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मतदाता जागरूकता निबंध 2018 – मतदान पर निबंध – Essay on Voter Awareness in Hindi Pdf Download

हम सब एक स्वतंत्र देश के नागरिक हैं | वसे तो हमे हमारी लोकतान्त्रिक प्रणाली के तहत अनेक अधिकार दिए हुए हैं, जिनमे से एक अधिकार मत(वोट) देने का भी है और यह बाकी सभी अधिकारों से बड़ा है | इसी के जरिये हम मतदान कर मतदाता कहलाते हैं | एक अकेला व्यक्ति मतदान के जरिये सरकार गिरा भी सकता और उसे बनाने का भी दम रखता है | हमे अपने देश के लिए हमेशा निष्पक्ष होकर मतदान करना चाहिए और दूसरों को भी यही करने की सलाह देनी चाहिए | इस जानकारी को इन हिंदी, मराठी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के मतदाता जागरूकता निबंध competition, निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

मतदान का महत्व पर निबंध

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भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहाँ पर जनता का शासन चलता है। मतदान एक ऐसी प्रिक्रिया है जिससे व्यक्ति अपने विचारों की दुसरों से सहमति और असहमति दिखा सकता है। चुनाव से पहले बहुत से चुनाव लड़ने वाले व्यक्ति विभिन्न अजेंडे हमारो सम्मुख रखते है और लोग मतदान यानि कि वोटिंग के माध्यम से उनमें से किसी एक को सांसद का सदस्य बनाते हैं। वहीं व्यक्ति जीत हासिल करता है जिससे सबसो ज्यादा मतदान प्राप्त होता है यानि कि लोगों का मत और उनके विचार सबसे ज्यादा उससे मिलते हैं और लोग उनकी बातों से संतुष्ट है।

मतदान एकमात्र ऐसा साधन है जिससे देश की जनता स्वयं अपने देश का विकास निर्धारित कर सकती है। मत देने की शक्ति से वह अपने देश की बागदौड़ संभालने के लिए उनकी नजर में योग्य व्यक्ति को खुद चुन सकते हैं। भारत एक ऐसा देश है जो लोगों को अपने देश के लिए फैसले लेने की पूर्ण आजादी देता है। हर व्यक्ति को मतदान जरूर करना चाहिए क्योंकि हर एक मत कीमती है। एक मत भी देश के लिए गलत सरकार को चुनने से रोक सकता है। मतदान से ही सरकार को पता चलता है कि देश कि जनता उनसे संतुष्ट है या नहीं क्योंकि जनता संतुष्ट होगी तो हर बार वहीं सरकार आएगी।

मतदान पर निबंध

मतदान जाति या धर्म के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। पहले सभी का अजेंडा पढ़ कर देश के हित के लिए उपयोगी देखकर ही अपना मत डाले। मतदान हमारा अधिकार है और मतदान करना हमारा कर्तव्य है।चुनाव में खड़े प्रतिनिधियों को भी चाहिए कि वो भी मतदाता को भ्रष्ट करके मतदान की प्रिक्रिया को भ्रष्ट न करें। मतदान की प्रिक्रिया को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। युवा को तो निश्चित रूप से ही मतदान करना चाहिए क्योंकि युवा देश की नींव होते है और वह अच्छी परख भी रखते है। युवा देश के लिए एक अच्छा उम्मीदवार चुन सकता है। मतदान को अनिवार्य किया गया है ताकि सभी लोग पक्का ही मतदान करें।

मतदाता को निडर होकर मतदान करना चाहिए । मतदाता चुनाव में एक नायक होता है।सरकार ने लोगों को मतदान के प्रति जागरूक करने और मतदान का महत्व बताने के लिए मतदान अभियान भी चलाया गया है। मतदान को करना राष्ट्र के लिए आवश्यक और हितकारी है। हर व्यक्ति को मतदान करना ही चाहिए क्योंकि वो हमारा अधिकार है और देश के लिए उम्मीदवार चुनने के लिए सहायक है।

