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परशुराम जी का जीवन परिचय

भगवान परशुराम जी का पौराणिक कथाओं और धर्म में एक महत्त्वपूर्ण स्थान पर हैं| भगवान परशुराम (चिरंजीव) को विष्णु जी का छठा अवतार माना जाता है| परशुराम जी का सम्बन्ध त्रेता युग से है। परशुराम शब्द का अर्थ है फरसा लिए हुए भगवान राम|  जब परशुराम जी को भगवान शिव से परशु प्राप्त होने के बाद पृथ्वीलोक पर किसी भी व्यक्ति को उन्हें हराना असंभव हो गया था|

भगवान परशुराम का जीवन परिचय

परशुराम जी, भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे और उन्हें शिव जी से एक फरसा (कुल्हाड़ी रुपी हथियार) वरदान के रूप में प्राप्त था| यही कारण है की उनका नाम परशुराम है। शिवजी ने उन्हें युद्ध कौशल भी सिखाया। वे ऋषि जमदग्नी व रेणुका देवी के पुत्र थे|जब वे छोटे थे तभी से वे एक गहन शिक्षार्थी थे और वह सदैव अपने पिता ऋषि जमदग्नी की आज्ञा मानते थे। परशुराम जी सबसे पहले योद्धा ब्राह्मण था यही कारण है की उन्हें ब्रह्मक्षत्रिया (दोनों ब्राह्मण और क्षत्रिय का अर्थ योद्धा कहा जाता है)| उनकी माता रेणुका देवी जी क्षत्रिय थीं।

परशुराम का जन्म

प्राचीन काल में कन्नौज के राजा गाधि के सत्यवती नाम की सुन्दर पुत्री थी। राजा ने अपनी पुत्री का विवाह भृगुनन्दन ऋषीक के साथ करवाया। सत्यवती के विवाह में भृगु ऋषि ने अपनी पुत्रवधू एक वरदान दिया। सत्यवती ने अपनी माँ के लिए पुत्र की कामना का आशीर्वाद माँगा। इस पर ऋषि ने उनको दो चरु पात्र दिए और कहा की तुम और तुम्हारी माँ ऋतु स्नान करने के बाद तुम्हारी माँ को पीपल का आलिंगन करना है और तुमको गूलर आलिंगन करना है। उसके बाद दिए हुए चरुओं का अलग अलग सेवन करना है। यह देख सत्यवती ने अपना चारु अणि पुत्री के चारु से बदल लिया और सेवन कर लिया जिसका पता ऋषि को चल गया, उन्होंने सतयवती को बुलाया और बोलै की तुम्हारी माँ ने चल से तुम्हे दिया हुआ चारु खा लिया है। इसके कारणवाश तुम्हारी सन्तान ब्राह्मण होते हुये भी क्षत्रिय जैसा व्यवहार रखेगी और तुम्हारी माता की सन्तान क्षत्रिय होने के बावजूद ब्राह्मण का व्यवहार रखेगी। यह सुनकर सत्यवती ने ऋषि भृगु से विनती करी की कृपया कर मेरे पुत्र का व्यवहार ब्राह्मण जैसा ही रखें, चाहे मेरे पौत्र का आचरण क्षत्रिय जैसा कर दें। यह सुन भृगु ने उन्हें यह वरदान दे दिया|

 कुछ समय बाद सत्यवती के पुत्र हुआ जिसका नाम जमदग्नि रखा गया। जमदग्नि बहुत तेजस्वी थे। जब वे बड़े हुए उनका विवाह रेणुकादेवी जी से हुआ जो की प्रसेनजित की पुत्री थी। रेणुकादेवी के पाँच पुत्र हुए जिनमे शामिल थे, रुक्मवान, सुखेण, वसु, विश्‍वानस और परशुराम। परशुराम उनके पांचवे पुत्र थे|

परशुराम की प्रतिज्ञा

एक बार राजा कार्तवीय सहस्त्रग्नन अपनी सेना के साथ आये परशुराम के पिता की जादुई गाय कामधेनू नामक चोरी करने का प्रयास किया| इस बात को सुनकर उन्हें बहुत गुस्सा आया और यही कारण, उन्होंने उसकी पूरी सेना और राजा कार्तवीरिया को मार दिया। अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए, सहस्त्रग्नन के पुत्र ने परशुराम की अनुपस्थिति में जमदग्नी वध कर दिया| यह जानकार वे और क्रोधित हुए और उन्होंने राजा और उसके के सभी पुत्रों को मार दिया और धरती पर क्षत्रियो का 21 बार विनाश कर दिया| इसके साथ आप Parshuram Jayanti Speech in Hindi भी देख सकते हैं|

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