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दहेज प्रथा पर निबंध – Dahej Pratha par Nibandh – Short Essay on dowry practice in Hindi 300 words

Dahej par essay: भारत में पुराने समय से ही बहुत सी कुरीतिक प्रथाए चली आ रही है जिसकी वजह से महिलाओ पर बहुत अत्याचार होता है| दहेज़ प्रथा उन्ही में से एक है| यह प्रथा पुराने समय से चली आ रही है और अब भी काम नहीं हुई है| इस प्रथा के चलते लड़की के माँ और पिता को शादी करवाने के लिए बहुत भारी दहेज़ या पैसे देने पड़ते है जो की एक गलत कार्य है| आज के समय में लड़किया लड़को के कंधे से खंडा मिलाते हुए चलती आ रही है तो इस प्रथा का होना ग़ैरक़ानूनीक है| आज के इस पोस्ट में हम आपको दहेज प्रथा पर निबंध wikipedia, दहेज प्रथा पर निबंध हिंदी में, दहेज प्रथा पर निबंध लिखे, दहेज प्रथा एक अभिशाप पर निबंध, आदि की जानकारी देंगे|

Dahej Pratha Par Nibandh In Hindi

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भारत में दहेज एक पुरानी प्रथा है । मनुस्मृति मे ऐसा उल्लेख आता है कि माता-कन्या के विवाह के समय दाय भाग के रूप में धन-सम्पत्ति, गउवें आदि कन्या को देकर वर को समर्पित करे ।

यह भाग कितना होना चाहिए, इस बारे में मनु ने उल्लेख नहीं किया । समय बीतता चला गया स्वेच्छा से कन्या को दिया जाने वाला धन धीरे-धीरे वरपक्ष का अधिकार बनने लगा और वरपक्ष के लोग तो वर्तमान समय में इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही मान बैठे हैं ।

अखबारों में अब विज्ञापन निकलते है कि लड़के या लडकी की योग्यता इस प्रकार हैं । उनकी मासिक आय इतनी है और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बहुत सम्माननीय है । ये सब बातें पढ़कर कन्यापक्ष का कोई व्यक्ति यदि वरपक्ष के यहा जाता है तो असली चेहरा सामने आता है । वरपक्ष के लोग घुमा-फिराकर ऐसी कहानी शुरू करते हैं जिसका आशय निश्चित रूप से दहेज होता है ।

दहेज मांगना और देना दोनों निन्दनीय कार्य हैं । जब वर और कन्या दोनों की शिक्षा-दीक्षा एक जैसी है, दोनों रोजगार में लगे हुए हैं, दोनों ही देखने-सुनने में सुन्दर हैं, तो फिर दहेज की मांग क्यों की जाती है? कन्यापक्ष की मजबूरी का नाजायज फायदा क्यों उठाया जाता है?

शायद इसलिए कि समाज में अच्छे वरों की कमी है तथा योग्य लड़के बड़ी मुश्किल से तलाशने पर मिलते हैं । हिन्दुस्तान में ऐसी कुछ जातियां भी हैं जो वर को नहीं, अपितु कन्या को दहेज देकर ब्याह कर लेते हैं; लेकिन ऐसा कम ही होता है । अब तो ज्यादातर जाति वर के लिए ही दहेज लेती हैं ।

दहेज प्रथा पर निबंध 300 शब्द

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Dahej Pratha par Nibandh

दहेज प्रथा, जिसमें दुल्हन के परिवार को दूल्हे के परिवार के लिए नकदी के रूप में उपहार देने और कीमती चीजें देना भी शामिल है, की काफी हद तक समाज द्वारा निंदा की जाती है लेकिन कुछ लोगों का तर्क यह भी है कि इसका अपना महत्व है और लोग अभी भी इसका अनुसरण कर रहे हैं तथा यह दुल्हन को कई तरीकों से लाभ पहुँचा रही है।

कई दंपति इन दिनों स्वतंत्र रूप से रहना पसंद करते हैं और उनको दहेज में मिली ज्यादातर नकदी, फर्नीचर, कार और अन्य ऐसी संपत्तियां शामिल हैं जो उनके लिए वित्तीय सहायता के रूप में काम करती हैं और उन्हें अपना नया जीवन शुरू करने में मदद करती हैं। शादी के वक़्त दोनों दूल्हा और दुल्हन अपना कैरियर शुरू करते हैं और वे आर्थिक रूप से इतने अच्छे नहीं होते कि वे इतने ज्यादा खर्चों को एक बार में वहन कर सकें। लेकिन क्या यह एक वैध कारण है? यदि यह मामला है तो दुल्हन के परिवार पर पूरा बोझ डालने के बजाए दोनों परिवारों को उन्हें बसाने में निवेश करना चाहिए। इसके अलावा यह यह भी हो सकता है कि यदि दोनों परिवार नव-दम्पति को बिना ऋण वित्तीय सहायता प्रदान करें।