मतदाता जागरूकता पर निबंध

संसार में अनेक प्रकार की शासन-व्यवस्थांए प्रचलित हैं। उनमें से लोकतंत्र या जनतंत्र एक ऐसी शासन-व्यवस्था का नाम है, जिसमें जनता के हित के लिए, जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ही सारी व्यवस्था का संचालन किया करते हैं। इसी कारण जिन देशों में इस प्रकार की सरकारों की व्यवस्था है, राजनीतिक शब्दावली में उन्हें लोक-कल्याणकारी राज्य और सरकार कहा जाता है। यदि लोक या जनता द्वारा निर्वाचित सरकार लोक-कल्याण के कार्य नहीं करती, तो उसे अधिक से अधिक पांच वर्षों के बाद बदला भी जा सकता है। पांच वर्षों में एक बार चुनाव कराना लोकतंत्र की पहली और आवश्यक शर्त है। चुनाव में प्रत्येक बालिग अपनी इच्छानुसार अपने मत (वोट) का प्रयोग करके इच्छित व्यक्ति को जिता और अनिच्छित को पराजित करके सत्ता से हटा सकता है। इस प्रकार लोकतंत्र में मतदान और चुनाव का अधिकार होने के कारण प्रत्येक नागरिक परोक्ष रूप से सत्ता और शासन के संचालन में भागीदारी भी निभाया करता है। इन्हीं तथ्यों के आलोक में ‘लोकतंत्र में चुनाव का महत्व’ रेखांकित किया जाता और जा सकता है। यहां भी इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखकर विवेचन किया गया है।

 

लोकतंत्र में अब प्राय: सारी राजनीतिक गतिविधियों वोटों के गणित पर ही आधारित होकर संचालित होने लगी है। लोक-हित की बात पीछे छूट गई है। अब अक्सर चतुर-चालाक राजनीतिज्ञ जनता का मत चुनाव के अवसर पर पाने के लिए अने प्रकार के सब्जबाग दिखाया करते हैं। जनता को तरह-तरह के आश्वासन और झांसे भी दिया करते हैं। अब यह मतदाता पर निर्भर करता है कि वह उनके सफेद झांसे में आता है कि नहीं, इससे इस परंपरा की एक सीमा भी कहा जा सकता है। फिर भी निश्चय ही आज का मतदाता बड़ा ही जागरुक, सजग और सावधान है। वह लोतंत्र और चुनाव दोनों का अर्थ और महत्व भली प्रकार समझता है। अत: चुनाव के अवसर पर वह सही व्यक्ति को वोट देकर लोतंत्र की रखा तो कर ही समता है उसके जन-हित में, विकास में भी सहायता पहुचंा सकता है। अत: चुनाव के समय की घोषणाओं को ही उसे सामने नहीं रखना चाहिए, बल्कि नीर-क्षीर विवेक से काम लेकर उपयुक्त, ईमानदार और जन-हित के लिए प्रतिबद्ध व्यक्ति के पक्ष में ही मतदान करना चाहिए। तभी सच्चे अर्थों में वास्तविक लोकतंत्र की रक्षा संभव हो सकती है।

चुनाव, क्योंकि लोकतंत्र भी अनिवार्य शर्त और सफलता की कसौटी भी है, अत: प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य हो जाता है कि वह उसके प्रति सावधान रहे। कई बार ऐसा भी होता है कि कुछ लोग यह सोचकर चुनावों के समय मत का प्रयोग नहीं भी करते कि हमारे एक मत के न डलने से क्या बनने-बिगडऩे वाला है? पर वस्तुत: बात ऐसी नहीं। कई बार हार-जीत का निर्णय केवल एक ही वोट पर निर्भर हुआ करता है। हमारे एक वोट के न डलने से अच्छा उम्मीदवार हार और अयाचित उम्मीदवार जीत सकता है। मान लो, हमारी तरह यदि अन्य कई लोग भी वोट न डालने की मानसिकता बनाकर बैठ जांए तब चुनाव क्या एक खिलवाड़ बनकर नहीं रह जाएगा। सजग सावधान और जागरुक मतदाता ही चुनावों को सार्थक बनाने की भूमिका निभा सकता है। अत: अपने मत का प्रयोग अवश्य, परंतु सोच-समझकर करना चाहिए। यही इसका सदुपयोग सार्थकता और हमारी जागरुकता का परिचायक भी है।

