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नेल्सन मंडेला पर निबंध 2018 – Short Essay on Nelson Mandela in Hindi Language for School Students Class 1-12

आज, नेल्सन मंडेला हमारे समय की सबसे बड़ी व्यक्तित्वों में से एक है। वह उस श्रेणी के पुरुषों से संबंधित है जिन्होंने अपनी सभ्यता को अपने व्यक्तिगत करिश्मा और महान योगदान के साथ स्वीकार किया है| दक्षिण अफ्रीका में आजादी के कारण उनके जीवन की लंबी लड़ाई और इसकी अंतिम सफलता इतिहास के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी। उनका पूरा जीवन स्वतंत्रता के लिए मनुष्य की निर्विवाद प्यास का प्रतीक है| आज के इस पोस्ट में हम आपको nelson mandela essay topics, nelson mandela 5 paragraph essay, nelson mandela essay in telugu, nelson mandela essay outline, nelson mandela essay introduction, nelson mandela essay questions, Nelson Mandela essay in 300 words, नेल्सन मंडेला हिंदी एस्से, नेल्सन मंडेला पर एस्से इन हिंदी, Nelson Mandela essay 2018, essay on Nelson Mandela, essay on Nelson Mandela in 400 words, इन मराठी, हिंदी, इंग्लिश, बांग्ला, गुजराती, तमिल, तेलगु, आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल के निबंध प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये निबंध खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Essay on Nelson Mandela in Hindi

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दक्षिण अफ्रीका की प्रिटोरिया सरकार का शासनकाल मानव सभ्यता के इतिहास में ‘चमड़ी के रंग’ और नस्ल के आधार पर मानव द्वारा मानव पर किए गए अत्याचारों का सबसे काला अध्याय है। वह दुनिया की एकमात्र ऐसी सरकार थी, जिसने जातीय पृथक्करण एवं रंगभेद पर आधारित लिखित कानून बना रखा था। वहां के 75 प्रतिशत मूल अश्वेत अपनी ही जमीन पर बेगाने हो गए और बाहर से आए 15 प्रतिशत गोरी चमड़ी वाले 87 प्रतिशत भू-भाग के मालिक थे।

अश्वेतों को 16 वर्ष की आयु के बाद हर वक्त अपने पास अश्वेत होने का प्रमाण-पत्र ‘पास’ रखने के लिए बाध्य किया जाता था। वहां कभी ‘शुद्ध गोरा’ होने की जांच करने के लिए बालों में पेंसिल घुसवाई जाती थी और बालों से पेंसिल न गिरने पर गोरा होते हुए भी उस व्यक्ति को अश्वेत घोषित कर दिया जाता था।

खून का घूंट पीकर, ड्राइवर, दरबान और भृत्य के रूप में निर्वासित जीवन जीकर और जेल में क्रूर यातनाएं सहकर भी इस लड़ाके ने दक्षिण अफ्रीका को बीसवीं सदी के अंतिम मोड़ पर आजाद करवा ही दिया
अफ्रीकी अश्वेत बच्चे का जन्म ‘केवल अश्वेतों के लिए’ वाले अस्पताल में होता था। फिर वह इसी तख्ती वाली बस में घर जाता, ऐसी ही बस्ती में रहता, ऐसे ही स्कूल में पढ़ता, नौकरी पर लगता और ट्रेन में घूमता। ‘कुत्ते और काले यहां न आएं’ जैसे वाक्य महज लतीफे नहीं, उनके जीवन की सच्चाई रहे।

समंदर के किनारे और किताब के पन्ने तक गोरों ने अपने लिए सुरक्षित करा रखे थे। वहां केवल अफ्रीका के अश्वेतों पर नहीं बल्कि अन्य देशों के लोगों पर भी रंग के आधार पर जुल्म किए जाते थे। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है गांधीजी, जिनका सामान वहां ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया और घोड़ा-गाड़ी पर बैठने के लिए चढ़ने के दौरान उन पर चाबुक बरसाए गए।

