देशभक्ति कविताएँ 2018 -Desh Bhakti Kavita in Hindi – कविता संग्रह बच्चों के लिए

गणतंत्र दिवस २०१८ (26 जनवरी) आने में कुछ दिन बचे हैं और स्कूल के बच्चों को गणतंत्र दिवस पर कविताएं यानी कि हमारे देश भक्तों के ऊपर कविता लिखने को दी जाती हैं आज हम आपके सामने कुछ ऐसी ही देश भक्ति की कविताएं पेश करेंगे जिन्हें स्कूल के बच्चे कक्षा 1,2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 व 10 के विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं| इन कविताओं को पढ़कर आपके अंदर भी देश के लिए देशभक्ति की भावना जाग उठेगी और आप भी हमारे भारत देश के प्रति अपना प्यार सम्मान जाहिर कर पाएंगे| आइये देखें कुछ देशभक्ति पर सर्वश्रेष्ठ कविताएँ |जय हिन्द ! जय भारत ! भारत माता की जय!

Desh bhakti kavitayen in hindi

Desh bhakti kavita in hindi इस प्रकार हैं | इसके अलावा आप देशभक्ति पोएम इन हिंदी भी देख सकते हैं|

जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा

Desh Bhakti Kavita in Hindi


जहाँ डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा
वो भारत देश है मेरा
जहाँ सत्य, अहिंसा और धर्म का पग-पग लगता डेरा
वो भारत देश है मेरा
ये धरती वो जहाँ ऋषि मुनि जपते प्रभु नाम की माला
जहाँ हर बालक एक मोहन है और राधा हर एक बाला
जहाँ सूरज सबसे पहले आ कर डाले अपना फेरा
वो भारत देश है मेरा
अलबेलों की इस धरती के त्योहार भी हैं अलबेले
कहीं दीवाली की जगमग है कहीं हैं होली के मेले
जहाँ राग रंग और हँसी खुशी का चारों ओर है घेरा
वो भारत देश है मेरा
जब आसमान से बातें करते मंदिर और शिवाले
जहाँ किसी नगर में किसी द्वार पर कोई न ताला डाले
प्रेम की बंसी जहाँ बजाता है ये शाम सवेरा
वो भारत देश है मेरा
– राजेंद्र किशन
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आज तिरंगा फहराता है

देशभक्ति कविता बच्चों के लिए


आज तिरंगा फहराता है अपनी पूरी शान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
आज़ादी के लिए हमारी लंबी चली लड़ाई थी।
लाखों लोगों ने प्राणों से कीमत बड़ी चुकाई थी।।
व्यापारी बनकर आए और छल से हम पर राज किया।
हमको आपस में लड़वाने की नीति अपनाई थी।।
हमने अपना गौरव पाया, अपने स्वाभिमान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
गांधी, तिलक, सुभाष, जवाहर का प्यारा यह देश है।
जियो और जीने दो का सबको देता संदेश है।।
प्रहरी बनकर खड़ा हिमालय जिसके उत्तर द्वार पर।
हिंद महासागर दक्षिण में इसके लिए विशेष है।।
लगी गूँजने दसों दिशाएँ वीरों के यशगान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
हमें हमारी मातृभूमि से इतना मिला दुलार है।
उसके आँचल की छैयाँ से छोटा ये संसार है।।
हम न कभी हिंसा के आगे अपना शीश झुकाएँगे।
सच पूछो तो पूरा विश्व हमारा ही परिवार है।।
विश्वशांति की चली हवाएँ अपने हिंदुस्तान से।
हमें मिली आज़ादी वीर शहीदों के बलिदान से।।
सजीवन मयंक'
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उठो धरा के अमर सपूतों


उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।
जन-जन के जीवन में फिर से
नव स्फूर्ति, नव प्राण भरो।
नई प्रात है नई बात है
नया किरन है, ज्योति नई।
नई उमंगें, नई तरंगें
नई आस है, साँस नई।
युग-युग के मुरझे सुमनों में
नई-नई मुस्कान भरो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।1।।
डाल-डाल पर बैठ विहग कुछ
नए स्वरों में गाते हैं।
गुन-गुन, गुन-गुन करते भौंरें
मस्त उधर मँडराते हैं।
नवयुग की नूतन वीणा में
नया राग, नव गान भरो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।2।।
कली-कली खिल रही इधर
वह फूल-फूल मुस्काया है।
धरती माँ की आज हो रही
नई सुनहरी काया है।
नूतन मंगलमय ध्वनियों से
गुँजित जग-उद्यान करो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।3।।
सरस्वती का पावन मंदिर
शुभ संपत्ति तुम्हारी है।
तुममें से हर बालक इसका
रक्षक और पुजारी है।
शत-शत दीपक जला ज्ञान के
नवयुग का आह्वान करो।
उठो, धरा के अमर सपूतों।
पुन: नया निर्माण करो।।4।।
-द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
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देशभक्ति बाल कविता

बच्चों की देशभक्ति कविता इस प्रकार हैं:

ऐ मेरे प्यारे वतन


ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे बिछड़े चमन तुझ पे दिल कुरबान तू ही मेरी आरजू़, तू ही मेरी आबरू तू ही मेरी जान तेरे दामन से जो आए  उन हवाओं को सलाम चूम लूँ मैं उस जुबाँ को  जिसपे आए तेरा नाम सबसे प्यारी सुबह तेरी सबसे रंगी तेरी शाम तुझ पे दिल कुरबान   माँ का दिल बनके कभी सीने से लग जाता है तू और कभी नन्हीं-सी बेटी बन के याद आता है तू जितना याद आता है मुझको उतना तड़पाता है तू तुझ पे दिल कुरबान   छोड़ कर तेरी ज़मीं को  दूर आ पहुँचे हैं हम फिर भी है ये ही तमन्ना तेरे ज़र्रों की कसम हम जहाँ पैदा हुए उस जगह पे ही निकले दम तुझ पे दिल कुरबान   - प्रेम धवन 16 अगस्त 2006
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छोटी देशभक्ति कविताएँ

देशभक्ति कविता बच्चों के लिए इस प्रकार हैं:

Patriotic Hindi Desh Bhakti Poem

छोटी देशभक्ति कविताएँ

होंगे कामयाब


होंगे कामयाब,
हम होंगे कामयाब एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम होंगे कामयाब एक दिन।
हम चलेंगे साथ-साथ
डाल हाथों में हाथ
हम चलेंगे साथ-साथ, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
हम चलेंगे साथ-साथ एक दिन।
होगी शांति चारों ओर, एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
होगी शांति चारों ओर एक दिन।
नहीं डर किसी का आज एक दिन
मन में है विश्वास, पूरा है विश्वास
नहीं डर किसी का आज एक दिन।
– गिरिजा कुमार माथुर
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यारा प्यारा मेरा देश


यारा प्यारा मेरा देश,
सजा – संवारा मेरा देश॥
दुनिया जिस पर गर्व करे,
नयन सितारा मेरा देश॥
चांदी – सोना मेरा देश,
सफ़ल सलोना मेरा देश॥
सुख का कोना मेरा देश,
फूलों वाला मेरा देश॥
झुलों वाला मेरा देश,
गंगा यमुना की माला का मेरा देश॥
फूलोँ वाला मेरा देश
आगे जाए मेरा देश॥
नित नए मुस्काएं मेरा देश
इतिहासों में नाम लिखायें मेरा देश॥
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सरफ़रोशी की तमन्ना – राम प्रसाद बिस्मिल


सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है
करता नहीं क्यूँ दूसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
ए शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार,
अब तेरी हिम्मत का चरचा गैर की महफ़िल में है
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमान,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है
खैंच कर लायी है सब को कत्ल होने की उम्मीद,
आशिकों का आज जमघट कूच-ए-कातिल में है
यूँ खड़ा मक़तल में क़ातिल कह रहा है बार-बार,
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है
वो जिस्म भी क्या जिस्म है जिसमें ना हो खून-ए-जुनून
तूफ़ानों से क्या लड़े जो कश्ती-ए-साहिल में है,
हाथ जिन में हो जुनूँ कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से
और भड़केगा जो शोला-सा हमारे दिल में है,
है लिये हथियार दुशमन ताक में बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर
खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है,
हम तो घर से निकले ही थे बाँधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली पर लिये लो बढ चले हैं ये कदम
जिन्दगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल में है,
दिल में तूफ़ानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उड़ा देंगे हमें रोको ना आज
दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंज़िल में है||
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देशभक्ति पर कविता


आज जीत की रात
पहरुए! सावधान रहना
खुले देश के द्वार
अचल दीपक समान रहना
२
प्रथम चरण है नये स्वर्ग का
है मंज़िल का छोर
इस जन-मंथन से उठ आई
पहली रत्न-हिलोर
अभी शेष है पूरी होना
जीवन-मुक्ता-डोर
क्यों कि नहीं मिट पाई दुख की
विगत साँवली कोर
ले युग की पतवार
बने अंबुधि समान रहना।
३
विषम शृंखलाएँ टूटी हैं
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलतीं
युग-बंदिनी हवाएँ
प्रश्नचिह्न बन खड़ी हो गयीं
यह सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएँ
उठता है तूफान, इंदु! तुम
दीप्तिमान रहना।
४
ऊंची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से है मृत समाज
कमज़ोर हमारा घर है
किन्तु आ रहा नई ज़िन्दगी
यह विश्वास अमर है
जन-गंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
पहरुए! सावधान रहना।।
गिरिजाकुमार माथुर
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आज़ादी का गीत


हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजती गुड़ियाँ।
इनसे आतंकित करने की बीत गई घड़ियाँ
इनसे सज धज बैठा करते जो हैं कठपुतले
हमने तोड़ अभी फेंकी हैं बेड़ी हथकड़ियाँ
परंपरा गत पुरखों की हमने जाग्रत की फिर से
उठा शीश पर रक्खा हमने हिम किरीट उज्जवल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
चाँदी सोने हीरे मोती से सजवा छाते
जो अपने सिर धरवाते थे वे अब शरमाते
फूलकली बरसाने वाली टूट गई दुनिया
वज्रों के वाहन अंबर में निर्भय घहराते
इंद्रायुध भी एक बार जो हिम्मत से ओटे
छत्र हमारा निर्मित करते साठ कोटि करतल
हम ऐसे आज़ाद हमारा झंडा है बादल।
- हरिवंश राय बच्चन
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आग बहुत-सी बाकी है


भारत क्यों तेरी साँसों के, स्वर आहत से लगते हैं,
अभी जियाले परवानों में, आग बहुत-सी बाकी है।
क्यों तेरी आँखों में पानी, आकर ठहरा-ठहरा है,
जब तेरी नदियों की लहरें, डोल-डोल मदमाती हैं।
जो गुज़रा है वह तो कल था, अब तो आज की बातें हैं,
और लड़े जो बेटे तेरे, राज काज की बातें हैं,
चक्रवात पर, भूकंपों पर, कभी किसी का ज़ोर नहीं,
और चली सीमा पर गोली, सभ्य समाज की बातें हैं।कल फिर तू क्यों, पेट बाँधकर सोया था, मैं सुनता हूँ,
जब तेरे खेतों की बाली, लहर-लहर इतराती है।अगर बात करनी है उनको, काश्मीर पर करने दो,
अजय अहूजा, अधिकारी, नय्यर, जब्बर को मरने दो,
वो समझौता ए लाहौरी, याद नहीं कर पाएँगे,
भूल कारगिल की गद्दारी, नई मित्रता गढ़ने दो,ऐसी अटल अवस्था में भी, कल क्यों पल-पल टलता है,
जब मीठी परवेज़ी गोली, गीत सुना बहलाती है।चलो ये माना थोड़ा गम है, पर किसको न होता है,
जब रातें जगने लगती हैं, तभी सवेरा सोता है,जो अधिकारों पर बैठे हैं, वह उनका अधिकार ही है,
फसल काटता है कोई, और कोई उसको बोता है।क्यों तू जीवन जटिल चक्र की, इस उलझन में फँसता है,
जब तेरी गोदी में बिजली कौंध-कौंध मुस्काती है।- अभिनव शुक्ला
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Patriotic Hindi Desh Bhakti Poem