चुनाव लोकतंत्र के नागरिकों को पांच वर्षों में एक बार अवसर देते हैं कि अयोज्य एंव स्वार्थी प्रशासकों या प्रशासक दलों को उखाड़ फेंका जाए। योज्य और ईमानदार लोगों या दलों को शासन-सूत्र संचालन की बागडोर सौंपी जा सके। राजनीतिक दलों और नेताओं को उनकी गफलत के लिए सबक सिखाया और जागरुकता के लिए विश्वास प्रदान किया जा सके। लोकतंत्र की सफलता के लिए सही राजनीति और लोगों का, उचित योजनाओं का चयन एंव विकास संभव हो सके। यह वह अवसर होता है कि जब विगत वर्षों की नीति और योजनागत सफलताओं-असफलताओं का लेखा-जोखा करके नवीन की भूमिका बांधी जा सके। यदि हम लोकतंत्र के वासी और मतदाता ऐसा कर पाते हैं, तब तो लोकतंत्र में चुनाव का महत्व असंदिज्ध बना रह सकता है, अन्यथा वह एक बेकार के नाटक से अधिक कुछ नहीं। जागरुक नागरिक होने के कारण हमें उन्हें केवल नाटक नहीं बनने देना है, बल्कि जन-जीवन का संरक्षक बनाना है। अब तक भारतीय लोकतंत्र च्यारह बार चुनाव का दृश्य देख चुका है। इनमें से सन 1996 में संपन्न चुनाव सर्वाधिक महत्वपूर्ण और स्वमरणीय कहा जाता है।

Matdan par Nibandh

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हम साल के पहले महीने में हैं और सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय घटनाओं में से एक जो है वह है हमारा गणतंत्र दिवस। लेकिन एक और महत्वपूर्ण दिन इसी महीनेमें आता है, जो है राष्ट्रीय मतदाता दिवस। यह भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन का उद्देश युवा भारतीय मतदाताओं को लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत सरकार ने २०११ साल से हर साल २५ जनवरी को “राष्ट्रीय मतदाता दिवस” ​​के रूप में मनाने का फैसला किया।

२५ जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है क्योंकि २५ जनवरी १९५० को, हम गणतंत्र राष्ट्र बनने के एक दिन पहले; चुनाव आयोग की स्थापना हुई थी। हम २०११ से यह दिन मना रहें है| राष्ट्रीय मतदाता दिवस का विचार एक आम वोटर कैप्टन चाँद ने साल २०१० में दिया था। चुनाव आयोग ने सुझाव स्वीकार किया और इसमें सुधार करके २५ जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस शुरू किया| २०११ में यह पहिली बार मनाया गया, इस साल हम ८ वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनायेंगे|

पहले मतदाता की पात्रता आयु २१ वर्ष थी, लेकिन १९८८ में इसे १८ साल तक घटा दिया गया था। इस बदलाव को शामिल किया गया क्योंकि दुनिया भर के कई देशों ने आधिकारिक मतदान उम्र के रूप में १८ वर्षकी सिमा को अपनाया था। उसी समय भारतीय युवा साक्षर और राजनैतिक रूप से जागरूक हो रहा था। ६१वे विधेयक संशोधन, १९९८ ने भारत में मतदाता की पात्रता उम्र कम कर दिया।

भारत की ५०% से अधिक आबादी ३५ साल के उम्र के निचे की है और इसका एक बड़ा हिस्सा १८ साल का पड़ाव पार कर रहा है। उन्हें जागरूक करना और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्हें अपने अधिकारों और दायित्वों का एहसास कराना बहुत जरूरी है| इस तरह से हम लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी बढ़ा सकतें है।

पीएम नरेंद्र मोदी के “मान की बात” रेडियो प्रसारण पर २०१८ के नए साल का भाषण हुआ| भाषण में उन्होंने नए पात्र मतदाताओं का स्वागत किया, जो १ जनवरी को १८ साल के हो गए। उन्होंने उन्हें “न्यू इंडिया वोटर्स” कहा और उन्हें पंजीकृत होने के लिए आग्रह किया| उन्होंने यह भी कहा, “इस शताब्दी के मतदाता के रूप में, आपको भी गर्व महसूस करना चाहिए। आपका वोट नए भारत का आधार साबित होगा| वोट की शक्ति लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है| लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए मतदान सबसे प्रभावी उपकरण है…… ”

राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह पूरे भारत में ७ लाख से अधिक स्थानों पर मनाया जाता है। हर साल पात्र मतदाता प्रतिज्ञा लेते हैं, फोटो मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करते हैं और उन्हें एक पुस्तिका दी जाती है जो उन्हें अपने अधिकार और दायित्वों पर जानकारी देती है| ऐसे दिनों का जश्न मनाना बहुत महत्वपूर्ण है, इससे देश में लोकतंत्र की ताकद और लोगों का राष्ट्र निर्माण में योगदान बढ़ेगा। नोट: हमने यह जानकारी निबंध प्रारूप में दी है लेकिन आप भाषण के लिए समान सामग्री का उपयोग करते हैं, पैराग्राफ, लेख के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है| हां, आपको तदनुसार शैली और संरचना को संशोधित करना होगा। भारत के राष्ट्रीय मतदाता दिवस के बारे में पूछे जाने वाले कुछ अन्य सामान्य प्रश्न यहां दिए गए हैं। राष्ट्रीय मतदाता दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? युवा, पात्र भारतीय मतदाताओं को लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। यह २५ जनवरी २०११ से हर साल मनाया जाता है|

Voter Awareness Essay in Hindi

प्रस्तावना-

मतदाता जागरूकता से तात्पर्य हर एक व्यक्ति को मतदान के प्रति जागरुक करना है | हमारे देश में लोकसभा राज्यसभा के चुनाव समय-समय पर होते रहते है इन्हीं चुनावो पर हमारे देश का भविष्य निर्भर होता है क्योंकि चुनावों में बने कुछ नेता अपने देश की तकदीर बदल देते हैं वहीं कुछ नेता देश को बर्बाद भी कर देते हैं.अगर मतदाता जागरूकता हो तो हम एक अच्छे नेता को चुन के अपने देश को अपने राज्य को, अपने हिंदुस्तान को बचा सकते हैं.

मतदाता जागरूकता से लाभ-

मतदाता जागरूकता से हमारे देश को, हमारे समाज को बहुत सारे लाभ होते हैं हमारा देश जो सोने की चिड़िया कहलाता है अगर इस देश को एक अच्छा नेता मिलता है तो वास्तव में हम अपने देश के साथ में अपने जीवन को भी बदल सकते हैं.बहुत सारे उन लोगों को जो रोजगार पाना चाहते हैं एक अच्छे नेता की वजह से रोजगार के अच्छे अवसर मिलते हैं, उनको लाभ मिलता है साथ में हमारे देश की विभिन्न समस्याएं जैसे कि खराब रोड,पानी की व्यवस्थाएं आदि बहुत सारी व्यवस्थाएं मतदाताओं के द्वारा चुनी गई सरकार करती है और हम इससे लाभान्वित होते हैं एक अच्छी सरकार जब हमारे देश में आती है तो हमारे देश में बहुत सारी योजनाएं लागू होती हैं जो लड़कियों,बड़े बूढ़ों,बुजुर्गों,नौजवानों के लिए होती हैं जो हर किसी को लाभ पहुंचाती हैं.

मतदाताओं को समझना चाहिए की राजनीति से ही हमारा हमारे देश का भविष्य बदल सकता है राजनीति से एक नहीं अनेक लाभ होते हैं आज हमारे देश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि मौसम का ठिकाना नही रहा है.बाल-बच्चों को पढ़ाने के लिए,उनका भरण पोषण करने के लिए हर किसी को पैसे की जरूरत होती है लेकिन जब फसल ही नहीं हुई तो कैसा भविष्य. एक अच्छी सरकार किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए विशेष योजनाएं बनाती हैं लोगों के मतदाता जागरूकता की वजह से एक अच्छा नेता हमारे बीच में आकर पूरे देश की, शहर और गांव की तस्वीर बदल देता है.हमारे देश में हो रहे भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए एक अच्छा नेता ही सहयोग प्रदान करता है और हमारे देश से भ्रष्टाचार कुछ हद तक कम होता है.नौकरी पेशा करने वाले लोगों के लिए भी एक अच्छा नेता अच्छे-अच्छे नियम बनाता है जिससे उन्हें लाभ पहुंचता है हम देखें तो मतदाता जागरूकता की वजह से हमारे देश के हर एक नौजवान को लाभ होता है इसलिए हमें मतदाता जागरूकता अपनाना चाहिए.