कई लोग यह भी तर्क देते हैं कि जो लड़कियां दिखने में अच्छी नहीं होती वे दूल्हे की वित्तीय मांगों को पूरा करके शादी कर लेती हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि लड़कियों को बोझ के रूप में देखा जाता है और जैसे ही वे बीस वर्ष की उम्र पार कर लेती हैं उनके माता-पिता की प्राथमिकता यही रहती है कि वे उनकी शादी कर दें। ऐसे मामलों में भारी दहेज देना और यह बुरी प्रथा उन लोगों के लिए वरदान जैसी होती है जो अपनी बेटियों के लिए दूल्हा खरीदने में सक्षम हैं। हालांकि अब ऐसा समय है जब ऐसी सोच को बदलना चाहिए।

दहेज प्रथा के समर्थकों द्वारा यह भी माना जाता है कि दुल्हन और उनके परिवार को भारी मात्रा में उपहार उपलब्ध कराने की स्थिति में समाज में उनके परिवार की इज्ज़त बढ़ जाती है। हालांकि आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर मामलों में इसने लड़कियों के खिलाफ काम किया है।

दहेज प्रथा के अधिवक्ता इसका समर्थन करने के लिए विभिन्न अनुचित कारणों का समर्थन कर सकते हैं लेकिन तथ्य यह है कि यह पूरी तरह से समाज को अधिक नुकसान पहुंचाता है।

दहेज प्रथा पर निबंध 200 शब्दों में

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दहेज प्रथा में दुल्हन के माता-पिता द्वारा शादी के समय एक शर्त के रूप में दूल्हे के परिवार को बड़ी मात्रा में नकद, आभूषण और अन्य उपहार देने की आवश्यकता पड़ती है। भारत में किसी कारण की वजह से प्रणाली को शुरू किया गया था और वह यह था कि कुछ दशक पहले तक लड़की के पास माता-पिता की संपत्ति और अन्य अचल संपत्तियों पर कोई अधिकार नहीं था और उन्हें इसके बदले नकदी, आभूषण और अन्य सामान जैसी संपत्ति दे दी जाती थी। धीरे-धीरे गुज़रते समय के साथ यह बुरी सामाजिक प्रथा में बदल गई है।

धन और संपत्ति माता-पिता दहेज के रूप में अपनी बेटी को देने का इरादा रखते हैं ताकि वह नए स्थान पर परेशानी महसूस ना करें, दुर्भाग्य से, ज्यादातर मामलों में दूल्हे का सारा परिवार उस पर कब्ज़ा जमा लेता है। इसके अलावा पहले यह दुल्हन के माता-पिता का स्वैच्छिक निर्णय होता था इन दिनों यह उनके लिए एक मजबूरी बन गया है।

दुल्हन पर पर्याप्त दहेज नहीं लाने के लिए शारीरिक रूप और भावनात्मक रूप से अत्याचार के कई मामले उजागर हुए। कई मामलों में दुल्हन अपने ससुराल वालों की मांगों को पूरा करने के लिए अपने परिवार से गुहार करती है जबकि अन्य महिलाएं अपने जीवन को खत्म करने का विकल्प चुनती हैं। यह सही समय है कि भारत सरकार को इस बुरी प्रथा को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

दहेज प्रथा पर निबंध 100 शब्दों में

लड़की की शादी के समय लड़की के परिवार वालों के द्वारा लड़के या उसके परिवार वालों को नगद या किसी भी प्रकार की किमती चीज़ बिना मूल्य में देने को दहेज़ कहा जाता है| जिसका अर्थ लड़के की परिवार वालों के द्वारा लड़के की मूल्य भी समझा जा सकता है| दहेज प्रथा एक सामाजिक समस्या है| दहेज प्रथा गैर कानूनी होने के बावजूद भी ये हमारे समाज में खुली तौर पर राज़ करती है|दहेज प्रथा एक सामाजिक बीमारी है जो की आज कल समाज में काफी रफ़्तार पकडे गति कर रहा है| ये हमारे जीवन के मकसद को छोटा कर देने वाला प्रथा है| ये प्रथा पूरी तरह इस सोच पर आधारित है, की समाज के सर्व श्रेष्ठ व्यक्ति पुरुष ही हें और नारी की हमारे समाज में कोई महत्व भी नहीं है|इस तरह की नीच सोच और समझ ही हमारे देश की भविष्य पर बड़ी रुकावट साधे बैठे हें|दहेज प्रथा को भी हमारे समाज में लगभग हर श्रेणी की स्वीकृति मिल गयी है जो की आगे चल के एक बड़ी समस्या का रूप भी ले सकती है |

Dahej Pratha in English Essay

Dowry system entails giving huge amount of cash, jewellery and other gifts to the groom’s family by the bride’s parents as a condition at the time of marriage. The system was put in place due to a reason in India and that was that until a few decades back the girl child did not have any right over the parental property and other fixed assets and was given liquid assets such as cash, jewellery and other goods to give her a fair share. However, it has turned into an evil social system over the years.

The wealth and property that parents intend to give her daughter as a part of the dowry so that she can be self sufficient at the new place is unfortunately, in most cases, all taken by the groom’s family. Besides, while earlier this was a voluntary decision of the bride’s parents it has become more of an obligation for them these days.

Many cases of brides being tortured physically and emotionally for not bringing enough dowry have come up. In many cases, the bride turns to her family to meet the demands of her in-laws while others end up giving their lives to end the torture. It is time the government of India should take strict action to stop this evil practice.

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