जब सारी दुनिया के लोग आजादी की सांस ले रहे थे, तब भी बीसवीं सदी के अंतिम पड़ाव तक दक्षिण अफ्रीका इन काले अंधेरों में क्रंदन कर रहा था। बर्बरता और अत्याचार के स्याह घेरे को तोड़ने का कालजयी और पराक्रमी कार्य किया नेल्सन रोलिहलाइला मंडेला ने। जिस प्रकार अन्य लोगों के योगदान के बावजूद भारत की आजादी की लड़ाई के आदर्श नायक गांधीजी हैं, उसी प्रकार दक्षिण अफ्रीका की आजादी के महानायक और मसीहा हैं नेल्सन मंडेला

Nelson Mandela Essay in Hindi

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अब्राहम लिंकन और मार्टिन लूथर किंग के विचारों को मानने वाले, दक्षिण अफ्रिका के गाँधी नेल्सन मंडेला का जन्म बासा नदी के किनारे ट्रांस्की के मवेंजो गाँव में 18 जुलाई, 1918 को हुआ था। माता का नाम नोमजामो विनी मेडीकिजाला था, वे एक मैथडिस्ट थीं। पिता का नाम गेडला हेनरी था। वे गाँव के प्रधान थे। उन्होने बालक का नाम रोहिल्हाला रखा, जिसका अर्थ होता है पेङ की डालियां तोङने वाला या प्यारा शैतान बच्चा। बारह वर्ष की अल्प आयु में उनके सर से पिता का साया उठ गया था।

नेल्सन मंडेला की प्रारंभिक शिक्षा क्लार्कबेरी मिशनरी स्कूल में एवं स्नातक शिक्षा हेल्डटाउन में हुई थी। ‘हेल्डटाउन’ अश्वेतों के लिए बनाया गया विशेष कॉलेज था। इसी कॉलेज में मंडेला की मुलाकात ‘ऑलिवर टाम्बो’ से हुई, जो जीवन भर उनके दोस्त एवं सहयोगी रहे। 1940 तक नेल्सन मंडेला और ऑलिवर ने कॉलेज कैंपस में अपने राजनैतिक विचारों और क्रियाकलापों से लोकप्रियता अर्जित कर ली थी। कॉलेज प्रशासन को जब इसकी खबर लगी तो दोनो को कॉलेज से निकाल दिया गया।

मंडेला की क्रांति की राह से परिवार बहुत चिंतित रहता था। परिवार ने उनका विवाह करा कर उन्हे जिम्मेदारियों में बाँधने का प्रयास किया परन्तु नेल्सन निजी जीवन को दरकिनार करते हुए घर से भागकर जोहान्सबर्ग चले गये। वहाँ उन्होने सोने की खदान में चौकीदार की नौकरी की एवं वहीं अलेंक्जेंडरा नामक बस्ती में रहने लगे । इसके बाद उन्होने एक कानूनी फर्म में लिपिक की नौकरी की। जोहान्सबर्ग में ही उलकी मुलाकात ‘वाटर सिसलु’ और ‘वाटर एल्बरटाइन’ से हुई। नेल्सन के राजनीतिक जीवन पर इन दो मित्रों का अत्यधिक प्रभाव पङा। उन सभी ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर ‘अफ्रिकन नेशनल कांग्रेस यूथ लीग’ का गठन किया। 1947 में मंडेला इस संगठन के सचिव चुन लिये गए। इसके साथ ही उन्हे ट्रांन्सवाल एएनसी का अधिकारी भी नियुक्त किया गया। इसी दौरान अफ्रिकन नेशनल कांग्रेस (ANC) के चुनावें में करारी हार का सामना करना पङा। कांग्रेस के अध्यक्ष को हटाकर किसी नये अध्यक्ष की मांग जोर पकङने लगी थी। यूथ कांग्रेस के विचारों को अपनाकर मुख्य पार्टी को आगे बढाने का विचार रखा गया। ‘वाल्टर सिसलू’ ने एक कार्ययोजना का निर्माण किया, जो अफ्रिकन नेशनल कांग्रेस द्वारा मान लिया गया। तद्पश्चात 1951 में नेल्सन को यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया।