मतदाता जागरूकता ना अपनाने से नुकसान

मतदाता जागरूकता अगर हमारे देश के नौजवान नहीं अपनाते तो हमारे देश की स्थिति बिगड़ सकती है बच्चे, बूढ़े,नौजवान सभी का भविष्य अंधकारमय हो सकता है क्योंकि हम सभी मिलकर अपने मतदान देकर जिन लोगों का या जिन बुरे लोगों का चुनाव करते हैं वह हमारे देश को नुकसान पहुंचाते हैं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो मतदान का महत्व ही नहीं समझते वह सोचते हैं कि सिर्फ हमारे मतदान करने से क्या होगा लेकिन बाद में जब सरकार उन्हें पसंद नहीं आती तो वह उन पर आरोप लगाते हैं लेकिन खुद मतदान के प्रति जागरुक नहीं होते ऐसे नौजवानों को चाहिए कि मतदान के प्रति मतदाता जागरूकता अपनाएं और चुनावों में अपना मतदान करें जिससे देश की सरकार अच्छी और मजबूत बने.कई बार देश के नौजवान मतदान नहीं करते और अच्छी सरकार बनते बनते नहीं बन पाती क्योकि हमारे देश में नौजवानो की संख्या बहुत है. मतदाता जागरूकता अगर हम नहीं अपनाते तो बिजली, पानी,रोजगार, भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं हमारे देश में बनी रहती हैं यह और बढ़ जाती हैं इसलिए हम सभी को चाहिए कि हम अपने देश के भविष्य के लिए मतदाता जागरूकता बनाएं और देश की तस्वीर को बदलने की कोशिश करें.

मतदाता जागरूकता दिवस-

देश के सभी नौजवानों को जागरूक करने के लिए 2011 से हर साल 25 जनवरी को मतदाता दिवस मनाया जाता है जिसका उद्देश्य यही है हर एक युवा और महिला चुनावों में अपना मतदान करें और इस मतदान के महत्व को समझें कि मतदान देकर हम हमारे देश की सरकार बनाते हैं जो हम पर राज करती है हम एक ऐसे नेता को चुने जो वास्तव में हमारे लिए कुछ अच्छा करें,जो हमारे लिए हितकारी योजना बनाएं. आज हमारे देश में चुनावों को लेकर बहुत सारी दुविधाएं हैं बच्चों, नौजवानों को बहला फुसलाकर उनसे वोट खरीदे जाते हैं और लोग सिर्फ थोड़े से लालच के लिए अपने जीवन को अंधकार में डाल देते हैं हम सभी को मतदाता जागरूकता दिवस को मनाते हुए अपने देश के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए कि हम कभी भी किसी लालच में ना आएं और देश को वह नेता प्रदान करें जिसकी वाकई में इस देश को जरूरत है.

अंत में हम सब यही कहना चाहेंगे कि मतदाता जागरूकता हमारे देश के भविष्य के लिए अति आवश्यक है अगर हम जागरुक होंगे तो हमारे देश की तस्वीर बदलेगी और देश का भविष्य उज्जवल होगा हमें किसी लालच में ना आकर देश के लिए एक सही नेता का चुनाव करना चाहिए तभी हमारे देश का,हमारे समाज का विकास संभव हो सकेगा.

मतदाता जागरूकता निबंध

इसमें कोई दोराय नहीं है कि हम एक लोकतांत्रिक देश के स्वतंत्र नागरिक है। लोकतांत्रिक प्रणाली के तहत जितने अधिकार नागरिकों को मिलते हैं, उनमें सबसे बड़ा अधिकार है वोट देने का अधिकार। इस अधिकार को पाकर हम मतदाता कहलाता हैं। वही मतदाता जिसके पास यह ताकत है कि वो सरकार बना सकता है, सरकार गिरा सकता है और तो और स्वयं सरकार बन भी सकता हैं। जब 26 जनवरी, 1950 को हमारा देश गणतांत्रिक बन रहा था। अलबत्ता हमारा देश का संविधान लागू हो रहा था। उसी के एक दिन पहले 25 जनवरी, 1950 को देशभर के सभी चुनावों को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ कराने के लिए ‘भारत निर्वाचन आयोग’ का गठन हुआ। वहीं 2011 में भारत सरकार ने चुनावों में लोगों की भागीदारी बढ़ाने व जागरूकता लाने के उद्देश्य से भारत निर्वाचन आयोग के गठन दिवस को ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ घोषित करने का निर्णय लेते हुए इस दिवस को प्रतिवर्ष मनाने का ऐलान किया। इस दिन मतदाता को उसके मत की शक्ति से वाक़िफ़ कराने के लिए देशभर में कई सामाजिक संस्थाएं और सरकार द्वारा कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं।

