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छठ पूजा कब है २०१८ तारीख और समय – Chhath Puja 2018 Dates  

चैती छठ पूजा 2017: छठ पूजा को हमारे देश के उत्तरी व उत्तर पूर्वी उत्तर प्रदेश व उत्तरी बिहार, नेपाल के साथ मिथिला राज्य व अन्य कई उत्तरी राज्यों में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार सूर्य भगवान को समर्पित है। इस दिन श्रद्धालु गंगा नदी के तट पर आकर पवित्र जल में स्नान करते हैं, छठ पूजा के दौरान लोग प्रार्थना करते हैं और सूर्य भगवान की पूजा कर उन्हें प्रसाद अर्पित करते हैं। इस त्यौहार को Chhat, Chhati, Chhat Parv, Chhat Puja, Data Chhat, Dala Puja, Surya Shasthi के नाम से जान जाता है जिसे हिंदी में छठी, छठ पर्व, छठ पुजा, डाला छठ, डाला पुजा, सूर्य षष्ठी से भी जाना जाता है | आइये जानें चैत्र छठ पूजा २०१७ यानी की छठ पूजा २०१६ डेट|

छठ पूजा का इतिहास

चैती छठ कब है 2017

Chhath Puja 2017 date: इस साल छठ पूजा 24 से 27 नवंबर 2017 ताऱीख तक मनाया जाएगा जो की मंगलवार से शुक्रवार तक मनाया जा रहा है|छठ पूजा कब है २०१७ तारीख और समय :

छठ पूजा 2017 का शुभ मुहूर्त

  • छठ पूजा पर सूर्योदय- सुबह 6.41
  • छठ पूजा 2017 : शाम 6.05 बजे
  • छठ पर्व तिथि – 26 अक्तूबर 2017, गुरुवार
  • षष्ठी तिथि प्रारंभ – प्रात: 09:37 बजे से (25 अक्तूबर 2017)
  • षष्ठी तिथि समाप्त – दोपहर 12:15 बजे तक (26 अक्तूबर 2017)

छठ व्रत की मुख्य तिथियां

24अक्तूबर 2017- खाए नहाय
25 अक्तूबर 2017- खरना
26 अक्तूबर 2017- शाम का अर्घ्य
27 अक्तूबर 2017- सुबह का अर्घ्य, सूर्य छठ व्रत को समाप्त करना

chaiti chhath puja 2017

छठ पूजा की विधि

छथि मैया की पूजा के पहले दिन, श्रद्धालु गंगा नदी के तट पर जाते हैं व् पवित्र जल में स्नान करते हैं। यह समारोह व इसका उपवास बहुत लोकप्रिय है। छठ पूजा के पहले दिन लोग दिन भर उपवास रखते हैं व शाम तक जारी रखते हैं।

व्रत के हैं होने पर सभी लोग घर में सूर्य देव की पूजा करते हैं| इस दिन घरो में लोग चावल, पुरी, केले, नारियल और अंगूर के साथ अपना व्रत खोलते हैं। डाला छठ पूजा के दूसरे दिन 24 घंटे तक का उपवास रखा जाता है| यह व्रत काफी कड़ाई से मनाया जाता है| यहां तक ​​कि इस दिन पानी का सेवन भी नहीं किया जा सकता है। परिवार में महिलाएं सभी खाना पकाने के बर्तन को साफ करती हैं जो छठ पूजा का जश्न मनाने के मुख्य भाग के लिए आवश्यक हैं।

श्रद्धालु प्रसाद लेकर गंगा नदी के किनारे जाते हैं और वहाँ सूर्य भगवान को अर्पित देते हैं। सूर्यास्त के बाद यह पर्व जश्न के साथ मनाया जाता है| सूर्योदय से पहले लोग नदी के किनारे जाते हैं व प्रसाद समर्पित करते हैं साथ उगते सूरज के लिए प्रार्थना करते हैं।आखिर में प्रार्थना और नदी में स्नान के बाद, उपवास समाप्त खोल लिया जाता है।

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