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भगवान परशुराम कहानी – परशुराम की प्रतिज्ञा – परशुराम की कहानी

भगवान परशुराम कहानी

परशुराम जयंती 2019: भगवान परशुराम को सब उनके पराक्रम और उनकी वीरता के कारण जानते है| वे ब्राह्मण धर्म के देवता है| वे पुराणिक समय के एक ऋषि थे जिनका जन्म त्रेता युग में हुआ था| वे भगवान् विष्णु के छटवे अवतार थे| उनका शास्ता एक फरसा था जो की उन्हें भगवान् शिव से वरदान में मिला था एहि कारण है की कुछ लोग उन्हें शिव का अवतार मानते है| आज के इस पोस्ट में हम आपको परशुराम जी की कथा, परशुराम जी की कहानी इन हिंदी, हिंदी स्टोरी ऑफ़ लार्ड परशुराम, परशुराम जी की वीरता की कहानी, आदि की जानकारी देंगे|

भगवान परशुराम की कहानी

परशुराम जी, भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे और उन्हें शिव जी से एक फरसा वरदान के रूप में प्राप्त था| यही कारण है की उनका नाम परशुराम है। शिवजी ने उन्हें युद्ध कौशल भी सिखाया। वे ऋषि जमदग्नी व रेणुका देवी के पुत्र थे|जब वे छोटे थे तभी से वे एक गहन शिक्षार्थी थे और वह सदैव अपने पिता ऋषि जमदग्नी की आज्ञा मानते थे। परशुराम जी सबसे पहले योद्धा ब्राह्मण था यही कारण है की उन्हें ब्रह्मक्षत्रिया (दोनों ब्राह्मण और क्षत्रिय का अर्थ योद्धा कहा जाता है)| उनकी माता रेणुका देवी जी क्षत्रिय थीं। साथ ही आप भगवान परशुराम जी का जीवन परिचय भी देख सकते हैं|

अश्वत्थामा बलिव्र्यासो हनुमांश्च विभीषण:
कृप: परशुरामश्च सप्तैते चिरजीविन:।।

परशुराम की प्रतिज्ञा

परशुराम की प्रतिज्ञा

प्राचीन काल में कन्नौज के राजा गाधि के सत्यवती नाम की सुन्दर पुत्री थी। राजा ने अपनी पुत्री का विवाह भृगुनन्दन ऋषीक के साथ करवाया। सत्यवती के विवाह में भृगु ऋषि ने अपनी पुत्रवधू एक वरदान दिया। सत्यवती ने अपनी माँ के लिए पुत्र की कामना का आशीर्वाद माँगा। इस पर ऋषि ने उनको दो चरु पात्र दिए और कहा की तुम और तुम्हारी माँ ऋतु स्नान करने के बाद तुम्हारी माँ को पीपल का आलिंगन करना है और तुमको गूलर आलिंगन करना है। उसके बाद दिए हुए चरुओं का अलग अलग सेवन करना है| यह सब करने के बाद कुछ स्ममय बाद सत्यवती के पुत्र हुआ जिसका नाम जमदग्नि रखा गया| जब वे बड़े हुए उनका विवाह रेणुकादेवी जी से हुआ | रेणुकादेवी के पाँच पुत्र हुए जिनमे परशुराम उनके पांचवे और सबसे पराक्रमिक पुत्र थे|

परशुराम की प्रतीक्षा

भगवान् परशुराम के जीवन की एक बहुत ही प्रसिद्ध कहानी है जो उनकी वीरता और पराक्रम को दर्शाती है| एक बार सहस्त्रार्जुन नामक एक राजा था जिसके पूर्वज थे महिष्मन्त| वे हैहयवंशी क्षत्रियों के समाज के राजा थे| एक बारे उन्हें भगवान् परशुराम के पिता जी की जादूरि गाये कामधेनु के विषय में पता चला और उसने कामधेनु को चोरी करने का प्रयास किया| इसी वजह से वे परशुराम जी के पिता के घर पर सैनिको के साथ आये|जब उनके पिता ने उन्हें ऐसा करने से रोका तो सहस्त्रार्जुन ने उनको मार दिया और कामधेनु को चुरा ले गए| इस बात को सुनकर उन्हें बहुत गुस्सा आया और यही कारण, उन्होंने उसकी पूरी सेना और राजा कार्तवीरिया को मार दिया। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए, सहस्त्रग्नन के पुत्र ने परशुराम की अनुपस्थिति में जमदग्नी वध कर दिया| यह जानकार वे और क्रोधित हुए और उन्होंने राजा और उसके के सभी पुत्रों को मार दिया और धरती पर क्षत्रियो का 21 बार विनाश कर दिया| साथ ही आप  भगवान परशुराम पर कविता व Parshuram Jayanti Speech in Hindi भी देख सकते हैं|

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