भारत जैसा युवा देश जिसकी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम है। उस देश के युवाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वो अशिक्षित लोगों को वोट का महत्व बताकर उनको वोट देने के लिए बाध्य करे। लेकिन यह विडंबना है कि हमारे देश में वोट देने के दिन लोगों को जरूरी काम याद आने लग जाते हैं। कई लोग तो वोट देने के दिन अवकाश का फायदा उठाकर परिवार के साथ पिकनिक मनाने चले जाते हैं। कुछ लोग ऐसे भी है जो घर पर होने के बावजूद भी अपना वोट देने के लिए वोटिंग बूथ तक जाने में आलस करते हैं। इस तरह अजागरूक, उदासीन व आलसी मतदाताओं के भरोसे हमारे देश के चुनावों में कैसे सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेंगी? साथ ही एक तबका ऐसा भी है जो प्रत्याक्षी के गुण न देखकर धर्म, मजहब व जाति देखकर अपने वोट का प्रयोग करता हैं। यह कहते हुए बड़ी ग्लानि होती है कि वोटिंग के दिन लोग अपना वोट संकीर्ण स्वार्थ के चक्कर में बेच देते हैं। यही सब कारण है कि हमारे देश के चुनावों में से चुनकर आने वाले अधिकत्तर नेता दागी और अपराधी किस्म के होते हैं। जिन्हें सही से बोलना और लिखना भी नहीं आता, ऐसे लोग जो अयोग्य है, वे गलत तरीकों से जीतकर योग्य लोगों पर राज करते हैं।

यह हमारे लोकतंत्र की कमी है कि सही और योग्य लोग जो व्यवस्था परिवर्तन करने का जज़्बा रखते है और वे चुनाव लडते है लेकिन मतदाताओं की ऐसी मिलीभगत के चलते वे हार जाते हैं। हमारे देश के लोग अपनी बेटी को किसी को देने से पहले पूरी तहकीकात हैं। लेकिन इसके विपरीत वोट ऐसे ही किसी को भी उठाकर दे देते है। वोट भी तो बेटी ही है ना? हम तब तक अच्छी व्यवस्था खड़ी नहीं कर पाएंगे जब तक हम वोट का महत्व और अपने मतदाता होने के फर्ज को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभा नहीं देते हैं। सवाल तो यह भी है कि क्या हमारे देश में राईट टु रिजेक्ट यानि नोटा के बटन के बाद वोट देने का अधिकार अनिवार्य नहीं करना चाहिए? विश्व के कई देशों में वोट देने का अधिकार अनिवार्य है। क्या भारत जैसे सर्वाधिक युवा मतदाता वाले देश को इस पहल का अनुसरण करने के लिए आगे नहीं आना चाहिए? अंततः हमें ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ पर यह शपथ लेनी चाहिए कि हम किसी भी प्रलोभन में नहीं फंसते हुए अपने वोट का प्रयोग स्वविवेक के आधार पर पूर्ण निष्पक्षता एवं निष्ठा के साथ करेंगे। चलते-चलते, कवि अजातशत्रु की ये पंक्तियां-

ये गठबंधन की राजनीति है,
ये ठगबंधन की राजनीति है,
दीया कहीं का कहीं की बाती है,
अरे ! ऐसे थोड़ी ज्योत जलाई जाती है !
दिनकर ने गाया कलम वहीं दोहराती है,
सिंहासन खाली करो कि अब जनता आती है !

