Nyaara
Shiksha Ka Hai Vikas Yahaan Pe
Hai Number One Haryana

Haryana diwas poem

कड़ै गऐ बचपन के मित्र,

पाटी कच्छी टुटे लित्र ।

भैसैया गेल्यां गऐ जोहड पै,

काढ़ी कच्छी बडगे भित्तर ।

माचिस के ताश बणाया करदे,

नहर पै खेलण जाया करदे ।

घर तै लुकमा बेच कै दाणे,

खा गे खुरमे खिल मखाणे ।

मिश्री तै मिठे होया करदे,

खिल्लां तै फ़िक्के होगे….

वे यार पुराणे रै…

बेरा ना कित्त खोगे।

पकड लिये फेर स्कूल के रस्ते,

हाथ मै तख्ती काँख मैं बस्ते ।

गरमी गई फेर आ गया पाला,

एक दिन नहा लिऐ एक दिन टाला ।

पैंट ओर बुरसट मिलगी ताजी,

एक दो दिन गए राजी राजी ।

हाथ जोड फेर रोवण लागे,

आज आज घर पै रहण दैयो मां जी ।

आखयां मै आंसु आए ना…

हाम्म थुक लगा कै रोगे ।

वे यार पुराणे रै…

बेरा ना कित्त खोगे ।

कॉलेज मै फेर होग्या एडमिशन,

बाहर जाण की थी परमिशन ।

रोडवेज मै जाया करदे,

नकली पास कटाया करदे ।

बीस रुप्पली करकै कट्ठी,

ले लिया करदे चा और मट्ठी ।

स्पलैंडर पै मारे गेडे,

सैट करली थी दो दो पट्ठी ।

मास्टर पाठ पठाया करदा,

आंख मिच कै सोगे ।

वे यार पुराणे रै…

बेरा ना कित्त खौगे ।

वक्त गेल गऐ बदल नजारे,

बिखर गऐ सब न्यारे न्यारे ।

घरां पडया;कोए करै नौकरी,

घरक्यां नै करी पसंद छोकरी ।

शादी करली बणगे पापा,

कापी छोडी लिया लफाफा ।

रोऐ जा सै दिल मरज्याणा,

भुल गऐ क्यु टैम पुराणा ।

“saare balak” याद करै..

क्यु बीज बिघन के बो गे रै ।

वे यार पुराणे रै,

बेरा ना कित्त खोगे….

Haryana day poem in hindi

प्यारे थे बचपन के साथी
एक तै बढकै एक हिमाती
चिजै खाण नै सारे डाकी
धोरै रूपली किसे कै नै पाती

दैख कै बांदर फैंकते चिजै
दिखा ठोसा फेर काढते खिजै
कैट्ठे होकै घणे खेले खेल
पकङ कै बुर्सट बना दी रेल

गली म्हं खेले तै पकङम पकङाई
प्लाट लुह्क गै तै लुह्कम छिपाई
छुट्टी के दिन ना कदे भी न्हाये
जोहङ पै जा कै घरघुल्ले बनाये

ढूँढ कै माचिस बणादें तांश
संग खेलते फिर मित्र खास
मार किलकारी नाच्चे हम झङ म्हं
मोरणी भी देखी ब्याई एक बङ म्हं

कागज की नाव बणाया करदे
बारीश के पाणी म्हं बहाया करदे
बारीश होण तै पागे पिसे
चिजै खा कै फेर लेगे जिसे

बणाके पिल्लू खेली गोली
हारते दिखै तै खा गे रोली
गिट्टे, बिज्जो खेलां करै थी छोरी
कोए थी श्याणी तै कोए घणी गौरी

ओढ पहर वै गिरकाया करती
झुका कै गर्दन शरमाया करती
मैडम नै देख घणी ए डरती
हर त्यौहार पै रह थी बरती

जोहङ पै नहा कै आया करते
बैठक म्हं तांश बजाया करते
खेल खेल म्हं कर लेते लङाई
प्यारे दोस्त पै खा लेते पिटाई

सरकंडा के बणाये थे तुक्के
गुलेल तै निशाना कोए ना चुक्के
साथिया गैल गए जोहङ पै
शर्त लगा ली थी पहलै मोङ पै

बङ पै चढकै मारी ढाक
मुध्धे पङकै फुङाली नाक
कदे पजामा तै कदे पहरी पैंट
फैसगी शिशी तै ला लिया सैंट

क्लास म्ह बठै पकङ कोणा
खा के डंडे फेर आव था रोणा
पिछै बठकै कै स्याही फैकाणा
टकले दोस्त का तबला बजाणा

दोस्तों के संग करकै अंगघाई
खूब मास्टर की नकल कढाई
खेले खाये भई तीज सिन्धारे
दो चार छोड कै सब देखे बनवारे

नानी कै घर पै जाया करते
खीर चुरमा खुब खाया करते
बासी खाते थे खीचङी और दलिया
माँ घाल्या करै थी निखङू का पलिया

ईब ना रह रह्या यो टेम पुराणा
दादी माँ का नित लोरीयाँ सुणाणा
सांवङीया नै था याद दिलाणा
बचपन बैरी नै ना मुङके आणा

 

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