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नवरात्रि पर कविता 2018 – Navratri Poems in Hindi – Navratri kavita in hindi

Navratri 2018: नवरात्रि 9 दिनों के उत्सव का त्यौहार है। यह उस वर्ष का शुभ समय है जब देवी दुर्गा की पूजा 9 दिनों के लिए की जाती है। भक्त देवी दुर्गा की सभी शक्तियों को श्रद्धा से आराधना अर्पित करते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं। इसके अलावा, नवरात्रि पृथ्वी पर देवी दुर्गा का स्वागत करने के लिए वर्ष का उत्साही समय है। इस प्रकार कई सांस्कृतिक कार्यक्रम नवरात्रि या दुर्गा पूजा के उत्सव का हिस्सा हैं। ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

Navratri par kavita in hindi

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घर-घर घटस्थापना देख, मां अंबे हो रही हर्षित
नौ दिन,नव रूप लिए, दुर्गा होती शोभित
सजे गए मंदिर देवी के, लगे नए पंडाल
हवन, कीर्तन, रामायण, सजे पूजा के थाल
जिस घर ज्योति जले माता की, रोशन हो गए जीवन
अन्न,धन,मां की कृपा से बरसे,बरसे ममता का सावन
नव दुर्गा के दरस की खातिर,कर रहे बड़े आयोजन
मनुज की ओछी सोच देख, मां का भी अकुलाया मन
क्यूं स्वार्थ में हो कर अंधा तू, कर रहा है घोर पाप
बेटे की झूठी आस लिए, क्यूं बेटी बनी अभिशाप
नारी भी मेरा ही स्वरूप, मूरत की करते पूजा
उसकी गर तुम करो कदर, घर स्वर्ग बने समूचा
कन्या, कंजक, नारी, दुर्गा, सहनशील धरा सी

बोझ बढ़े धरती पर जो, फट प्रलय दिखाए वो भी
उसको न अपमानित कर, देवी को दुर्गा रहने दो
असुरों का संहार करे, दुर्गा “काली” बन जाए तो
कर सम्मान, दे दूं वरदान, हो जाऊं गर प्रसन्न
मान बढ़े तेरा भी निस दिन, सुख, समृद्धि,बसे कण-कण..

नवरात्रि पर कविता

Navratri poem in hindi

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अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां,
मन मेरे संताप भरा है, मैं कैसे मुस्काऊं मां।

कदम-कदम पर भरे हैं कांटे, ऊंची-नीची खाई है,
दुःखों की बेड़ी पड़ी पांव में, किस विधि चलकर आऊं मां।

अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

सुख और दुःख के भंवरजाल में, फंसी हुई है मेरी नैया,
कभी डूबती, कभी उबरती, आज नहीं है कोई खिवैया।

छूट गई पतवार हाथ से, किस विधि पार लगाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

पाप-पुण्य के फेर में फंसा हूं, मैंने सुध-बुध खोई मां,
अंदर बैठी मेरी आत्मा, फूट-फूटकर रोई मां।

बोल भी अब तो फंसे गले में, आरती किस विधि गाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

पाप-पुण्य में भेद बता दे, धर्म-कर्म का ज्ञान दे,
मेरे अंदर तू बैठी है, इतना मुझको भान दे।

फिर से मुझमें शक्ति भर दे, फिर से मुझमें जान दे,
नवजात शिशु-सा गोद में खेलूं, फिर बालक बन जाऊं मां।

तू ही बता दे, किन शब्दों में, तुझको आज मनाऊं मां,
अश्रुधार भरी आंखों से, किस विधि दर्शन पाऊं मां।

नवरात्रि की कविता

नवरात्री में नवदुर्गा नव नव रूप धरे
हर रूप की अपनी महिमा
कुछ शब्द न कह पाएं
शैलपुत्री तुम प्रथम कहलाती
हिमराज की सुता कहलाती
द्वित्य ब्रह्म चारिणी हो तुम
दुखियों की दुखहारिणी हो तुम
चंद्र घटना तृतीय रूप है तेरा
दुष्ट प्रकम्पित होते सारा
कुश्मांड़ा तेरा रूप चतुर्थकम
उल्लास का देती नया सोपनं
पंचम स्कन्द माता कहलाती
कार्तिकेय के संग पूजी जाती
षष्टम कात्यायनी हो तुम
कात्यान ऋषि की सुता हो तुम
कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
दुष्टो का बेडा गर्क है
अष्टम में तुम महा गौरी
कुंदन सुमन सी कोमल नारी
नवम सिद्धि दात्री हो तुम
सुख समृद्धि और मोक्ष की माता हो तुम

Navratri poems in english

The temple priest has rung his bell.
A cloud of smoke from candles and lamps
Haloes the Goddess, glowing bright
This beat of drums both maddens and dulls.