नेल्सन ने 1952 में कानूनी लङाई लङने के लिए एक कानूनी फर्म की स्थापना की। नेल्सन की बढती लोकप्रियता के कारण उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। वर्गभेद के आरोप में उन्हे जोहान्सबर्ग के बाहर भेज दिया गया। उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया कि वे किसी भी बैठक में भाग नही ले सकते। सरकार के दमन चक्र से बचने के लिए नेल्सन और ऑलिवर ने एक एम प्लान बनाया। एम का मतलब मंडेला से था। निर्णय लिया गया कि कांग्रेस को टुकङों में तोङकर काम किया जाए तथा परिस्थिती अनुसार भूमिगत रहकर काम किया जाए। प्रतिबंध के बावजूद नेल्सन क्लिपटाउन चले गये और वहाँ कांग्रेस के जलसों में भाग लेने लगे। उन्होने वहाँ उन सभी संगठनों के साथ काम किया जो अश्वेतों की स्वतंत्रता के लिये संघर्ष कर रहे थे।

नेल्सन मंडेला के जीवन पर निबंध

नेल्सन मंडेला पर निबंध 2018

Nelson Mandela नेल्सन मंडेला का जन्म 1918 में दक्षिणी अफीका की माडीवा जनजाति में हुआ था जो दक्षिणी अफ्रीका के पूर्वी हिस्से में थेम्बू लोगो का एक छोटा सा गाँव था | जन्म के समय नेल्सन मंडेला का नाम “रोलीलाहला डालीभुंगा ” था जिसे बाद में स्कूल के अध्यापक ने बदलकर “नेल्सन” एक अंग्रेजी नाम दिया था | नेल्सन मंडेला के पिता थेम्बू शाही परिवार के सलाहकार थे | Nelson Mandela नेल्सन जब केवल नौ वर्ष के थे तब उनके पिता की मृत्यु हो गयी थी | पिता की मौत के बाद उनको मुखिया जॉनगिनटावा के संरक्ष्ण में रखा गया |

1943 में वो पहले अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में शामिल हुए उसके बाद ANC यूथ लीग के संस्थापक बने थे | 1944 में उन्होंने एवलिस मेस नामक महिला से विवाह कर लिया और तीन संतानों का जन्म हुआ लेकिन 1957 में उनका तलाक हो गया था | इसके बाद Nelson Mandela ने वकालत पास की और अपने साथी ओलीवर टोम्बो के साथ जोहान्सबर्ग में वकालत करने लगे | उन दोनों ने मिलकर रंगभेद के खिलाफ आवाज उठायी थी | इसी कारण 1956 में उनके साथ 155 कार्यकर्ताओ पर मुकदमा लगाया गया जिसे चार साल बाद खत्म कर दिया गया |

1958 में उन्होंने माडीकिजेला नामक महिला से दूसरा विवाह किया जिसने नेल्सन मंडेला को जेल से छुडवाने में अहम भूमिका अदा की थी | 1960 में ANC पर प्रतिबन्ध लग गया जिसके कारण नेल्सन मंडेला को भूमिगत होना पड़ा था | अब उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक अभियान चलाया | इस कारण उन पर हिंसक कारवाई का आरोप लगाया गया और उन्हें बंदी बना लिया गया | अब उन्होंने स्वय के बचाव में प्रजातंत्र ,स्वतंत्रता और समानता के विषय में विचार व्यक्त किये | 1964 में उन्हें आजन्म कारावास की सजा सुनाई गयी |

