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दुर्गा बीज मंत्र – सप्तशती चमत्कारी मंत्र – Durga Saptashati Beej Mantra in Hindi

नवरात्रे के समय दुर्गा सप्तशती मन्त्र का पाठ करने से आपकी हर समस्या ख़त्म हो जाएगी| किसी भी प्रकार की मुश्किल या परेशानी से निपटने के लिए अलग विशेष मंत्र होते हैं | ये मंत्र काफी लाभदायक होते हैं और जल्द ही कारगर साबित होते हैं| अगर आप मंत्रों का उच्चारण सही से नहीं कर पाएं तो आप एक अच्छे व योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवा सकते हैं। इसीलिए आज हम आपको बताएंगे दुर्गा जी का बीज मंत्र जिसका पाठ करने से आपके जीवन में अत्यंत सकर्रातमकता आएगी व साथ ही आप के जीवन की साड़ी समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी|

बीज मंत्र क्या है?

बीज मंत्र एक मंत्र का सबसे छोटा रूप है, जो की अलग-अलग देवताओं के लिए होता है| माँ दुर्गा मंत्र का बीज मंत्र, जब एक साथ पठित किया जाता है तो मनुष्य को बहुत सारी सकारात्मक ऊर्जा और सभी देवताओं के आशीर्वाद मिलते हैं। दुर्गा सप्तशती बीज मंत्र साधना से आपके जीवन से सारी परेशानियां मिट जाती हैं|

माँ दुर्गा का बीज मंत्र

दुर्गा सप्तशती के सिद्ध चमत्कारी मंत्र इस प्रकार हैं| इनको विधि पूर्ण तरीके से करने से आपकी सारी परेशानी खत्म हो जाती हैं|

Maa Durga Beej Mantra in hindi

गरीबी मिटाने के लिए

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो:
स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदाद्र्रचिता।।

रक्षा के लिए

शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके।
घण्टास्वनेन न: पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।

स्वर्ग और मुक्ति के लिए

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हदि संस्थिते।
स्वर्गापर्वदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।।

सुंदर पत्नी के लिए मंत्र

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।

मोक्ष प्राप्ति के लिए

त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या
विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत्
त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतु:।।

सपने में सिद्धि-असिद्धि जानने का मंत्र

दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके।
मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।

सभी के कल्याण के लिए मंत्र

देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या
निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां
भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा न: ।।

भय नाश के लिए

यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो
ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय
नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।

रोग नाश के लिए

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा
रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान् ।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।

बाधा शांति के लिए

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनासनम्।।

विपत्ति के नाश के लिए मंत्र

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद
प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं
त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।

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