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नरसिंह जयंती व्रत कथा 2018 – Narsingh Jayanti Vrat Katha – नरसिंघ पूजा विधि

भगवान् नरसिंह भगवान् विष्णु के तीसरे अवतार थे| वे हिन्दू धर्म के देवता है| भगवान् नरसिंह का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है| बहुत सी पुराणिक कथाओ में उनके चमत्कारो का ज़िक्र है| कहा जाता है की उनका सर सिंह का था और शरीर मानव का था इसलिए उनका नाम नरसिंह था| नरसिंह शब्द का अर्थ है मानव सिंह| यह भी कहा जाता है की सर के साथ साथ उनके पंजे भी सिंह के थे| उनको भारत में और खासकर दक्षिणी भारत में पूजा जाता है जो की उनकी हर विपत्ति में उनकी मदद करते है| आज के इस पोस्ट में हम आपको नरसिंह व्रत विधि, नरसिंह अवतार कथा, नरसिंह अवतार की कथा, नरसिंह देवता, नरसिंह भगवान मंत्र, नरसिंह भगवान फोटो, नृसिंह भगवान, नरसिंह पूजा विधि, आदि की जानकारी देंगे|

नृसिंह जयंती व्रत कथा

नरसिंह भगवान् विष्णु के तीसरे अवतार थे| कहा जाता है की उनका अवतार लेने का एक महत्वपूर्ण कारण था| पुराणिक समय में एक क्रूर राजा था जिसका नाम हिरण्यकश्यप था| उसको भगवान् शिव और ब्रह्मा का वरदान था की उन्हें कोई भी जीव और कोई भी मनुष्य नहीं मार पाएगा| इस बात का फ़ायदा उठाकर वे अपने पुत्र को जान से मारना चाहता था| प्रहलाद जो की उनका पुत्र था वे विष्णु का भक्त था| यह बात जानकार हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को मारने को कहा परन्तु वे भी प्रहलाद को नहीं मार पाई| इसके बाद हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को अपनी तलवार से मारने का फैसला किया| उसी चढ़ नरसिंह भगवान् प्रकट हुए और अपने पंजो से हिरण्यकश्यप के हृदय को चीयर दिया| क्युकी भगवान् नरसिंह का सर शेर का था और बाकी का शरीर मनुष्य का था इसलिए वे उसे मारने में सफल रहे और प्रहलाद की रक्षा करने में भी| साथ ही आप व भी देख सकते हैं|साथ ही आप Narsingh Jayanti Puja Mantra व Narsingh Jayanti SMS भी देख सकते हैं|

नरसिंह जयंती पूजन विधि – Narsingh Jayanti Pujan Vidhi

Narsingh Jayanti Vrat Katha

Narasimha Jayanti Fast Vidhi इस प्रकार है:

नरसिंह जयंती के पर्व पर अगर आप व्रत रखते है तो आप इन विधानों के अनुसार पूजा कर सकते है| सबसे पहले प्रातःकाल सुबह उठकर नृतराकरिया करके स्नान करे| स्नान करने के बाद भगवान नरसिंह की मूर्ती के सामने जाकर यह कहे:

‘भगवन ! आज मैं आपका व्रत करूँगा। इसे निर्विघ्नता पूर्वक पूर्ण कराइये।’

इसके बाद पूरे दिन उनके नाम सा स्मरण करते हुए बिताए| इसके बाद शाम के समय किसी भी तालाब, नदी या जलाशय में जाकर मिट्टी, गोबर,आँवले का फल और तिल लेकर स्नान करके अपने पापो का प्राश्चित करे| इसके बाद पूजा के स्थान को गोबर के लीप से शुद्ध कर ले| फलो तथा अन्य सामग्री जैसे
भगवान नृसिंह की मूर्ति अथवा चित्र माँ लक्ष्मी के साथ (सोने अथवा किसी अन्य धातु या मिट्टी)
, हारीत और लीलावती की मूर्ति अथवा चित्र, ताँबे का कलश, कलश ढ़कने के लिये पात्र (ताँबे का), पंचरत्न (सोना, चांदी, मोती, मूंगा और लाजवर्त), धूप, दीप, अक्षत, चंदन, घी. नैवेद्य, ऋतुफल, कर्पूर, रूई की बाती, गंगाजल ,लोटा ,आचमनी, कच्चा दूध, दही, शर्करा, मधु(शहद), घी, पान का पत्ता (डंडी सहित), सुपारी, लौंग, इलायची, गुड़, सिक्के, पुष्प और पुष्पमाला के साथ मंडप तैयार करे| इसके बाद कलश में पञ्चरत्न डालकर अष्टदल कमल पर स्थापित करे| कलश के ऊपर ऊपर पात्र में अक्षत रखे| पात्र के ही ऊपर लक्ष्मी माता सहित नृसिंह भगवान को स्तापित करना होगा|

नरसिंह साधना

यह सब विधान करने के बाद पुष्प से एक –एक करते हुए तीन बूंद पानी अपने मुंह में छोड़िए और यह बोले

ॐ केशवाय नमः
ॐ नारायणाय नमः
ॐ वासुदेवाय नमः

फिर इसके बाद ॐ हृषिकेशाय नमः का जाप करे| इसके बाद गणेश भगवान् जी की पूजा करे और मंत्र जाप करे| पात्र के पास गणेश जी की मूर्ती रखकर पूजा करे| इसके बाद दोनों हाथ जोड़कर भगवान् नरसिंह के नाम का स्मरण करे| पुष्प से नरसिंह भगवान् को आवाहन करे| नरसिंह भगवान् की तीन बार आरती करे| इसके बाद यह प्राथना करे:

‘नृसिंह ! अच्युत ! देवेश्वर ! आपके शुभ जन्मदिन को मैं सब भोगों का परित्याग करके उपवास करूँगा । स्वामिन्। आप इससे प्रसन्न हों तथा मेरे पाप और जन्म के बन्धन को दूर करे।’ यों कहकर व्रत का पालन करे ।

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