मतदाता जागरूकता अभियान निबंध

एक वोट ने फ्रांस में लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता प्रशस्त किया; एक वोट के कारण ही जर्मनी.. नाजी हिटलर के हवाले हो गया। यह एक वोट ही था, जिसने 13 दिन में ही अटल सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। एक वोट ने ही कभी अमेरिका की राजभाषा तय की दी थी। यदि एक वोट सरकार बदल सकती है, तो हमारी तकदीर क्यों नहीं ?
स्पष्ट है कि हमारे एक-एक वोट की कीमत है। अतः हम अपने मत का दान करते वक्त संजीदा हों। हम सोचें कि पांच साल में कोई आकर चुपके से हमारा मत चुरा ले जाता है; कभी जाति-धर्म-वर्ण-वर्ग, तो कभी किसी लोभ, भय या बेईमानी की खिङकी खोलकर और हम जान भी नहीं पाते। यह अक्सर होता है। इन खिङकियों को कब और कैसे सीलबंद करेंगे हम मतदाता ? इस राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर मतदाता से जवाब मांगता, प्रथम प्रश्न यही है।
यह सच है कि बीते एक दशक में चुनाव को कम खर्चीला बनाने में निर्वाचन आयोग ने निश्चित ही शानदार भूमिका निभाई है; किंतु लोभमुक्त और भयमुक्त मतदान कराने के लिए अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। अतः निर्वाचन आयोग के चुनाव आयुक्तों को चाहिए कि वे सेवानिवृति के पश्चात् अपने लिए किसी पार्टी के जरिए पद सुनिश्चित करने की बजाय, निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित कराने के लिए संकल्पित हों। सूचना के अधिकार का सम्मान कर उम्मीदवार व मतदान से जुङी ज्यादा से ज्यादा सूचनाआंे में शुचिता लाये। मैं समझता हूं कि कम से कम जीते हुए उम्मीदवारों के शपथपत्रों को जांचकर सत्यापित करने का कदम उठाकर निर्वाचन आयोग, शुचिता की दिशा में एक नई शुरुआत कर सकता है। जानकारी गलत अथवा आधी-अधूरी पाई जाने पर पद गंवाने तथा दण्ड के प्रावधानों को और सख्त करने से यह शुचिता सुनिश्चित करने मंे और मदद मिलेगी।
मतदाता मित्रों! शुचिता सुनिश्चित करने की इस बहस में क्या हमें खुद अपने आप से यह प्रश्न पूछना माकूल नहीं होगा कि यदि भारतीय राजनीति गंदी है, तो इसके दोषी क्या सिर्फ राजनेता हैं ? क्या इन्हे चुनने वाले हम मतदाताओं का कोई दोष नहीं ? क्या हमारी मतदाता जागरुकता का सारा मतलब, एक वोट डालने तक ही सीमित है ? उसके आगे पांच साल कुछ नहीं ??
हम में से कितने मतदाता हैं, जो पांच साल के दौरान जाकर अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि से उसे मिले बजट का हिसाब पूछते हैं ? कितने हैं, जो सार्वजनिक हित के वादों को पूरा करने को लेकर जनप्रतिनिधि को समय-समय पर टोकते हैं ? सार्वजनिक हित के काम में उसे सहयेाग के लिए खुद आगे आते हैं ? हम भूल जाते हैं कि जहां सवालपूछी होती है, जवाबदेही भी वहीं आती है। यह सवालपूछी की प्रक्रिया और तेज होनी चाहिए। इसलिए हम यह तो याद रखें कि मतदान हमारा अधिकार है, किंतु कर्तव्य को न भूल जायें। जाति, धर्म, वर्ग, पार्टी, लोभ अथवा व्यक्तिगत संबंधों की बजाय उम्मीदवार की नीयत, काबिलियत, चिंता, चिंतन, चरित्र तथा उसके द्वारा पेश पांच साल की कार्ययोजना के आधार पर मतदान करना हमारा कर्तव्य है।
25 जनवरी की यह तारीख, प्रतिवर्ष हमें यह भी याद दिलाने आती है कि सिर्फ मतदान कर देना मात्र ही लोकतंत्र के निर्माण में हमारी एकमेव भूमिका नहीं है। महज् मतदान कर देने मात्र से हम अपने सपनों का भारत नहीं बना सकते। एक मतदाता के रूप में लोकतंत्र के निर्माण मंे सहभागिता के लिए जागने की अवधि सिर्फ वोट का एक दिन नहीं, पूरी पांच साल है; एक चुनाव से दूसरे चुनाव तक। जैसे चुनाव संपन्न होता है, मतदाता का असल काम शुरु हो जाता है। चुने गये उम्मीदवार को लगातार संवाद के लिए जनमत के अनुरूप दायित्व-निर्वाह को विवश करना। राष्ट्र स्तर पर नीतिगत निर्णयों के लिए संासद को और हितकारी विधान निर्माण के लिए विधायक को प्रेरित करना व शक्ति देना। एक निगम पार्षद को विवश करना कि वह इलाके का विकास नागरिकों की योजना व जरूरत के मुताबिक करे। ग्रामपंचायत के निर्णयों में ग्रामसभा का साझा सपना झलकना ही चाहिए।
