Desh Bhakti Poem In Hindi – देश भक्ति पोएम इन हिंदी

देशभक्ति कविता 2016
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आपने कई प्रकार की कविताये पढ़ी होंगी और सुनी भी होंगी लेकिन क्या आप जानते है की हमारे कुछ देशभक्त कवि ऐसे भी हुए जिन्होंने की देश के ऊपर भी कई प्रकार की कविताये लिखी है | जिन कविताओं को पढ़ कर आपके अंदर से भी देश के लिए भक्ति भावना जाग उठेगी अगर आप भी कुछ बेहतरीन देशभक्ति की कविताये जानना चाहते है तो इसके लिए आप हमारी इस पोस्ट के माध्यम से कुछ बेहतरीन कविताये जान सकते है और उन्हें अपने अन्य दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते है |

देशभक्ति कविता 2016 | देश भक्ति पोयम्स इन हिंदी बय रबिन्द्रनाथ टैगोर


सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥
ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥
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पन्द्रह अगस्त का दिन कहता – आज़ादी अभी अधूरी है।
सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥
जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आई।
वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई॥
कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैं।
उनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं॥
हिन्दू के नाते उनका दुख सुनते यदि तुम्हें लाज आती।
तो सीमा के उस पार चलो सभ्यता जहाँ कुचली जाती॥
इंसान जहाँ बेचा जाता, ईमान ख़रीदा जाता है।
इस्लाम सिसकियाँ भरता है,डालर मन में मुस्काता है॥
भूखों को गोली नंगों को हथियार पिन्हाए जाते हैं।
सूखे कण्ठों से जेहादी नारे लगवाए जाते हैं॥
लाहौर, कराची, ढाका पर मातम की है काली छाया।
पख़्तूनों पर, गिलगित पर है ग़मगीन ग़ुलामी का साया॥
बस इसीलिए तो कहता हूँ आज़ादी अभी अधूरी है।
कैसे उल्लास मनाऊँ मैं? थोड़े दिन की मजबूरी है॥
दिन दूर नहीं खंडित भारत को पुनः अखंड बनाएँगे।
गिलगित से गारो पर्वत तक आजादी पर्व मनाएँगे॥
उस स्वर्ण दिवस के लिए आज से कमर कसें बलिदान करें।
जो पाया उसमें खो न जाएँ, जो खोया उसका ध्यान करें॥
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देश प्रेम पर छोटी कविता


Maathe par giri-raj himalay
Baccho apni shan hai dikhaata
Charno mein bhaarat mata key
Saagar bhi hai sheesh jhukaata
Paschhim aur purab ke jungal mein
Bhaag sher sab paye jaatey
Nadiyo mein ghadiyaal magar sub
Apnaa roop dikhaatey
Mitti ore hawaa deti hai
Dharti ko mohak pareevesh
Issi liye toh pyaare baccho
Anokha sabsey bhaarat desh!
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Nanhe nanhe pyaare pyaare,
Gulshan ko mehakaane waale,
Sitaare jamin par laane waale
Hum bachche Hindustan ke.
Naye jamaane ke diwaale,
Toofaan se na darnw waale,
Kahalaate hain himmat waale,
Hum bachche Hindustan ke.
Chalate hain hum shaan se,
Bachate hain hum dvesh se,
Aan pe ho jaayein kurbaan,
Hum bachche Hindustan ke.
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देश भक्ति बाल कविता


प्यार तो हमने भी किया ,उसके लिए अपना दिल भी दिया।
उसने हर बार की तरह, इस बार भी मुझे धोखा दिया।।
मुझे अनजान रखकर, उसने भी मुझसे इतना प्यार किया।
कि मेरे लिए सीमा पर उसने, अपनी जान तक दे दीया।।
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ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा,
बहानें लहू हम आयें हैं,
जिन्दगी देनें हम आयें हैं,
हर शाख अब लहराएगा,
हर फूल मुस्कुराएगा,
ताकत हमारी चट्टानों सी,
मुहब्बत हमारी फूलों सी,
सारा जहाँ मुस्कुराएगा,
जवान विजय होके जब आएगा,
ये वक्त भी रूक जाएगा,
आसमाँ झुक जाएगा,
धरती कहे तू आ गया,
कोई भी ना बच पाएगा,
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भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
सारा ही देश आज
झूमा है मस्ती में,
देखो ख़ुशी छाई है
हर एक बस्ती में |
स्वाधीनता की खुशियाँ लहराओं रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओं रे |
आज तो गगन में भी
उल्लास छाया है,
देशभक्ति का देखो
कैसा रंग छाया है |
देश के सपूतों, आज देशभक्ति पाओ रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
याद करो उनको आज
मरकर जो अमर हुए,
कल्पना करो ज़रा
अन्याय जो बर्बर हुए |
संजोयेंगे स्वतंत्रता कसम मिलकर खाओं रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
सोचो स्वतंत्रता हित
क्या-क्या नहीं खोया है,
देश के बलिदानियों को
सारा देश रोया है |
देश के सपूतों से प्रेरणा को पाओ रे |
भारत के लाल आज झूम-झूम गाओ रे |
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Desh Bhakti Poem In Hindi

