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अग्रसेन जयंती कविता 2018 – Maharaja Agrasen Jayanti Poem in Hindi – Kavita Pdf Download

महाराजा अग्रसेन जयंती 2018: महाराज अग्रेसन का जन्म कलयुग की शुरुआत में हुआ था | इनको अग्रवालों का कुलपिता कहा जाता है | महाराज अग्रसेन राजा धनपाल की छठी पीढ़ी में जन्मे थे तथा अपने पिता की ज्येष्ठ संतान थे | इन्होने अगरोदय नामक राज्य की स्थापना की जिसकी राजधानी अग्रोहा थी | इन्होने अपने राज्य की खुशाली के लिए काशी जाकर शिव जी की तपस्या की थी | इन्हे जीव-जंतुओं से बहुत प्यार था और वह देवताओं के लिए दी जाने वाली पशु बलि की प्रथा के खिलाफ थे | हिंदी, इंग्लिश, मराठी, तेलगु, बांग्ला, गुजराती, तमिल आदि की जानकारी देंगे जिसे आप अपने स्कूल में महराजा अग्रसेन जयंती के लिए प्रतियोगिता, कार्यक्रम या भाषण प्रतियोगिता में प्रयोग कर सकते है| ये कविता खासकर कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए दिए गए है|

अग्रसेन जयंती पर कविता

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अग्रवंश के गौरव हैं हम,
जिगर शेर का रखते हैं !
सेवा और सहयोग की भावना, दिल में हमेशा रखते हैं !
यूँ ही नहीं सब लोग हमें, धनवान कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
एक रुपईया एक ईंट का, हमको था संदेश मिला!
अग्रवंश के शिरोमणि का, सदियों पहले उपदेश मिला !!
इसीलिए सब लोग हमें, दिलदार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
ग्राम विकास या नगर विकास, रहते हैं सबसे आगे !
बड़े बड़े नेता और मंत्री, झुकते हैं अपने आगे !
घर को हमारे, राजा का दरबार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
माँस और मदिरा से रहते, बचपन से ही दूर सदा !
हमको अपनी विरासत में, पूर्वजों से संस्कार मिला !!
अनजाने भी पहली नजर में, गुणवान कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!
रजवाड़ों का खून है, और रजवाड़ों सी शान है !
हमको अपने कुल गोत्र पर, सदियों से अभिमान है !!
बिन कुर्सी के,
लोग हमें सरकार कहते हैं !
आगे रहने वालों को ही, अग्रवाल कहते हैं !!

अग्रवंश शिरोमणि, छत्रपति महाराजा श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की जय।।
अग्रवंश जननी माता माधवी रानी की जय।।
कुल देवी माता लक्ष्मी की जय।।
जय अग्रसेन जय अग्रोहा जय अग्रवाल

महाराजा अग्रसेन जयंती कविता

माथे पे अग्रोहा का चंदन मैं लगाने आया हूँ ।
एक परोपकारी राजा का मैं वंदन करने आया हूँ |
किया जिसने खुद को समाज को समर्पित ।
उस महाराज अग्रसेन को मैं नमन करने आया हूँ |

Maharaja Agrasen Jayanti Poem in Hindi

जिसके ह्रदय में दूसरे का हित बसता है,
उनको जगत में कुछ भी दुर्लभ नहीं है
जो अपने जैसा दूसरों को भी सुखी देखने की कामना रखते है,
उनके पास रहने से विद्या प्राप्त होती है
और अज्ञान का अंधकार दूर होता है

Maharaja Agrasen Kavita

वैश्य जाती में प्रतिष्ठित अग्रवाल का वर्ग,
गोत्र अठारह में प्रथम नोट कीजिए गर्ग,
नोट कीजिए गर्ग कि कुच्छल, तायल, तिंगल,
मंगल, मधुकूल, ऐरण, गोयन, बिंदल, जिंदल,
कहीं कहीं है नागल, धारण, भंदल, कंसल,
अधिक मिलेंगे मित्तल, गोयल, सिंहल, बंसल,
यह सब थे अग्रसेन के पुत्र दूलारे,
हम सब उनके वंशज है, वे पूज्य हमारे |

Agrasen Jayanti Kavita in Hindi

नाम अग्रवाल क्यों?
“न दौलत पर नाज़ करते है”
“न शोहरत पर नाज़ करते है”
“किया माता माधवी-अग्रसेन जी ने अग्रवाल के घर पेद्‍दा”
“इसलिए अपने कर्म पर प्रारम्भ से विस्वास करते है”,
“अत: मानव कल्याण के लिए धर्मशाला, हास्पिटल आदि का निर्माण करते है”
इसलिए अग्रवाल कहलाते है |

 

बंगले . गाडी तो ” agrawal ” की घर घर
की कहानी हैं…….

