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सरदार पटेल पर कविता 2018 – Sardar Vallabhbhai Patel Poem in Hindi – Sardar Patel par Kavita

सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती २०१८: सरदार वल्ल्भ भाई पटेल को लोग लौह पुरुष के नाम से भी जानते हैं | सरदार पटेल ने भारत के लिए बहुत योगदान दिए थे | लौह-पुरुष कहलाये जाने वाले सरदार वल्ल्भ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर को गुजरात के एक किसान परिवार में हुआ था | उनके पिता का नाम झवेरभाई पटेल और माता का नाम लाडबा देवी था | आज के इस पोस्ट में हम आपको sardar vallabhbhai patel par kavita in hindi, सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविताएं व sardar vallabhai patel poem in hindi आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल में सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती के लिए प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Sardar vallabhbhai patel par kavita

खेड़ा संघर्ष के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार पटेल का पहला और बड़ा योगदान रहा था | भारत की आजादी के बाद वह पहले उप-प्रधानमंत्री और गृहमन्त्री बने थे | भारत के एकीकरण में उनके द्वारा दिए गए योगदानों के लिए उन्हें लौह-पुरुष के नाम से जाना जाता है | वह एक स्वतंत्रता सेनानी थे |

हर वर्ष, राष्ट्रीय त्योहारों के अवसर पर,

दूरदर्शन आकाशवाणी से,

प्रथम प्रधान मंत्री नेहरू का,

गुणगान सुन –

मैं भी चाहता हूं,

उनकी जयकार करूं,

राष्ट्र पर उनके उपकार,

मैं भी स्वीकार करूं।

लेकिन याद आता है तत्क्षण,

मां का विभाजन,

तिब्बत समर्पण,

चीनी अपमान,

कश्मीर का तर्पण –

भृकुटि तन जाती है,

मुट्ठी भिंच जाती है।

विद्यालय के भोले बच्चे,

हाथों में कागज का तिरंगा ले,

डोल रहे,

इन्दिरा गांधी की जय बोल रहे।

मैं फिर चाहता हूं,

उस पाक मान मर्दिनी का

स्मरण कर,

प्रशस्ति गान गाऊं।

पर तभी याद आता है –

पिचहत्तर का आपात्‌काल,

स्वतंत्र भारत में

फिर हुआ था एक बार,

परतंत्रता का भान।

याद कर तानाशाही,

जीभ तालू से चिपक जाती है,

सांस जहां कि तहां रुक जाती है।

युवा शक्ति की जयघोष के साथ,

नारे लग रहे –

राहुल नेतृत्व लो,

सोनिया जी ज़िन्दाबाद;

राजीव जी अमर रहें।

चाहता हूं,

अपने हम उम्र पूर्व प्रधान मंत्री को,

स्मरण कर गौरवान्वित हो जाऊं,

भीड़ में, मैं भी खो जाऊं।

तभी तिरंगे की सलामी में

सुनाई पड़ती है गर्जना,

बोफोर्स के तोप की,

चर्चा २-जी घोटाले की।

चाल रुक जाती है,

गर्दन झुक जाती है।

आकाशवाणी, दूरदर्शन,

सिग्नल को सीले हैं,

पता नहीं –

किस-किस से मिले हैं।

दो स्कूली बच्चे चर्चा में मगन हैं,

सरदार पटेल कोई नेता थे,

या कि अभिनेता थे?

मैं भी सोचता हूं –

उनका कोई एक दुर्गुण याद कर,

दृष्टि को फेर लूं,

होठों को सी लूं।

पर यह क्या?

कलियुग के योग्य,

इस छोटे प्रयास में,

लौह पुरुष की प्रतिमा,

ऊंची,

और ऊंची हुई जाती है।

आंखें आकाश में टिक जाती हैं –

पर ऊंचाई माप नहीं पाती हैं।

सरदार वल्लभ भाई पटेल पर कविता

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देश भक्ति थी जिसके रग में.
सबल बने, भारत इस जग में.
एकीकरण के स्वप्न को जिसने.
यथार्थ में बदल दिया, भुजबल से.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है !!

नडियाद के वीर, भारतरत्न.
बारडोली सत्याग्रह के सरदार.
जिसके समक्ष हरा निज़ाम.
जिसके समक्ष हरा निज़ाम.
आताताइयों का झूठा स्वाभिमान.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है !!

कर्मवीर, धर्मवीर, कूटनीति.
निर्भीक,सरल, सहेज वेशभूषा.
दूरदर्शिता, मानवता के हिमायती.
अहिंसा,क्रांति, आज़ादी के सेनानी.
भारत के सरदार देश के लाल
शत- शत नमन तुम्हे है |

Poem on sardar vallabhbhai patel in hindi

लोह पुरुष की ऐसी छवि
ना देखी, ना सोची कभी
आवाज में सिंह सी दहाड़ थी
ह्रदय में कोमलता की पुकार थी
एकता का स्वरूप जो इसने रचा
देश का मानचित्र पल भर में बदला
गरीबो का सरदार था वो
दुश्मनों के लिए लोहा था वो
आंधी की तरह बहता गया
ज्वालामुखी सा धधकता गया
बनकर गाँधी का अहिंसा का शस्त्र
महकता गया विश्व में जैसे कोई ब्रहास्त्र
इतिहास के गलियारे खोजते हैं जिसे
ऐसे सरदार पटेल अब ना मिलते पुरे विश्व में

Poem on sardar vallabhbhai patel in hindi

Lohe se tha jiska tan,
desh prem me dooba mann.

Dekh ke jisko dushman kaanpe,
dahaad thi jaise ho koi sher,
naam tha unka Vallabh bhai patel.