ये हम मतदाता ही हैं, जो कि उम्मीदवार को इस सच्चाई से वाकिफ करा सकते हैं कि चुनाव न हार-जीत का मौका होता है और न ही यह कोई युद्ध है। चुनाव मौका होता है, पिछले पांच साल हमारे जनप्रतिनिधि द्वारा किए गये कार्य व व्यवहार के आकलन का। चुनाव मौका होता है, अगले पांच साल के लिए अपने विकास व विधान की दिशा तय करने का। यह तभी हो सकता है, जबकि मतदाता मतदान के बाद सो न जाये।
हम बीते पांच साल में लोकप्रतिनिधि के कार्य का आकलन भी तभी कर सकते हैं, जब हमारे लिए बनी योजनाओं की हम खुद जानकारी रखें। उनमंे लोकप्रतिनिधि, अधिकारी और खुद की भूमिका को हम जाने। उनका सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित करें और करायें। उनके उपयोग-दुरुपयोग व प्रभावों की खुद कङी निगरानी रखें। सरकारी योजनाओं के जरिए हमारे ऊपर खर्च होने वाली हर पाई का हिसाब मांगे। लोक अंकेक्षण यानी पब्लिक आॅडिट करें। ’’मनरेगा में काम क्या होगा ? कहां होगा ? यह जिम्मेदारी किसकी है ? – ग्रामसभा की।’’ रेडियो-टीवी पर दिन मंे कई-कई बार एक विज्ञापन यही बात बार-बार याद दिलाता है। बावजूद इसके यदि ग्रामवासी हर निर्णय की चाबी ग्रामप्रधान को सौंपकर सो जायें, तो वह हर पांच साल मंे एक गाङी बनायेगा ही। तेरी गठरी मंे लागा चोर, मुसाफिर जाग जरा! क्या करें ? कैसे जागें ??
अच्छा है कि हमने जागना शुरु कर दिया है। थोङा और जागें! वोट से और आगे बढें़। राजनेता चुनना बंद करें। लोकनेता चुनना शुरु करें। हम मतदाता खुद अपनी लोकसभा का घोषणापत्र बनायें। सभी उम्मीदवार व पार्टियों को बुलाकर उनके समक्ष पेश करें। उनसे संकल्प लें और जीतकर आये जनप्रतिनिधि को उसके संकल्प पर खरे उतरने को न सिर्फ विवश करें, बल्कि सहयोग भी करें।
लूट के रास्तों की बाङबंदी तभी होगी, प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्य व अधिकार.. दोनो का एकसमान निर्वाह करें; वरना्् लगाई बाङ खेत खायेगी ही। सिटी चार्टर सिर्फ पढें नहीं, उसकी पालना के लिए प्रशासन को विवश भी करें। लेकिन यह तभी संभव है कि जब हम मतदाता सकरात्मक, सजग, समझदार व संगठित हों। देशव्यापी स्तर पर निष्पक्ष मतदाता परिषदों का गठन कर यह किया जा सकता है। लोकतंत्र में राजतंत्र की मानसिकता को बाहर का रास्ता दिखाने का यही तरीका है। लोक उम्मीदवारी का मार्ग भी इसी से प्रशस्त होगा। आइये! प्रशस्त करें।
मेरा मानना है कि मतदाता जागरूकता का असल मतलब सिर्फ मतदान नहीं, लोकतंत्र के निर्माण में हर स्तर पर भागीदारी से है व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के निर्वाह से लेकर पदगत व संस्थागत दायित्वों की पूर्ति तक। मेरे पढने, लिखने, कुछ बनने, करने, अधिक से अधिक कमाने.. किसी भी कार्य के पीछे यदि उद्देश्य राष्ट्र निर्माण है, तो मैं सचमुच लोकतंत्र के निर्माण में सच्चा भागीदार हूं। क्या मैं सच्चा भागीदार हूं ? हमे स्वयं से यह प्रश्न पूछना चाहिए।
हमें समझना चाहिए कि आज दुनिया का यदि कोई सबसे आसान काम है, तो वह है व्यवस्था और सत्ता को गाली देना। दूसरों को भ्रष्टाचारी कहना, निश्चित ही सबसे आसान काम है और खुद को सदाचारी बनाना, निश्चित ही सबसे कठिन काम। खुद को सदाचारी बनाने के लिए जिस संकल्प की जरूरत है, उसकी बात आने पर हम से ज्यादातर विकल्प तलाशते हैं। आज हम इतने सुविधाभोगी हो गये हैं कि अपनी सुविधा के लिए आज हम खुद शॅार्टकट रास्ते तलाशते हैं। ’आउट आॅफ वे’ हासिल करना हम रुतबे की बात मानते हैं। कहते हैं कि इतना तो चलता है। जब तक यह चित्र नहीं बदलेगा, मतदाता जागरूकता आधी-अधूरी ही रहेगी।

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