1968 और 1969 के बीच में Nelson Mandela की माँ की मौत हो गयी और एक सडक दुर्घटना में उनके पुत्र की भी मृत्यु हो गयी थी लेकिन उन्हें उन दोनों के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत नही दी गये | वो 18 वर्ष तक रोबन द्वीप पर सजा काटते रहे | 1982 में उन्हें पोल्सपुर जेल लाया गया | निर्वासित टोम्बो ने उन्हें मुक्त कराने के लिए 80 के दशक में एक अन्तर्राष्ट्रीय अभियान चलाया था | विश्व समुदाय ने दक्षिणी अफ्रीका में रंगभेद निति का कड़ा विरोध किया जिसके कारण उन लगी पाबन्दिया हटाकर उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया | अब ANC और नेशनल पार्टी मिलकर बहुजातीय प्रजातंत्र बनाने के बारे में विचार करने लगे |

दिसम्बर 1993 में Nelson Mandela मंडेला को नोबल शान्ति पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | इसक पांच महीने बाद दक्षिणी अफ्रीका के इतिहास में पहली बार सभी जातियों ने चुनाव में वोट दिया और फलस्वरूप ANC को 400 में से 252 सीटे मिली | स्पस्ट बहुमत के चलते ANC की सरकार बनी और नेल्सन मंडेला राष्ट्रपति बने | 1997 में उन्होंने मबेकी के लिए अपना स्थान छोड़ दिया | सेवानिवृत्त होने के बाद वो विश्व भ्रमण को निकले , अनेक नेताओ से मिले और कई पुरुस्कार प्राप्त किये |धीरे धीरे वो सार्वजनिक जीवन से दूर हो गये और उनके द्वारा स्नस्त्थापित “मंडेला फाउंडेशन ” के लिए काम करने लग गये | 5 दिसम्बर 2013 को 95 वर्ष की उम्र में उनकी मृत्यु हो गयी और उनके अंतिम यात्रा में काफी लोग शामिल हुए थे |

Short Essay on Nelson Mandela in Hindi

नेल्सन आर मंडेला लोकतांत्रिक दक्षिण अफ्रीका के पहले काले राष्ट्रपति बने। उनका जन्म 18 जुलाई 1918 को दक्षिण अफ़्रीका में उम्तता (केप ऑफ़ गुड होप) में हुआ था। उन्होंने अपना बीए पूरा किया। दक्षिण अफ्रीका विश्वविद्यालय और विटवाटरसंद विश्वविद्यालय में कानून। वह अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए थे और शासक नेशनल पार्टी के रंगभेद नीतियों के खिलाफ प्रतिरोध में लगी हुई थी। उन्होंने 27 साल जेल में बिताया और बहुत कुछ भुगतना पड़ा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दबाव के कारण 1990 में उन्हें रिहा किया गया था। दक्षिण अफ़्रीका में पहली बार सभी जाति के चुनाव 1994 में हुए और मंडेला पहले काली राष्ट्रपति बने।
राष्ट्रपति के रूप में उनके एजेंडे में राजनीतिक मतभेदों को कम करने और अर्थव्यवस्था का निर्माण करने के शामिल थे। सबसे पुराना राष्ट्रपति होने के नाते, उन्होंने दूसरे कार्यकाल के लिए खड़े होने का फैसला नहीं किया। उनका स्वास्थ्य बिगड़ रहा था और वह अपने परिवार के साथ अधिक समय का आनंद लेना चाहता था। वह विभिन्न सामाजिक और मानव अधिकार संगठनों के लिए एक वकील बन गए। मंडेला ने मानव अधिकारों और स्वतंत्रता के कारण उनके बलिदान के लिए बहुत अंतरराष्ट्रीय प्रशंसा की। 5 दिसंबर, 2013 को उनकी मृत्यु हो गई।