Unhone toda angrejo ka abhimaan,
Sbne ‘Sardaar’ lagakar kiya samman.

har aandolan me wo the sath,
maan gaye dushman nahi banegi ab baat.

Bharat ke up’pradhan mantri ye the,
nahi mante kbhi haar ye the,
desh ke liye hathiyaar ye the

veer jawano sa unme tha dum,
ye nahi the kisi se kum.

naam ye apna amar kr d gye,
karmo se apne ek misaal kayam kr gye

Sardar vallabhbhai patel poem in english

Thou worked for it with divine dedication.

Epitome of strength, whose invincibility did bend

The intractability of adamant rulers who refused to blend

Their provinces with newly independent India of our dreams;

Marched he resolutely onward with a decisive team

Of dedicated warriors, at whose sight the monarchs
shuddered,

Agreed they to abandon their titles and crowns and uttered

Consent with millions of groans; uniting fragmented India
into one

Big nation, Sardar Patel wove, knitted, seamed and spun

The united India’s destiny with his own hands;

Let’s sing praises to him with thunderous bands

Short poem on sardar vallabhbhai patel in hindi

वह सरदार पटेल चाहिये,
जो किसानो के हक की बात करें,
इनके दुःख-दर्द मिटाने के लिए लड़े,
जिसकी ईमानदारी और विनम्रता की बातें सब करें.

वह सरदार पटेल चाहिए,
जो अपनी आखों को क्रोध से लाल करें,
अन्याय के खिलाफ़ मजबूत हाथों से लड़े,
जिसकी आवाज से दुश्मन भी काप उठे.

वह सरदार पटेल चाहिए,
जो भारत को एकता का पाठ पढाये,
हर मजहबों को गले मिलने का सबक सिखाये,
जो हर वक्त सच के साथ खड़ा रहकर दिखाये.

वह सरदार पटेल चाहिए,
जो देश के लिए कुर्बान हो,
जिसका हृदय विशाल हो,
आने वाली पीढ़ियों के लिए मिशाल हो

Sardar vallabhbhai patel poem in gujarati

ખેડા જીલ્લો ખમીરવંતો ને ગૌરવવંતી છે ગુજરાત
ઝવેરભાઈ ને ઘેર જન્મ્યા છે બળુકા બંધુ બે ભ્રાત.

જન્મ્યા છે એ નડીયાદ મોસાળે

વિઠ્ઠલ અને વલ્લભ એવા નામે.

પ્રાથમિક શિક્ષણની લીધી છે શિક્ષા કરમસદ ગામે

માધ્યમિક શિક્ષણ મેળવ્યું છે ભાઈ પેટલાદ મુકામે

ઉચ્ચ શિક્ષણ માટે દીધો છે ડંકો,

વિલાયત જવાનો નિર્ધાર પાકો.

બેરિસ્ટર બની ને જબરી એમણે તો કરી છે વકીલાત,

હિન્દુસ્તાન આવી ગરીબોના બેલી બન્યા છે સાક્ષાત.

ગાંધી બાપુ કેરા સંપર્કે આવ્યા

પરદેશી પોશાક ને પણ તાગ્યા

બોરસદમાં જજિયા વેરો ખેડામાં પ્લેગની મહામારી

લડતો માંડી સરકાર સામે સેવાના બન્યા ભેખધારી .

દાંડી યાત્રામાં જ ચેતના જગાવી

રાસમાં વલ્લભ વડે ધૂણી ધખાવી.

ખેડૂતોના મહેસુલ વધારી ઘર જમીનની જપ્તી ચલાવી

સરદાર પોકારે બારડોલી જાગ્યું સરકાર પણ ડોલાવી.

માફ થયું મહેસુલને સરકાર ગઈ હારી

કેવી રંગત લાવી સરદારની સરદારી.

હિન્દ છોડોની લડત લડ્યા ગાંધી સાથે ખભે ખભો મિલાવી,

રાત દિવસ પરવા ના કરી ને રહ્યા જેલમાં દિવસો વિતાવી.

આઝાદીની ઉષાએ ઉગ્યો આનંદ ને ઉમંગ

પ્રજાએ સહુને વધાવ્યા સરદાર કેરા સંગ .

છસો રજવાડા એક જ કર્યાને ગુથી છે ભારત ભાગ્યની માળા

આઝાદી મળી ભવ્ય ભારત ભૂમિને અંગ્રેજોએ ભર્યા છે ઉચાળા

એકતા અખંડીતત્તા કેરી હાંક જ વાગી

જુનાગઢ જાગ્યું ને હૈદરાબાદ ગયું હાલી.

અમુલ કેરો મંત્ર જ આપ્યો ને પોલસનને કર્યો છે પડકાર

શ્વેત ક્રાંતિ કેરા બીજ રોપ્યા ને ખેડૂતોને કર્યા ખબરદાર

ગરીબ જનતાનો બન્યા સાચા હમદર્દી

જગમાં ગાજી સાચા જન સેવકની કીર્તિ

સોમનાથ મંદિરે કરી અડગ પ્રતિજ્ઞા જીર્ણોધ્ધાર કેરી

શુરવીર સરદારે એક અંજલી જળ લઇ કરી એને પૂરી

કાશ્મીર કેરું કોકડું આજે પણ ગુંચાવે

વારે ઘડીએ સરદાર કેરી યાદ અપાવે

રાજઘાટ શાંતિઘાટ વિજયઘાટ ને ઘાટ ઘાટ કેરી હારમાળા

એકતાના પ્રહરી સરદાર કેરી જપે ભારતીય જન જન મનમાળા

કદી ના વિસરાશે અમ સરદાર પ્યારા.

જન જન કેરા મનમાં વસે સરદાર હમારા.

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