Short Desh Bhakti Poem in Hindi

हमारे भारत देश को आज़ादी दिलवाने में चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखराज, सुभाष चंद्र बोस, लाला लाजपत राय व महात्मा गांधी आदि शामिल थे | 26 जनवरी आने वाली है यानी गणतंत्र दिवस (रिपब्लिक डे) के उपलक्ष में आप Desh Bhakti Shayari in Hindi देख सकते हैं|

ऐ मातृभूमि! तेरी जय हो


ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो
अज्ञान की निशा में, दुख से भरी दिशा में
संसार के हृदय में तेरी प्रभा उदय हो
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो
वह भक्ति दे कि 'बिस्मिल' सुख में तुझे न भूले
वह शक्ति दे कि दुख में कायर न यह हृदय हो
- रामप्रसाद बिस्मिल
16 अगस्त 2006
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देश भक्ति पोयम्स इन हिंदी बय रबिन्द्रनाथ टैगोर

सारे जहाँ से अच्छा


सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी वह गुलिस्तां हमारा ॥
ग़ुर्बत में हों अगर हम रहता है दिल वतन में।
समझो वहीं हमें भी दिल हो जहाँ हमारा ॥
परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का।
वो संतरी हमारा वो पासवां हमारा ॥
गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियां।
गुलशन है जिसके दम से रश्के जिनां हमारा॥
ऐ आबे रोदे गंगा वह दिन है याद तुझको।
उतरा तेरे किनारे जब कारवां हमारा ॥
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना।
हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा ॥
यूनान, मिस्र, रोमा सब मिट गए जहां से।
अब तक मगर है बाकी नामों निशां हमारा ॥
कुछ बात है कि हस्ती मिटती मिटाये।
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जमां हमारा ॥
‘इक़बाल’ कोई महरम अपना नहीं जहां में।
मालूम क्या किसी को दर्दे निहां हमारा ॥
सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।
हम बुलबुलें हैं इसकी यह गुलिसतां हमारा॥
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Deshbhakti kavitayen 2018

kavita/veer ras/desh bhakti इस प्रकार हैं | इसके अलावा आप 26 जनवरी नारे भी देख सकते हैं|

ऐ मेरे वतन के लोगों


ऐ मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
ये शुभ दिन है हम सब का लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर वीरों ने है प्राण गँवाए
कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर ना आए
ऐ मेरे वतन के लोगों ज़रा आँख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जब घायल हुआ हिमालय ख़तरे में पड़ी आज़ादी
जब तक थी साँस लड़े वो फिर अपनी लाश बिछा दी
संगीन पे धर कर माथा सो गए अमर बलिदानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जब देश में थी दीवाली वो खेल रहे थे होली
जब हम बैठे थे घरों में वो झेल रहे थे गोली
क्या लोग थे वो दीवाने क्या लोग थे वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
कोई सिख कोई जाट मराठा कोई गुरखा कोई मदरासी
सरहद पर मरनेवाला हर वीर था भारतवासी
जो खून गिरा पर्वत पर वो खून था हिंदुस्तानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
थी खून से लथ-पथ काया फिर भी बंदूक उठाके
दस-दस को एक ने मारा फिर गिर गए होश गँवा के
जब अंत-समय आया तो कह गए के अब मरते हैं
खुश रहना देश के प्यारों अब हम तो सफ़र करते हैं
थे धन्य जवान वो अपने
थी धन्य वो उनकी जवानी
जो शहीद हुए हैं उनकी ज़रा याद करो कुरबानी
जय हिंद जय हिंद की सेना
जय हिंद, जय हिंद, जय हिंद
- प्रदीप
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वीर तुम बढ़े चलो!

वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
हाथ में ध्वजा रहे बाल दल सजा रहे
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
प्रात हो कि रात हो संग हो न साथ हो
सूर्य से बढ़े चलो चन्द्र से बढ़े चलो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
एक ध्वज लिये हुए एक प्रण किये हुए
मातृ भूमि के लिये पितृ भूमि के लिये
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
अन्न भूमि में भरा वारि भूमि में भरा
यत्न कर निकाल लो रत्न भर निकाल लो
वीर तुम बढ़े चलो! धीर तुम बढ़े चलो!
– द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
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Indian Patriotic Poems in Hindi

देश-प्रेम (Desh bhakti kavita download)


Maathe par giri-raj himalay
Baccho apni shan hai dikhaata
Charno mein bhaarat mata key
Saagar bhi hai sheesh jhukaata
Paschhim aur purab ke jungal mein
Bhaag sher sab paye jaatey
Nadiyo mein ghadiyaal magar sub
Apnaa roop dikhaatey
Mitti ore hawaa deti hai
Dharti ko mohak pareevesh
Issi liye toh pyaare baccho
Anokha sabsey bhaarat desh!
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Nanhe nanhe pyaare pyaare,
Gulshan ko mehakaane waale,
Sitaare jamin par laane waale
Hum bachche Hindustan ke.
Naye jamaane ke diwaale,
Toofaan se na darnw waale,
Kahalaate hain himmat waale,
Hum bachche Hindustan ke.
Chalate hain hum shaan se,
Bachate hain hum dvesh se,
Aan pe ho jaayein kurbaan,
Hum bachche Hindustan ke.
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वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
तुम से ही तो हम सब हैं
तुम नहीं तो कुछ नहीं….
तुम नहीं होते, तो ये देश हो जाता वीरान
तुम हीं हो पूरे हिन्द की जान
तुमसे हीं ये है हिन्दुस्तान
तुमसे हीं सरहदें सुरक्षित हैं
तुमसे हीं माँ-बहनें सुरक्षित हैं
तहे दिल से सलाम है उस माँ को
जिसने तुम जैसे वीर को जन्म दिया
जिस माँ ने भारत माँ को अपने बेटे को सौंप दिया
तहे दिल से सलाम है तुम्हारी बहादुरी को जवान
सलाम है, तुम्हारी निःस्वार्थ भावना को
अपने खून बहाकर भी लोगों की रक्षा करना कोई तुमसे सीखे
हर दर्द सहते हुए भी जिंदादिली से जीना कोई तुमसे सीखे
राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व लुटाना कोई तुमसे सीखे
मेरी क्या बिसाद जो मैं कुछ लिख सकूं तुम्हारी शान में …
मेरे तो शब्द भी तुच्छ पड़ जाते हैं………..
तुम्हारे तेज, तुम्हारी बहादुरी और तुम्हारी बुद्धि के आगे…..
हर कोई तुम्हारी तरह हो भारत पर हो कुर्बान
भारत माँ के सच्चे प्रहरी तुम हीं हो वीर जवान …
तुमसे हीं है देश की आन बान शान….
वीर तुम बढ़े चलो, तुम्हारे साथ है पूरा हिन्दुस्तान
– नमिता कुमारी
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1 Response

  1. Manoj Kumar Gupta says:

    thanks

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