The incense burns: so heady the musk,
Our senses flounder in the flood.
This endless chant of sacred words
Soon drugs our lips and stuns our minds.

The Goddess, always staring down:
Her painted pupils cut through smoke
And read the secret thoughts we think.
We somehow feel this within our hearts.

To Mother, we know, we bow and pray –
Her form not just this image of clay.

Navratri poems in tamil

கோயில் பூசாரி அவரது மணிக்கட்டை முழங்கினார்.
மெழுகுவர்த்திகள் மற்றும் விளக்குகள் இருந்து புகை ஒரு மேகம்
பிரகாசமான பிரகாசமான தேவியின் தேவதைகள்
டிரம்ஸ் இந்த துடுப்பு மற்றும் mulls இருவரும்.

தூப எரிகிறது: எனவே கஸ்தூரி தலை,
வெள்ளத்தில் எங்கள் உணர்வுகள் வீழ்ந்தன.
புனித வார்த்தைகள் இந்த முடிவற்ற மந்திரம்
விரைவில் நம் உதடுகளைத் தடவி, நம் மனதைத் திணறச் செய்கிறது.

தேவி,
அவரது வர்ணம் பூசப்பட்ட மாணவர்களின் புகை மூலம் வெட்டப்பட்டது
மற்றும் நாம் நினைக்கும் இரகசிய எண்ணங்களை வாசிக்கவும்.
நாம் எப்படியாவது இதை நம் இதயத்தில் உணருகிறோம்.

அம்மாவுக்கு, நாங்கள் அறிவோம், நாங்கள் வணங்குகிறோம், ஜெபிக்கிறோம் –
அவள் களிமண்ணின் இந்த உருவம் மட்டும் அல்ல.

Navratri poem in gujarati

મંદિરના પાદરીએ તેની ઘંટડી ઉતારી છે.
મીણબત્તીઓ અને દીવાથી ધુમાડાના વાદળ
તેજસ્વી તેજસ્વી, દેવી Haloes
ડ્રમની આ બીટ, મૅડન્સ અને ડલ્સ બંને.

ધૂપ બાળી નાખે છે: જેથી મસ્તક મસ્તક,
પૂરમાં આપણી ઇન્દ્રિયો અસ્પષ્ટ છે.
પવિત્ર શબ્દોનો આ અનંત અવાજ
ટૂંક સમયમાં અમારા હોઠ માદક દ્રવ્યો અને આપણા મનને રોકે છે.

દેવી, હંમેશાં નીચે જતા રહે છે:
તેણીના પેઇન્ટેડ વિદ્યાર્થીઓ ધૂમ્રપાનથી કાપી નાખે છે
અને આપણે વિચારીએ છીએ તે ગુપ્ત વિચારોને વાંચો.
આપણે આપણા હૃદયમાં આને કોઈક રીતે અનુભવીએ છીએ.

માતાને, આપણે જાણીએ છીએ, આપણે ધૂપ અને પ્રાર્થના કરીએ છીએ –
તેના સ્વરૂપ માત્ર માટીની આ છબી નથી.

Navratri kavita in marathi

मंदिर पुजारी त्याच्या घंटा वाजवली आहे.
मेणबत्त्या आणि दिवे मधून धुराचा ढग
तेजस्वी चमकणारा देवी हेलोस
ड्रमचे हे मटके दोन्ही मडन्स आणि डल्स.

धूप जाळतात: मस्त मस्तकी,
पूर आपल्या इंद्रधनुष्य.
पवित्र शब्दांचा हा अंतहीन मंत्र
लवकरच आमचे ओठ ड्रग्स आणि आपले मन बंद करते.

देवी, नेहमीच खाली पडत असतात:
तिचे पेंट केलेले विद्यार्थी धुम्रपान करतात
आणि आम्ही विचार करतो त्या गुप्त कल्पना वाचा.
आपण आपल्या मनातल्या मनात हे असं जाणतो.

आईकडे, आम्ही जाणतो, धनुष्य आणि प्रार्थना करतो –
तिचे रूप फक्त मातीची ही प्रतिमाच नाही.

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