Poem On desh Bhakti In Hindi


यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
इस देश का कण कण हमें प्यारा हमें प्यारा
इस देश के इतिहास में
गौरव की कथाएँ
इस देश के बलिदान की
चलती हैं हवाएँ
इस देख का भूगोल है हम सबको सहारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
भंडार संपदा का
हर पर्वत यहाँ रहा
पानी नहीं नदियों में
जीवन यहाँ बहा
मोती उड़ेलता है यह सिंधु भी खारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
इस देश की संस्कृति
रही सौहार्द सनी है
संस्कृति सहिष्णुता के
विचारों से बनी है
दुनिया का भला हमने ही हरदम है विचारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
इस देश की मिट्टी में
धर्म फूले फले हैं
हम उँगलियाँ सभी की
थाम थाम चले हैं
यह देश रहा है सभी देशों का दुलारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
इस देश ने उपकार हैं
हम पर बहुत किए
हो कौल जिएँ या मरें
हम देश के लिए
हर साँस करे देश के गौरव का पसारा
यह देश हमारा है, हमारा है हमारा
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सैनिकों पर हिंदी में देशभक्ति कविता


कर गयी पैदा तुझे उस कोख का एहसान है
सैनिकों के रक्त से आबाद हिन्दुस्तान है
तिलक किया मस्तक चूमा बोली ये ले कफन तुम्हारा
मैं मां हूं पर बाद में, पहले बेटा वतन तुम्हारा
धन्य है मैया तुम्हारी भेंट में बलिदान में
झुक गया है देश उसके दूध के सम्मान में
दे दिया है लाल जिसने पुत्र मोह छोड़कर
चाहता हूं आंसुओं से पांव वो पखार दूं
ए शहीद की मां आ तेरी मैं आरती उतार लूं
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चंदन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || ध्रु ||
हर शरीर मंदिर सा पावन हर मानव उपकारी है
जहॉं सिंह बन गये खिलौने गाय जहॉं मॉं प्यारी है
जहॉं सवेरा शंख बजाता लोरी गाती शाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 1 ||
जहॉं कर्म से भाग्य बदलता श्रम निष्ठा कल्याणी है
त्याग और तप की गाथाऍं गाती कवि की वाणी है
ज्ञान जहॉं का गंगाजल सा निर्मल है अविराम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है || 2 ||
जिस के सैनिक समरभूमि मे गाया करते गीता है
जहॉं खेत मे हल के नीचे खेला करती सीता है
जीवन का आदर्श जहॉं पर परमेश्वर का धाम है
हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है ||
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भारत पर कविता


जब सूरज संग हो जाए अंधियार के, तब दीये का टिमटिमाना जरूरी है…
जब प्यार की बोली लगने लगे बाजार में, तब प्रेमी का प्रेम को बचाना जरूरी है……
जब देश को खतरा हो गद्दारों से, तो गद्दारों को धरती से मिटाना जरूरी है….
जब गुमराह हो रहा हो युवा देश का, तो उसे सही राह दिखाना जरूरी है………..
जब हर ओर फैल गई हो निराशा देश में, तो क्रांति का बिगुल बजाना जरूरी है…..
जब नारी खुद को असहाय पाए, तो उसे लक्ष्मीबाई बनाना जरूरी है…………
जब नेताओं के हाथ में सुरक्षित न रहे देश, तो फिर सुभाष का आना जरूरी है……
जब सीधे तरीकों से देश न बदले, तब विद्रोह जरूरी है……………..
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यारा प्यारा मेरा देश,
सजा – संवारा मेरा देश॥
दुनिया जिस पर गर्व करे,
नयन सितारा मेरा देश॥
चांदी – सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश॥
सुख का कोना मेरा देश,
फूलों वाला मेरा देश॥
झुलों वाला मेरा देश,
गंगा यमुना की माला का मेरा देश॥
फूलोँ वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश॥
नित नए मुस्काएं मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखायें मेरा देश॥
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