तभी तो दुनिया ” agrawal “
की दिवानी हैं.

अरे मिट गये ” agrawal ” को मिटाने वाले क्योकि आग मे
तपती ” agrawal ” की जवानी है

ये आवाज नही शेर कि दहाड़ है….. हम खडे हो जाये
तो पहाड़
है….

हम इतिहास के वो सुनहरे पन्ने है…..
जो भगवान राम ने ही चुने है….दिलदार औऱ दमदार
है” ” agrawal “

रण भुमि मे तेज तलवार है”” agrawal “
पता नही कितनो की जान है agrawal ” agrawal

सच्चे प्यार पर कुरबान है
“” ” agrawal

यारी करे तो यारो के यार है
“” ” ” agrawal “
औऱ दुशमन के लिये तुफान है
“” ” agrawal ” “”

तभी तो दुनिया कहती है बाप रे खतरनाक है
“” ” agrawal “”””

शेरो के पुत्र शेर ही ज़ाने जाते हैं, लाखो के
बीच. ” agrawal “
पहचाने जाते हैं।।

मौत देख कर किसी क़े पिछे छुपते नही ,
हम” agrawal ” ,मरने से क़भी डरते नही। हम
अपने आप पर ग़र्व
क़रते हैं, दुशमनों को काटने का जीगरा हम रखते हैं ,

कोई ना दे हमें खुश रहने की दुआ,तो भी कोई
बात नहीं…
वैसे भी हम खुशियाँ रखते नहीं,
बाँट दिया करते हैं।

Poem on Maharaja Agrasen Jayanti in Hindi

द्वापर युग का अंत हुआ तब अग्रसेन जी का जन्म हुआ
राम राज्य के पदचिन्हों पर ही इनका भी हर कदम हुआ
यज्ञ में पशु बलि देखकर पशुओं के प्रति जब उपजा प्यार
पशु बलि का तब से ही कर दिया उन्होंने बहिष्कार
धर्म क्षत्रिय त्याग उन्होंने वैश्य धर्म को अपनाया
लक्ष्मी माँ का पूजन करके धाम अग्रोहा बसवाया
युद्ध मे महाभारत के भी दिया पांडवों का ही साथ
विवाह हुआ था उनका नागराज पुत्री माधवी के साथ
एक रूपए और एक ईंट का दिया उन्होंने नारा था
हम सब एक बराबर कहकर सबको दिया सहारा था
पुत्र अठारह थे उनके जिनसे कुछ संकल्प करवाये थे
ऋषि मुनियों से इसी लिए उन्होंने यज्ञ भी करवाये थे
संकल्पों के अनुरूप उन्होंने अठारह गोत्र दिये
धन उपार्जन के भी उन सबको रास्ते नए नए दिए
न्यायप्रियता और दयालुता थी भरी हुई उनमे भरपूर
कर्मठता और क्रियाशीलता का मुख पर दिखता था नूर
इतिहास रचा उन्होंने अपनी अलग बनाई थी पहचान
मान मिला जग में उनको सबने माना जैसे भगवान
नाम गोत्र अठारह के भी दिए उन्होंने बहुत ही सुंदर
गर्ग गोयल गोइन बंसल कंसल सिंघल धारण मंदल
तिंगल ऐरन जिंदल मंगल नांदल भंदल मित्तल बिंदल
मधुकुल और कुच्छल रहें सभी यहां पर एकजुट होकर
इन सबके मिलकर रहने से अग्रवाल समाज में मंगल हैं
यही बनाते अपने भारत का और सुनहरा हर कल हैं
अश्विन शुक्ल की प्रतिप्रदा को जयंती इनकी हम मनाते हैं
भव्य भव्य आयोजन करके पूजा पाठ करवाते हैं
अग्रवाल होने का हमको गर्व बहुत है अपने पर
अग्रसेन के आदर्शों पर हम दिखलायेंगें चलकर

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