नेल्सन रोलीहलाला मंडेला दक्षिण अफ्रीका के एक प्रतिरोधी नेता थे, जिन्होंने रंगभेद का विरोध करने के लिए कारावास के वर्षों के बाद, लोकतांत्रिक दक्षिण अफ्रीका के पहले काली राष्ट्रपति बनने के लिए उभरा। वह दक्षिण अफ्रीका के काले बहुमत की निराशाजनक आकांक्षाओं का प्रतीक बन गया। मंडेला थंबू वंश का था, जो दक्षिण अफ्रीका के केप प्रांत के ट्रांसकेइयान क्षेत्र में राज्य करता है। उनका जन्म 18 जुलाई 1918 को उमटाता (केप ऑफ़ गुड होप) में हुआ था।

मंडेला के पिता, गादाला हेनरी माफकन्यास्वा ने शहर के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। मंडेला के पिता की चार पत्नियां थीं, जिनकी कुल संख्या तेरह बच्चे थी। मंडेला का जन्म तीसरी पत्नी नोसेकेनी फैनी से हुआ था। उसका नाम रोलीहला का अर्थ है एक पेड़ की एक शाखा या अधिक बोलचाल ‘परेशानी’ खींचने के लिए। वह एक स्कूल में भाग लेने के लिए अपने परिवार का पहला सदस्य बन गया, जहां उनके शिक्षक ने उन्हें अंग्रेजी नाम ‘नेल्सन’ दिया। मंडेला ने अपना बीए पूरा किया पत्राचार के जरिए दक्षिण अफ्रीका के विश्वविद्यालय में, जिसके बाद उन्होंने विटवाटरसैंड विश्वविद्यालय में कानून अध्ययन शुरू किया।

यहां उन्होंने सबसे पहले साथी छात्रों और भावी विरोधी रंगभेद कार्यकर्ता जो स्लोवा, हैरी श्वार्ज़ और रूथ फर्स्ट के साथ दोस्ती की। मंडेला 1944 में अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस (एएनसी) में शामिल हो गए, और एक ब्लैक मुक्ति समूह के नेताओं में से एक, सत्ताधारी नेशनल पार्टी की रंगभेद नीतियों के खिलाफ प्रतिरोध में लगी हुई थी। वह शांतिपूर्ण तरीके से रंगभेद को नष्ट करने के लिए हर संभव तकनीक का प्रयास करने के लिए तैयार था। वह महात्मा गांधी के दर्शन और ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ और ‘सत्यग्राही’ की तकनीक से प्रभावित थे। वह विशेष रूप से गर्व था कि गांधी अपने जन्मभूमि में विकसित हुए थे।

Nelson Mandela Essay in English

Nelson Mandela’ was born on July 18th, 1918 in the village of Mvezo in Umtata, then a part of South Africa’s Cape Province. His story symbolizes a lifestyle struggle against apartheid in South Africa. It was a terrible form of institutionalized racism that held the South African society in it’s grip for a long time. It was not easy for Mandela to fight against it, as he too was among those who were oppressed by the system.

Before becoming actively involved in the anti-apartheid struggle, Mandela survived many years of his life as a subject of colonialism. As a child in Africa, Mandela was a victim of the European colonial project which involved ‘civilizing’ indigenous communities by silencing African ways of life in favour of a Euro-centric culture.

In the early 1960’s, Mandela was imprisoned for his stand against the racist laws of the government. He stayed in prison for nearly three decades but refused to compromise his position, which was to fight for justice and equality for all people.

A courageous and uncompromising hero, Mandela was a man of principles, strength and integrity. In 1994, he led the country to the end of apartheid and was elected the first black president of South Africa. He served as President of South Africa from 1994 to 1999. After he retired from public life, Mandela continued to embody the hopes and dreams of a free and equal world. He died on December 5th, 2013 at the age of 95 at Johannesburg, South Africa.

Nelson Mandela received more than 250 honours, including the 1993 Nobel Peace Prize, the US Presidential Medal of Freedom, the Soviet Order of Lenin and the Bharat Ratna. Today, Nelson Mandela, popularly known as ‘Madiba’ in South Africa, is a household name all over the world.

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